केवल सोनम वांगचुक अनशन नही कर रहे हैं, JNU की स्कॉलर Neha भी अनशन कर रही है. आरक्षण, जाति जनगणना, पिछड़ा दलित और आदिवासियों के मुद्दे पर Neha एक मुखर आवाज हैं.
एक सड़क छाप भाजपिल्ला नेता छात्रों के हत्ते चढ़ गया
फिर क्या था छात्रों ने उसको सड़क पर छाप दिया 😂🤪😝
देश का हिंदू सो रहा होगा पर लगता है छात्र नींद से जाग रहा है
आशा की एक छोटी सी किरण…..
पहले सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया फिर अभिजीत दीपके पर स्याही फेंका तो वहां ये महिला भड़का गई..
महिला: हमने और यहां आय हुए लोगों ने किसी का क्या अपमान किया..
पत्रकार: कुणाल कामरा का नाम ले रहे थे उन्होंने जो सीता माता के लिए बोला था..
महिला: कुणाल कामरा ने क्या किया गाली दिया..
और मोदी क्या करता है कभी हनुमान जी की पतंग बनाकर उड़ाता है कभी उसको भाजपा पार्टी का झंडा देकर उसको नचवाता है
बीफ एक्सपोर्ट में छाती पीटते हुए कहते है हमें गर्व है कि हम बीफ एक्सपोर्ट में पहले नंबर है।
किसी की हिम्मत है जो मोदी से इसपर सवाल कर दे हम लोग 20 तारीख को संसद तक जाएंग��� जिसमें हिम्मत हो रोककर दिखा दे..
दो कौड़ी के पत्रकार जो ये बोल रहे थे कि सोनम सर को गाली नहीं दिया गया है ओ ये वीडियो देखे
ये लड़का बोलता है कि सोनम सर को भेड़िये के तरह उठा के ले गए है ओर पहले ��ोनों पैर पकड़ा ओर बोला😡
उठ बे साले बहुत हो गया 🥹
एक वैज्ञानिक को इस तरह के भाषा का प्रयोग किया जा रहा है दिल्ली पुलिस द्वारा ☹️
गिरा दो इस यूनिवर्सिटी को
खंडरात बना दो वहीं मेरी कब्र भी वहीं बना दो
लेकिन याद रख्खो जिस दिन दुनिया का आखिरी दिन होगा यह खंडर चीख चीख कर कहेगा इसे बनाने वाले का नाम आजम खान है
20 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक जी को आज सुबह दिल्ली पुलिस जबरन उठाकर अस्पताल ले गई.
इस डरपोक और बेशर्म सरकार ने एक बार फिर से अपनी कायरता साबित कर दी.
"मेरे जैसा व्यक्ति, जो एक यूनिवर्सिटी का फाउंडर है, एक ऐसा मेडिकल कॉलेज बनाया है... आप देखेंगे तो राष्ट्रपति भवन शायद अच्छा न लगे। जहाँ बच्चे पढ़ेंगे... जहाँ प्रधानमंत्री जी बैठे हैं, उस जैसा हो। तकरीबन 500 एकड़ ज़मीन पर एशिया का लगभग सबसे खूबसूरत विश्वविद्यालय है। और यह मैंने इस तरह बनाया है मान्यवर... हाथ और दामन फैलाकर।
मेरे बच्चों के चार CBSE बोर्ड के स्कूल चलते हैं। ₹300-₹350 की फीस लेता हूँ। जिनके माँ-बाप नहीं हैं, उन्हें मुफ्त पढ़ाता हूँ, उन्हें ड्रेस मुफ्त देता हूँ, उन्हें किताबें मुफ्त देता हूँ। सड़क पर पत्थर तोड़ने वाला, रिक्शा चलाने वाला, मजदूरी करने वाले का ��च्चा और बच्ची पढ़ता है तो मात्र ₹20 दिए जाते हैं।
लेकिन मेरे जैसे व्यक्ति के साथ जो बर्ताव हुआ, उसने आज़ादी की सांसों को बहुत कम कर दिया है। और मैं यह कहना चाहता हूँ... सदन के उन तमाम साथियों से और उत्तर प्रदेश के जो जीतकर आए हैं, वो मुझसे व्यक्तिगत तौर पर वाकिफ हैं। और मैं इस सदन में कहना चाहता हूँ कि मेरे पूरे राजनीतिक जीवन में... अगर सूई की नोक के बराबर भी कहीं बेईमानी, रिश्वत और कोई भ्रष्टाचार या व्यक्तिगत रूप से किसी के साथ कोई ज़्यादती की गई हो... सरकारी कलम के साथ हो... तो मैं अभी इसी सदन को छोड़ने के लिए एलान करूँगा।"
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