स्मृतियाँ
उभरती रहीं...
चेहरे अदृश्य
होते रहे...
भीनी कपास से
बुने धागे...
उंगलियों से
फिसलते रहे...
वज़नी तो कुछ भी नहीं था...
फिर भी सब कुछ भारी था...!!
#नीलम#धागा#छोटा_दरवाजा
माँ के सब्र ने संभाला
पिता ने हिम्मत
हारने न दिया...
ज़िंदगी की
गहरी नदी में
तैरना आसान न था...
माँ से मिला
उतरने का हौसला
#पिता ने डूबने न दिया...
#नीलम#छोटा_दरवाज़ा