पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हिंदू मंदिर में भगवान शिव की पूजा कर रहे हिन्दू हैं जो की एकमात्र शिव मंदिर खैबर पख्तूनख्वा में बचा हुआ है इनकी दुश्वारियां और परेशानियां आप इस बात से समझ सकते हैं इन्हें जालीदार टोपी और मुस्लिम लिबास में ही रहना पड़ता है।
और कितने दुख की बात है #जमीयत उलेमा ए हिंद के मौलाना मदनी भारत पर आरोप लगा रहा हैं कि यहां मुसलमान डरा हुआ है।
जबकि सत्य यह है कि दुनिया में जहां भी विधर्मीयो की संख्या बढ़ी है वहां और कोई धर्म संप्रदाय मत पंथ सुरक्षित रह नहीं सकता,
और....
यदि किसी को ऐसा लगता है कि मैं गलत लिख रहा हूं तो वह मुझे उस देश और जगह का नाम बता दो 🙏
An Indonesian girl walks the streets of her hometown in traditional dress.
People seem shocked, as if they have forgotten what their culture was like before Islam.
मुस्लिम मोमिनपुरा,, जहां मुस्लिम ज्यादा वहां मोमिनपुरा
टोपी वाले की परेशानी भगवा गमछा🔥
हिन्दू ने किसी टोपी वाले को परेशान नहीं किया
ऐसा मदरसा क्या सीखा रहा है इनको जरा मदरसों की इंक्वारी होनी चाहिए 😡🔥
ये दृश्य आपको कुछ सीखाता है…सीखो 🔥
She's an ex-employee of Wipro (Pune).
She was pressured to convert, enter into a relationship with a Muslim man, and was forced to quit after she refused.
She even complained to the top management, but they refused to listen to her.
This is the condition in so-called big companies; imagine the condition of Hindu girls in small companies....
#CorporateJihad
जन्मना वर्णभेद का सनातन वैदिक धर्म से कोई लेना देना नहीं। यह सब आधुनिक अज्ञान जनित प्रपंच है।
महाभारत इस विषय में स्पष्ट कहता है कि आदि में केवल एक ब्राह्मण वर्ण था। पश्चात्, अपने कर्मों एवं प्रवृत्तियों के अनुसार भिन्न भिन्न वर्ण बने।
वेद तो एक ही मनुष्य में एकाधिक वर्ण होने की बात करता है - ब्रह्मम् च मे क्षत्रम् च मे।
हिंदुत्व, सनातन, वेद को दिन रात कोसने वाले स्वीकार कर लें कि आपका यह कुकृत्य व्यक्तिगत द्वेष व क्षुद्र स्वार्थ पर आधारित है, सत्य पर नहीं।
महाभारत का प्रमाण:
न विशेषोऽस्ति वर्णानां सर्वं ब्राह्ममिदं जगत्।
ब्रह्मणा पूर्वसृष्टं हि कर्मभिर्वर्णतां गतम्॥१०॥
काम-भोग-प्रियास्तीक्ष्णाः क्रोधनाः प्रियसाहसाः।
त्यक्त-स्वधर्मा रक्ताङ्गास्ते द्विजाः क्षत्रतां गताः॥११॥
गोभ्यो वृत्तिं समास्थाय पीताः कृष्युपजीविनः।
स्वधर्मान्नानुतिष्ठन्ति ते द्विजा वैश्यतां गताः॥१२॥
हिंसानृतप्रिया लुब्धाः सर्वकर्मोपजीविनः।
कृष्णाः शौचपरिभ्रष्टास्ते द्विजाः शूद्रतां गताः॥१३॥
शान्तिपर्व, अ० १८८।१०-१३
आदि सृष्टि में सब ब्राह्मण ही थे। कोई वर्ण विभाग नहीं था। कर्म से क्षत्रियादि वर्ण बनता गया।
जो ब्राह्मण काम-भोगप्रिय, तीक्ष्ण, क्रोधी, साहसप्रिय और युद्ध करने से सदा रक्ताङ्ग हुए वे क्षत्रिय गिने गये।
जो ब्राह्मण गोवृत्ति का अवलम्बन कर कृषि-कर्म में निरत हुए वे वैश्य और जो हिंसा, अनृतादि में संलग्न हुए वे शूद्र कहलाये।
राम राम
- संजीव नेवर
ये जो फोटो आप लोग देख रहे हो, यह नैना देवी मंदिर (नैनीताल) के बिल्कुल सामने हैं...
