1. उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद में प्रसिद्ध मान्यवर श्री कांशीराम जी नगर में स्थित तथागत गौतम बुद्ध पार्क शहर का सबसे लोकप्रिय पार्क है। जो यह बौद्ध धर्म एवं बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी व मान्यवर श्री कांशीराम जी एवं विभिन्न वर्गों, विशेषकर बहुजन समाज के अनुयायियों की आस्था का स्थल है। लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार गौतम बुद्ध पार्क में नगर निगम मुरादाबाद द्वारा सीनियर केयर सेन्टर का निर्माण किया जा रहा है जिससे लोगों में रोष व्याप्त है तथा अशान्ति का माहौल बना है। सरकार सीनियर केयर सेन्टर पर तत्काल रोक लगाये ताकि समाज में शान्ति-व्यवस्था, आपसी भाईचारा का वातावरण बिगड़ने ना पाये।
2. इसके साथ ही, भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कल्याण हेतु, स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान के तहत उत्तर प्रदेश में चार मेडिकल कालेजों की स्थापना की गयी थी, जिनमें भारत सरकार के निर्देशानुसार इन वर्गों को 70 प्रतिशत सीटें आवंटित की गयी थी। अब इन चारों मेडिकल कालेजों में माननीय न्यायालय द्वारा अन्य मेडिकल कालेजों की भाँति ही अनुसूचित जाति को 21 प्रतिशत आरक्षण व अनुसूचित जनजाति को 2 प्रतिशत का आदेश पारित किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार कमजोर वर्ग के व्यक्तियों के हित को ध्यान में रखते हुये माननीय न्यायालय के समक्ष वास्तविक तथ्य प्रस्तुत कर माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश निरस्त करवाये ताकि कमजोर लोगों का हित सुरक्षित रह सके।
पूर्ववर्ती यूपी सरकार ने विशेष ग्रांट कॉम्पोनेंट के तहत उत्तर प्रदेश के 44 सरकारी/ऑटोनॉमस मेडिकल कॉलेजों में से सिर्फ 4 मेडिकल कॉलेजों - कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन, और सहारनपुर की कुल 340 सीटों पर एक आरक्षण फॉर्मूला लागू किया था। ताकि हाशिए पर पड़े समाज के बच्चे भी डॉक्टर बनकर समाज में बराबरी का स्थान हासिल कर सकें।
लेकिन अब माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंड़पीठ ने मेडिकल कॉलेजों की इस विशेष आरक्षण व्यवस्था को रद्द करके सीधे-सीधे अनुसूचित जाति के अधिकारों पर हमला कर दिया है।
यह विशेष आरक्षण व्यवस्था इसलिए बनाई गई थी ताकि दशकों से शिक्षा से वंचित समाज को मेडिकल की पढ़ाई में बराबरी का मौका मिल सके। लेकिन कोर्ट ने संविधान की आत्मा, सामाजिक न्याय को नज़रअंदाज़ कर दिया।
याद रखिए, आरक्षण कोई भीख नहीं, यह ऐतिहासिक अन्याय का मुआवज़ा है। अगर समाज के सबसे वंचित तबके को ही मेडिकल कॉलेजों से बाहर कर दोगे, तो डॉक्टर बनने का सपना कौन पूरा करेगा? क्या सिर्फ़ अमीर और सवर्ण वर्ग के लिए शिक्षा का दरवाज़ा खुला रहेगा?
हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा या कॉलेज की सीट के लिए नहीं है, बल्कि समानता, न्याय और आरक्षण के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। इस निर्णय के चलते हमारे विद्यार्थियों को उनके हक से वंचित करना अन्यायपूर्ण है। हम इसे सहन नहीं करेंगे।
हम इसे अदालत तक सीमित नहीं रहने देंगे। एकल पीठ के इस फैसले को उच्च न्यायालय की डबल बेंच और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती देंगे, ताकि अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के शैक्षणिक अधिकार और न्याय सुनिश्चित हो सके।
आजाद समाज पार्टी @CMOfficeUP से मांग करती है कि अगर वह सच मे अनुसूचित जाति के हितैषी हैं तो इस फैसले के खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट में अपील करे और मेडिकल शिक्षा में वंचित समाज का हिस्सा सुरक्षित रखे। यही बाबा साहेब अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अगर उत्तर प्रदेश सरकार इस प्रकरण मे लापरवाही करती है तो अनुसूचित जाति समाज को भी इनका असली चेहरा नजर आ जायेगा।
#SocialJustice #Reservation #Bahujan
हम MBBS 2019 बैच के स्टूडेंट्स ने पहले भी इंटर्न स्टाइपेंड वृद्धि के लिए आवाज़ उठाए थे।
हमें खुद कुछ नहीं मिला, लेकिन हम ये लड़ाई सिर्फ अपने लिए नहीं, अपने जूनियर्स के लिए लड़ रहे थे और आज भी लड़ रहे हैं।हर MBBS इंटर्न को उसका हक़ मिलना चाहिए।
#UP_MBBS_STIPEND_HIKE#mbbsstudent
“Fair, Dignified and Uniform Stipend” is the long pending Demand by Interns across the country and in Uttar Pradesh the pay scale has crossed all limits of shamelessness by paying only 12,000 p/m (387 ₹ per day) to make anyone feel ashamed knowing about the condition of Intern doctors in a state that talks about development and applaud on making the country 4th top economic capital of the world .
These doctors are standing outside the House of hon health minister @brajeshpathakup and waiting for him to listen to their demands and bring action
Respected @myogiadityanath ji humbly requesting you to look into this issue .
Breaking 🚨
MBBS Interns in UP Demand Hike in Stipend, Call ₹12,000 ‘Exploitative’
MBBS interns in Uttar Pradesh are being paid just 12000 rupees per month. This is one of the lowest internship stipends in the entire country.
In other states, this is what interns are paid:
Assam - 35000
Karnataka - 30000
West Bengal - 29700 to 32000
Delhi - 26300 to 28000
Tamil Nadu - 25000 to 27300
Kerala - 23000 to 25000
Goa and Andhra Pradesh - 20000
Why is UP always at the bottom when it comes to respecting its doctors? The interns and medical students of Uttar Pradesh are demanding a uniform stipend of 26000 to 30000 rupees per month, timely and regular payments without delays, and parity with other states as per NMC norms and minimum wage laws.
@UPGovt@myogiadityanath@myogioffice@kpmaurya1@brajeshpathakup