माफिया अतीक अहमद के बेटे अबान को सुपुर्द-ए-खाक करने से पहले एक ऐसा वाकया भी हुआ, जिसने सबको चौंका दिया। यहां जनाजे की नमाज किसी मौलवी ने नहीं, बल्कि अतीक के सबसे बड़े बेटे उमर ने पढ़ाई। उसने छोटे भाई अबान के शव को दफनाने से पहले नमाज ए जनाजा अदा कराई।
सबसे ज्यादा चर्चा यह रही कि क्या उमर अब दीन-दुनिया छोड़कर इबादत की राह पर चल पड़ा है। दरअसल, आमतौर पर नमाज ए जनाजा को मौलवी अदा कराते हैं। शन���वार को कसारी मसारी स्थित कब्रिस्तान में भी मौलवी को बुलाया गया था। हालांकि, जब नमाज पढ़वाने की बारी आई, तभी अतीक के तीसरे बेटे अहजम ने बड़े भाई उमर से कहा कि भाई, नमाज आप अदा करिए
उमर ने भी भाई की इस बात को पूरी तवज्जो दी। उसने ही कब्र के पास सबसे आगे आकर नमाज अदा कराई। उसके पीछे भाई अली, अहजम और परिवार के अन्य लोग मौजूद रहे और सभी ने नमाज पढ़ी।
ये हैं मोहित चौपड़ा 8 अगस्त को बरेली में आला हज़रत के उर्स म���ं गए थे, वहां लाखों मुसलमानों की भीड़ थी लेकिन ये अकेले हिंदू थे फ़िर भी इनको कोई डर नहीं लगा।
बाक़ी बीजेपी के नेता हिंदुओं को डराने के लिए बोलते हैं कि एक हिंदू 100 मुसलमानों के बीच में सेफ नहीं रह सकता जबकि ये मोहित चौपड़ा लाखों मुसलमानों के बीच में सेफ थे।
आप ख़ुद ही सुन लो इस वीडियो में मोहित चौपड़ा क्या बोल रहे हैं!
वक्त का यह कैसा दर्दनाक सितम था... कि चार साल के लंबे इंतज़ार के बाद भाइयों की यह मुलाकात सीधे कब्रिस्तान की खामोश मिट्टी पर हुई।
इलाहाबाद की ज़मीन पर जब अली अहमद सा��ब ने अपने छोटे भाई अबान अहमद को सुपुर्द-ए-खाक किया, तो उनका सब्र इस तरह टूटा कि वे फफककर रो पड़े। ऐसे में भाई उमर साहब ने आगे बढ़कर उन्हें सीने से लगाया और ढांढस बंधाया।
ज़रा सोचिए उस बेबसी के आलम को—जिस भाई ने पिछले सिर्फ एक साल में सलाखों के पीछे अली अहमद साहब से 49 बार मुलाकात की हो, जो उनकी हर जरूरत का सामान और किताबें लेकर चुपचाप हाजिर हो जाता हो... आज उसी भाई के जनाजे को उन्हें कंधा देना पड़ा।
किस्मत का यह फैसला भी अ��ीब है; चार साल बाद भाइयों का मिलन हुआ भी तो ऐसे मोड़ पर, जहाँ एक भाई हमेशा के लिए खामोश हो गया। परवरदिगार इस गहरे दर्द को सहने की कुव्वत और सब्र-ए-जमील अता फरमाए। 💔
एक सीधा सवाल
अगर सरकार वास्तव में न्याय नियम और कानू�� के दायरे में काम करती है तो अतीक अहमद के बेटे के मामले में भी वही कानून और वही न्यायिक प्रक्रिया लागू होनी चाहिए
"कानून किसी के लिए नरम और किसी के लिए सख़्त क्यों?
सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना हमारा अधिकार है
और जवाब माँगना हमारी ज़िम्मेदारी,,,
न्याय सबके लिए बराबर होना चाहिए,,,चाहे व्यक्ति
किसी भी परिवार या राजनीतिक पृष्ठभूमि से हो।,, ⚖️
पूर्व सांसद मरहूम अतीक अहमद साहब के सबसे छोटे फ़रज़ंद अबान अहमद के जनाज़े में शिरकत की। अल्लाह तआला उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए और जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फ़रमाए।
इस ग़म की घड़ी में ग़मज़दा ख़ानदान को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। इस मौक़े पर उनके सभी भाइयों से मुलाक़ात कर ताज़ियत पेश की।
#AbaanAhmad #Prayagraj #Allahabad
आप के लिए मैं एक टीचर हूँ,
ऐसी बातें सुनता हूं तो दिल बैठ जाता।
पेपर लीक पर लीक हो रहे हैं राहुल गांधी जी का छात्रों के संवाद जोड़ पड़ता जा रहा है।
गवर्मेंट ध्यान नहीं देगी की कौन देगा?
अल्लाह आपको सब्र और हिम्मत दे,
अल्लाह आपकी रिहाई आसान करे और मरहूम की मग़फ़िरत करे। आमीन।
कई सालों बाद मिले तो सही, लेकिन परिवार के कई लोगों को ���ो चुके हैं।
अल्लाह का शुक्र है बंदो ने हिम्मत नहीं हारी। हारना भी नहीं भाइयों।
इलाहाबाद चकिया में अली अहमद और उमर अहमद की एक झलक प��ने के लिए पूरा इलाहाबाद उमड़ पड़ा है।
मरहूम अबान की मिट्टी में लाखों की भीड़। अल्लाह मरहूम को जन्नत नसीब फरमाए।