अगर बात इसके आकार की की जाए तो यह मंदिर से लगभग तीन से चार गुना बड़ी मस्जिद है...
अब प्रश्न यह उठता है...
अभी यहां के लोगों को मुझे नहीं पता कि इस मस्जिद से दिक्कत हो रही है या नहीं हो रही है लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं आने वाले समय में इस मस्जिद में जितने भी जि हादी यहां आकर नमाज पढ़ेंगे, हो सकता है अभी उन जि हादियों की संख्या कम हो....
इसलिए यहां के लोगों को दिक्कत ना हो रही हो..
लेकिन जैसे-जैसे इन जिहादियों की संख्या या बढ़ेगी वैसे-वैसे यहां के जो लोकल लोग है...
उनकी परेशानियां बढ़ने लगेगी...
अब आते हैं मुख्य बात पर मैंने नैना देवी मंदिर के जस्ट सामने एक रेस्टोरेंट है..
उसमें खाना खाया जिसका नाम था रॉक रेस्टोरेंट जैसे मैं उसे रेस्टोरेंट के अंदर इंटर हुआ तो वहां पर जो लोग बैठे हुए थे उनके माथे पर तिलक था..
जैसे कि मेरी आदत है की सबसे पहले मैं यह देखता हूं कुछ भी सामान खरीदने से पहले या कुछ भी खाने से पहले कि वह दुकान हिंदू की है या नहीं यहां भी वही हुआ जैसे ही मैंने उसको देखा उसके माथे पर तिलक था तो मुझे लगा शायद यह हिंदू है और हिंदू का ही रेस्टोरेंट है....
खाना खाकर जैसे ही मैं कैश काउंटर पर बिल देने के लिए गया, मैंने QR कोड स्कैन किया तो नाम आता है उस पर रियाज अहमद...
अब सोचने वाली बात यह है जहां यह लोग माइनॉरिटी में है, वहां यह लोग वहां के जो लोकल लोग हैं उनके काम धंधों पर धीरे-धीरे अपना कब्जा कर रहे हैं..
आज इन लोगों को उस मस्जिद से दिक्कत नहीं है ओर ना आज इन लोगों को इस बात से दिक्कत है कि यह लोग हिंदुओं के काम धंधों पर कब्जा कर रहे हैं.....
कल को ज़ब ये मलेछ, मंदिर में आई हुई बहन बेटियों को छेड़ेंगे... तब वहां का हिंदू सरकार को दोष देगा...
इतनी बड़ी मस्जिद बन गई वह भी वहां पर जो एक तरीके से टूरिस्ट के आकर्षण का केंद्र है यानी कि नैनी झील पर...
तब यहां की सरकार और यहां के लोकल्स कहां सो रहे थे?
मेरा कहना सिर्फ इतना है जब यह लोग इस तरीके की एक्टिविटीज करते हैं जैसे मस्जिद बनाना मजार बनाना तब हिंदू अपने आसपास हो रही इस तरीके की गतिविधियों को देखकर चुप कैसे रह रहा है....?
आने वाले समय में ऐसा ना हो यह दूसरा कश्मीर बन जाए जिस तरीके के हालात पिछले तीन दिन से मैं (नैनीताल ) उत्तराखंड में देख रहा हूं....
उत्तर प्रदेश के गढ़ गंगा के बाद से उसके बाद मुरादाबाद और फिर नैनीताल के रास्ते होते हुए कैंची धाम, अल्मोड़ा और कसार देवी मंदिर तक...
