तेजस्वी यादव जी ने अल्ता कमलपुर के सभा में फिर से कबूला के अभयपुर पुल का निर्माण में अख्तरूल ईमान साहब का ही योगदान है।और उसी के वजह से पास हुआ
अमौर बैसा के लोगों को समझने कि जरूरत है।
बातो के जखम बड़े गहरे होते है साहिब कत्ल भी हो जाते है और खंजर भी नही दिखते...
कुछ अजीब सा चल रहा है, ये वक़्त का सफ़र, एक गहरी सी खामोशी है खुद के ही अंदर, खूबियां इतनी तो नहीं, किसी का दिल जीत सकें लेकिन ... कुछ पल ऐसे ज़रूर छोड़ जाएंगे, कि भूलना भी आसान ना होगा...!!
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-कातिल में है? वक़्त आने दे बता, देंगे तुझे ऐ आसमाँ! हम अभी से क्या बतायें, क्या हमारे दिल में है?
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है। देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-कातिल में है? वक़्त आने दे बता, देंगे तुझे ऐ आसमाँ! हम अभी से क्या बतायें, क्या हमारे दिल में है?