मोदीजी जी के पीछे पड़ने से काम नहीं चला तो ज्ञानेश कुमार के पीछे पड़ गये।
जब तक अपने कुकर्मों का त्याग करने पर चिंतन नहीं करेंगे तब तक ऐसे ही किसी से भी पीछे रहेंगे, आगे नहीं जा पाएंगे।
चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार द्वारा SIR किया जाना उनका संवैधानिक कर्तव्य व दायित्व है, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया है। उनके संवैधानिक कर्तव्य व दायित्व पर अनर्गल बयानबाजी आरोप टिप्पणी प्रश्न उठाने का अधिकार किसी को नहीं है।
मोदीजी की डिग्री का मामला अहम तब होता जबकि जन प्रतिनिधित्व कानून में नेताओं के लिये कोई शैक्षणिक योग्यता के मानक निर्धारित किये गये होते। जहां तक चुनाव आयोग के समक्ष शपथ पत्रों में प्रस्तुत तथ्यों की सत्यता की बात है, अगर सच्चाई से वास्तविक जांच हो तो कहीं पूरी संसद खाली हो जाए
इस्लामिक कट्टरपंथी मुस्लिम चाहे जितना ये कहकर अपना बचाव करें कि आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता लेकिन विश्वपटल पर घटित घटनाक्रमों में मुसलमान ही मानवता के लिये सबसे ज्यादा संदिग्ध व खतरनाक प्रमाणित है।
एक ही इंजन खींच रहा है, एक ही पटरी पर दौड़ रहे हैं, पहुँचेंगे भी सभी निश्चित समय एक ही स्टेशन पर, फिर भी अनुभव सबका अलग है और ये अनुभव हम-सबका अलग-अलग होना ही तो हमारी नियति है, जो हमारे कर्मों से बनती है।
@Iftekha39418001 ज्ञानेश कुमार की ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठपूर्ण कार्यप्रणाली बेईमान विपक्ष को नहीं भा रही।
SIR संवैधानिक प्रमाणित प्रक्रिया पर गलत प्रश्न उठाकर वोट चोरी कहने वालो पर कठोर कार्यवाही होनी ज़रूरी है।
ज्ञानेश कुमार की ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठपूर्ण कार्यप्रणाली बेईमान विपक्ष को नहीं भा रही।
SIR संवैधानिक प्रमाणित प्रक्रिया पर गलत प्रश्न उठाकर वोट चोरी कहने वालो पर कठोर कार्यवाही होनी ज़रूरी है।
यूजीसी जैसे भेदभावपूर्ण एकतरफ़ा कानून बनाने वाले नीचता की हद से भी गिरे हुए लोग हैं और मानवता के दुश्मन दिमाग़ी नक्सल कहे जाने वालो से भी खतरनाक हैं। ऐसे राक्षसों को तो जीने तक का अधिकार नहीं मिलना चाहिए वरना ऐसे राक्षस सम्पूर्ण मानव सभ्यता का नाश कर डालेंगे।
पप्पू की अक्ल चर गये गधे। कह रहा ज्ञानेश कुमार ने मोदी की मदद की। कौन समझाये कि २०१९ में जब ज्ञानेश नहीं थे मोदीजी ३०३ सीट जीती और २०२४ में ज्ञानेश की मदद से २४० जीते तो ज्ञानेश से पप्पू की मदद हुई कि मोदी की ?
SIR पर ज्ञानेश कुमार से स्तीफा मांगने वाले सुप्रीमकोर्ट की अवमानना व उसका अपमान कर रहे क्योंकि SIR की प्रक्रिया पर सुप्रीमकोर्ट की मोहर लग चुकी है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के काम को सुप्रीमकोर्ट ने क्लीनचिट दी है।
काश ज्यूडीशरी भ्रष्टाचार में लिप्त रहने के स्थान पर सजगता से कर्तव्य परायणता से अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वहन करती तो किसी की किसी के भी विरुद्ध अनर्गल बोलने की हैसियत ही नहीं होती।
SIR पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अविश्वास व आराजकता के लिये कहीं न कहीं सुप्रीमकोर्ट की उदासीनता ज़िम्मेदार है वरना जिस SIR प्रक्रिया को सुप्रीमकोर्ट से मंज़ूरी मिली और जिस सुप्रीमकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त को क्लीनचिट दी हो उस पर प्रश्न व लांछन का सवाल ही नहीं बनना चाहिए।