मैंने जो मुख्य रूप से चीज नोटिस की है वह यह है मुख्य मुख्य रास्तों पर यहां तक की जो नैनीताल से निकलकर अल्मोड़ा तक नेशनल हाईवे जाता है उसे पर भी काफी जगह मैंने देखा इन्होंने रोड के किनारो पर दुकान लगा रखी है और तो मस्जिद मजार बना रखी है अब यह लोगों का जो टारगेट है पूरे उत्तराखंड को अपने कब्जे में लेने का है... ऐसा मुझे लगता है...
समय है सम्हल जाओ, वरना हिंदू अपने विनाश का कारण खुद बनेंगे....
इसलिए कहते हैं,
अपने ग्राहकों का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए, और उन्हें खुली चुनौती तो बिल्कुल नहीं देनी चाहिए।
अनुराग कश्यप एक समय बहुत शानदार डायरेक्टर माना जाता था। उसकी विचारधारा से मैं कभी भी सहमत नहीं रहा।
हम लोगों का उससे विचारों में फर्क था, फिर भी हम लोग उसका काम पसंद करते थे। लेकिन बाद में उसमें घमंड आ गया।
फिर वो जनता को ही सुनाने लगा....
कभी Twitter पर गाली-गलौज, कभी अपनी फिल्मों के Boycott को लेकर खुलेआम चैलेंज देना, उसने सब किया। एक बार उसने कहा था, “मैं ब्राह्मणों पर मूतता हूं।”
दर्शकों ने भी फिर उसे उसी अंदाज में जवाब दे दिया।
अब हालत ये है कि बड़े-बड़े Production House उसके साथ काम करने से बच रहे हैं। Netflix ने भी उसका एक बड़ा Project छोड़ दिया।
सुना जा रहा है कि इसके बाद उसे 2 Heart Attack भी आए और अब वो Depression में है।
लेकिन अब इतना तय माना जा रहा है कि Amazon Prime और Netflix जैसी कंपनियां अब ऐसी फिल्मों या Web Series पर हाथ डालने से बचेंगी, जिनमें सीधे हिन्दू धर्म, देवी-देवताओं या हिन्दू भावनाओं के साथ खिलवाड़ दिखे।
और जिन्हें लगता है कि ये कलाकार की आजादी के खिलाफ है, वो फिर पैगम्बर या किसी दूसरे मजहब पर फिल्म बनाकर भी अपनी आजादी दिखा सकते हैं।
हिन्दू जागरूक हो चुका है। अब देवी देवताओं का अपमान करके फिल्मों से मुनाफा नहीं कमा पाएंगे।
Meet Mohammad.
He was not happy during an islamic wedding because his wife was not wearing Hijab.
He started beating her.
When the law enforcement agency tried to arrest him, he quoted Quran 4:34 & said, "this is allowed, Don't come between my religious beliefs."
This guideline on Namaz is from government of Qatar, which funds Al Jazeera
Basically, it's illegal to do Namaz in open in Qatar, Al Jazeera's home country but same Al Jazeera is calling it human rights violation in India
Disagree. I’ve traveled enough places to know every culture celebrates loudly in its own way.
Italians on winery tours. Russians on Goa beaches at 2 AM. American sports fans. Chinese tour groups with megaphones at the Louvre. Brazilians at Carnival. Spanish at La Tomatina. Nigerians at Owambe parties throwing cash for hours. Saudis at weddings.
The only question is whether they’re hurting anyone.
This is a Gujarati group dancing on the tarmac after landing. They look like they just finished a destination wedding or trip. They’re not blocking the runway. Not hurting anyone. Not being rude to staff. Not damaging property. The plane has already landed.
16 seconds of joy.
Calling this the reason Indians face racism abroad gives racists too much credit. Racism existed before viral videos. Black, Asian, Arab, African, Latino people all face it.
The common factor isn’t loud celebrations. It’s being non-white in white-majority spaces.
The fact of the matter is that the Indians complaining are usually upper-middle-class folks who’ve adopted Western norms of restraint, now embarrassed when working-class or middle-class Indians celebrate in their own way.
