राम मंदिर समर्पण राशि में हेरा फेरी के तार क्या कांग्रेस के कुछ नेताओं से भी जुड़े हुए हैं ? इसकी भी जांच होनी जरूरी है।
निर्मल खत्री कांग्रेस के बड़े नेता हैं, सांसद रहे, यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। निर्मल खत्री का एक खास सहयोगी है अनूप मिश्रा। निर्मल खत्री ने अपने इस सहयोगी अनूप मिश्रा को चम्पत राय जी से कह कर राम मंदिर की व्यवस्था में लगवा दिया था। कांग्रेस के बड़े नेता खुद कभी भी राम मंदिर के दर्शन करने नहीं गए लेकिन निर्मल खत्री के कहने पर ही चंपत राय ने अनूप मिश्रा को मंदिर में VIP दर्शन कराने की जिम्मेदारी में लगा दिया। बताया जाता है कि कुछ महीने पहले ही अनूप मिश्रा पैसे लेकर मंदिर दर्शन के फर्जी पास बनवाने के मामले में पकड़ा गया था, इससे पूछताछ हुई और अनूप को हटा दिया गया।
अब दिलचस्प बात देखिए अजय राय अभी 18 जून को जब अयोध्या पहुंचे तब मंदिर दर्शन करने के लिए उन्होंने इसी अनूप मिश्रा को साथ लिया। तस्वीर में अजय राय के पीछे अंगोछा बांधे व्यक्ति अनूप मिश्रा है।
निर्मल खत्री अपने कार्यक्रमों में अक्सर चंपत राय जी को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाते रहे हैं। ऐसा ही एक कार्यक्रम का वीडियो और तस्वीरें हैं यहां।
राम मंदिर में चंदा चोरी को लेकर हर रामभक्त आहत है.
राम के नाम पर लूट मचाने वालों को जेल होनी चाहिये और बेहद कड़ी सजा भी.
लेकिन सच ये भी है कि राम मंदिर को लेकर ज़मीन से अदालत तक की लड़ाई VHP/RSS/BJP ने ही लड़ी है.
VHP के अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल जी ने तो अपनी संपत्ति इसके लिये दान कर दी. आजीवन राम मंदिर की लड़ाई लड़ते रहे. आडवाणी जी की रथ यात्रा नहीं होती तो राम को लेकर इतना बड़ा आंदोलन ना होता.
हम सब ये भूल जाते हैं कि राम के नाम पर BJP की तीन सरकारें बिना किसी गलती के काँग्रेस ने बर्खास्त की थीं.
सच ये है कि ये तीनों संगठन नहीं होते तो आज राम का इतना भव्य मंदिर भी नहीं होता. मोदी सरकार नहीं होती तो भगवान राम “ उसी फटे हुए टेंट में रह रहे होते जहां पर बरसों से रामलला को रहना पड़ा था’’ बचपन में कई बार अयोध्या जब जाना होता था तो देख कर मन दुखी होता कि हिंदू धर्म को मानने वाले करोड़ों में हैं और उनके आराध्य टपकते हुए टेंट में रहते हैं. आज ये देखकर हिंदू धर्म के लोग गर्व कर सकते हैं कि उनके आराध्य का बेहद भव्य मंदिर बना है और ये VHP/RSS/BJP के बग़ैर असंभव था.
From the ₹20 note… to the real masterpiece.
Ellora Caves. Proof that some of India’s greatest treasures have been in our hands all along.
#Ellora#TravelIndia#IncredibleIndia
Few weeks old. Yet this level of security deployment, media attention, and response for Abhijeet Dipke's arrival.
The "cockroaches" have clearly done something.
CIVIL SERVICES (MAIN) EXAMINATION, 2025
The final result of the #CivilServicesExamination, 2025 has been declared on 06.03.2026. There are various media reports, wherein two candidates of same name i.e. Akanksha Singh, are claiming to have secured the same Rank 301 in the final result of the Civil Services Examination, 2025.
In this regard, it is clarified that as per the records of the Commission, the details of the successful candidate, who has secured Rank 301 in the final result of the Civil Services Examination (Mains), 2025 are as under:
Read here: https://t.co/tHYChyk9xC
What matters is what was said during the debate… On issues as serious as this there’s no room for statements that need this much clarification afterward.
I would like to start by being categorically clear: Jeffrey Epstein was a paedophile, child rapist and sex offender of the worst kind. I have said this always, and I say this now. His victims deserve nothing but the full ferocity of justice for what they suffered.
Clips from my show, selectively edited to suggest me implying anything else, have caused dismay. While this is categorically false and not remotely what I meant to convey in the flow of a TV debate, I can see why those clips have triggered many. For this, I sincerely regret any misunderstanding.
As a woman who takes a very clear view on sexual crimes, I stand unequivocally with those affected.
आगरा में एक पुरुषकर्मी ने अपनी महिला मित्र की हत्या की। उसके बॉडी को कई हिस्सों में काटा और बोरे में भरकर उसे डंप करने की कोशिश की। बोरा में बॉडी को लेकर ऐसे घूम रहा था मानो कुछ सामान बेचने निकला हो।
बहुत बर्बर हत्या की घटना थी। लेकिन इसके बाद कहीं मीम बनते देखा? कहीं बोरा देखकर महिलाओं को डरते देखा? कोई आउटरेज नहीं। क्योंकि पुरुषों की ओर से महिला को हत्या किये जाने की घटना को नार्मलाइज किया जा चुका है। अगर कहीं कोई महिला पुरुष की हत्या कर दे तो इससे पूरा पुरुष समाज खतरे में आ जाता है। हर महिलाओं को अपराधी के रूप में शक करने को प्रेरित किया जाता है। खासकर पेशेवर-कामकाजी महिलाओं पर अधिक अटैक किया जाता है।
शुरू से कह रहा हूँ,एक ख़ास पैटर्न (साज़िश पढ़ें) है महिलाओं को बदनाम करने की। उनपर सवाल उठाने की। यह संयोग नहीं प्रयोग है हर तरफ़ से महिलाओं पर सवाल उठाना!
क्यों?
क्योंकि आज़ाद-मजबूत-पढ़ी लिखी महिलाएँ फ़्यूडल समाज के ढाँचे में फिट नहीं बैठती है । उनका बिना सवाल किए घर की दहलीज़ में रहना सबसे आदर्श स्थिति मानी जाती है ।
लेकिन महिलाओं ने दहलीज़ लाँघ कर ख़ुद के लिए रास्ते बनाए । यह सोशल Disruption फ़्यूडल समाज को नहीं पचता है!
दुखद बात है कि मीडिया और सोशल मीडिया का रील वर्ग भी इस साज़िश का हिस्सा बन गया है ।