ऐसा करने से कौन सी शिकायते कम हो जाएंगी,फर्क उनको पड़ेगा जो रोजी रोटी कमाने ट्रेन से रोज सफर करते हैं,फर्क उनको पड़ेगा जो अपने परिवार से मिलने जा रहे है,उन बच्चो को पड़ेगा जो अपने पिता का काम से आने का इंतजार कर रहे होंगे,
नाराजगी जाहिर करनी है तो और तरीके होंगे,पर ये मत करोplz
सच तो ये है कि जिस तरह की महँगाई है उसमें घर चलाना, बच्चों को पढ़ाना और घर के बड़े बुजुर्गों के दवा-इलाज के लिए बचाना नामुमकिन है, ये बातें परिवारवाले बख़ूबी जानते हैं। इसीलिए 1 लाख महीने में भी घर खींचतान के चलता है।
सरकार को ये फ़ैसला लेना चाहिए कि 12 लाख सालाना तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
इस आय तक के लोग ही सबसे बड़ी संख्या में GOODS की ख़रीदारी करते हैं SERVICES के उपभोक्ता भी होते हैं। ये जब ख़र्च करेंगे तो सरकार की आय वैसे ही बढ़ेगी। मध्य वर्ग में जब आर्थिक सक्रियता आयेगी तो इस सरकार के राज में अर्थव्यवस्था का जो ठहरा हुआ चक्का है, वो अपने आप घूमेगा। वैसे भी इस आय वर्ग में जितना टैक्स आता है, उससे अधिक TAX के Structure, Administration & Management पर ख़र्च हो जाता है।
@ArvindKejriwal Heat wave at its peak... everyone knows and suffering ,then why work from home is not announced ,only for 10-15 days atleast ,why offices can't be closed , every day when my family members or others (lives matters)are going to their offices or work places