That Gujarati family probably saved for years to take this trip. Their joy is genuine.
The reason we get stereotyped is beyond a simple dance.
Visa scams. Fake university rackets. Caste discrimination in Western workplaces. Treating hotel staff badly. Haggling with small businesses on trips.
Loud dancing isn’t on that list.
Confident cultures don’t shrink themselves to avoid racism. Italians don’t apologise for being Italian. Spaniards don’t tone down. We, Indians shouldn’t either.
Let the family enjoy their moment.
इनका नाम अतुल सुभाष था।
34 साल। बेंगलुरु में प्राइवेट कंपनी में डिप्टी जनरल मैनेजर। एक बेटे के पिता व्योम।
उन्होंने सिस्टम से उम्मीद नहीं की कि कोई उनकी बात सुनेगा।
उन्होंने हर चीज़ खुद रिकॉर्ड की।
उन पर एक साथ 9 केस दर्ज हुए 498A, घरेलू हिंसा, मेंटेनेंस, कस्टडी।
हर सुनवाई के लिए उन्हें बेंगलुरु से जौनपुर तक 1700 किलोमीटर का सफर करना पड़ता था।
4 साल में 40 बार वही सफर।
120 कोर्ट हियरिंग्स।
उन्होंने आरोप लगाया कि केस वापस लेने के लिए 3 करोड़ रुपये मांगे गए।
अपने ही बेटे से मिलने के लिए 30 लाख रुपये अलग से।
अपने वीडियो में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक फैमिली कोर्ट जज ने अनुकूल आदेश के लिए 5 लाख रुपये मांगे।
9 दिसंबर 2024 को उन्होंने बेंगलुरु के फ्लैट में आत्महत्या कर ली।
पीछे छोड़ा — 24 पन्नों का नोट और 81 मिनट का वीडियो।
हर तारीख। हर केस नंबर। हर यात्रा। हर रकम।
सब कुछ रिकॉर्ड किया हुआ।
मरने से पहले उन्होंने अपने परिवार से सिर्फ एक बात कही:
“मेरी अस्थियाँ गंगा में तब तक विसर्जित मत करना, जब तक न्याय न मिले।”
उनकी मां सुप्रीम कोर्ट गईं, अपने पोते से मिलने की अनुमति मांगने।
उन्हें कहा गया — “आप बच्चे के लिए stranger हैं।”
फिर सुनवाई आई।
जज छुट्टी पर थे।
एक साल की तारीख मिल गई।
इसी बीच, ट्विशा शर्मा केस में सिर्फ 11 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।
बार काउंसिल ने घंटों में कार्रवाई कर दी।
AIIMS की मेडिकल टीम चार्टर्ड प्लेन से भेजी गई।
11 दिन में पूरा सिस्टम दौड़ पड़ा।
अतुल सुभाष 81 मिनट का रिकॉर्डेड सबूत छोड़ गए थे।
उन्हें मिला एक साल का इंतज़ार।
उनकी अस्थियाँ आज भी गंगा का इंतज़ार कर रही हैं।
उनका बेटा व्योम अब 6 साल का है।
अतुल सुभाष को न्याय मिलना चाहिए।
अगर रिकॉर्डेड सबूत, दस्तावेज़ और एक इंसान की आखिरी पुकार भी सिस्टम को नहीं जगा सकती, तो फिर आम आदमी आखिर जाए कहाँ?
The Islamist terrorist Nesip Dedeler from Turkey who carried out a random mass-stabbing attack in Switzerland today has two brothers who have also been flagged by the security police for Islamist radicalization and support of terrorist organizations.
All 3 brothers belonged to a an extremist group centered around the An’Nur Mosque.
Several Swiss citizens who were frequent visitors of the mosque joined ISIS and traveled to Syria to murder infidels in 2015.
Europe has massive problems, which are played down by the Islamists’ allies in the far-left.
This woman was threatened because she posted videos of women having hair cuts in her salon.
In response, she made this video of women having hijab cuts.
Rights???