@kgahlot In this environment when we often hear or read bad news about wards of politicians, this news gives a good feel. Congratulations to entire Gehlot family.
@TejashwiYdvRJD Depends, whom they want to replace him with ?? With deeply fragmented opposition and no clear agenda except to remove Modi, a loud 'NO'.
@SanjeevChand19@SupriyaShrinate तो आपका क्या कहना है, विपक्ष को मजबूत करना सत्ता पक्ष का काम है ? सत्ता पक्ष तो ऐसा करेगा ही। विपक्ष को स्वयं इतना मजबूत होना चाहिए की सत्ता पक्ष घबराए। यहां तो विपक्ष स्वयं अपने आपको कमजोर किए जाने के अवसर देता रहता है।
Attacked for neutral post on PM's speech: Shashi Tharoor's veiled dig at Congress https://t.co/lpRmdlX4yE
जब लोग आपको जिता कर सरकार बनवा देते हैं तो आप से केंद्र से झगड़ने की नहीं बल्कि समन्वय की उम्मीद रखते हैं।
@VijaySingh_law फिर इतने मौके आए। महागठबंधन भी बन लिया। मौका तो लेना पड़ता है। अब अगर पी एम नहीं बन पाए तो कमी इनमें है, इनकी नीतियों में है। जनता जुड़ नहीं पाती इनसे।
@GlobalPulseXHQ Most of the children's behaviour is learnt behaviour, means by copying someone, like their parents or other children. Parents should be very careful to watch their own behaviour as well as of those who accompany their child
@Sheetal2242 प्रधानमंत्री उनकी राष्ट्रपति ओबामा के साथ अपनी घनिष्ठता के संदर्भ में तू तड़ाक की बात कह रहे हैं। जबकि राहुल जी भारत के प्रधानमंत्री के प्रति अपनी घृणा तथा सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के चलते ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं जो कि उनके खुद के समर्थक पसंद नहीं कर रहे हैं।
@JamilAh88145045@SupriyaShrinate 7 राउंड के बाद ये और इनके काउंटिंग प्रतिनिधि कहीं चले गए थे क्या? काउंटिंग का वेब साइट से क्या लेना देना? परिणाम तो हम भी देख रहे थे। हमारे सिस्टम पर तो वेब साइट बंद नहीं हुई। ये किसी और वेब साइट पर चले गए होंगे।
@aabidhussaininc@INCIndia ठीक से पढ़ तो लो। ऑपरेशन सिंदूर के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किए थे उनकी बात हो रही है। क्या पहलगाम के आतंकियों को पकड़ना ऑपरेशन सिंदूर के लक्ष्यों में था?
@Aadhyayadavv@yadavakhilesh मुसीबत तो यही है, समाजवादियों के लिए चुनाव में जीत का मतलब 'राजतिलक'। अभी भी राजशाही मानसिकता से ऊपर नहीं उठ पाए ये लोग। ऐसे लोगों से जनता अराजकता और अत्याचार के अलावा क्या उम्मीद रखे?