साहित्य सेवा में सतत रत रहने पर, साहित्य की अथक सेवा के फलस्वरूप, जब किसी संस्था या पत्रिका द्वारा उत्कृष्टता का सम्मान पत्र प्राप्त होता है तो यकीन मानिए सहृदय को अति संतोष की प्राप्ति होती है।
पुनः हिन्दुस्तान समाचार पत्र का बहुत बहुत आभार❤️🙏 #ImranSambhalShahi
ताकत बढ़ाने के लिए हर तरह से खो गए
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई कुछ भी बो गए
दशकों से खुद को पढ़ा लिखा बोलते रहे
जब डिग्रियों की बात आई तो चुप हो गए
इमरान सम्भलशाही
#imransambhalshahi
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न खुलें दरवाज़े तो खिड़कियों से बाहर आओ,
ख़ुद बनाओ रास्ते सीढ़ियों से बाहर आओ,
इक सदी गुजार दी तुमनें जी हुजूरी करते हुए,
मेरे भाई अब तो गुलामी की बेड़ियों से बाहर आओ ।
#पंक्तियां ~ अतुल फर्रुखाबादी @Atulfarukhabadi#शब्दनिधि
#श्रीराम_की_स्तुति🌷❤️🙏
हे जगत के महावीर स्वामी, तू सदा कल्याण कर
चर अचर सकल जगत का, तू महा कल्याण कर
हे दशरथ सुत! तेरे चरण को पखार कर प्रणाम है
तू धरा का तेज़ मानस,कण कण में बसा नाम है
साहस नहीं कैसे लिखूं, मर्याद���त पुरुषोत्तम नाथ पर
बस मिट ही जाऊं भक्ति में तेरे, हस्त धर दो माथ पर
तेरा वर्णन जो लिखा है, चौबीस सहस्र श्लोक में
स्वांतः सुखाय में गढ़ा गया,है आलोकित भू लोक में
है प्रथम दिवस श्री रामनवमी, सनातन की परम्परा में
तन मन से और करम से,हर्षोल्लास मनाते है धरा में
राम समाहित रामायण में, राम की यात्रा हर घर में
चरण कमलवत, भुजाएं बाहु और धनुष है कर में
दास तुलसी गढ़ गए, लोक में श्री रामचरितमानस
तीनो लोक का तू ही भगवन्, चहुं फैल रहा है यश
पुत्र भाई शिष्य पति मित्र बन, हर करम में बेजोड़ हो
छल कपट द्वेष घृणा, ईर्ष्यालु अवगुणों का तोड़ हो
धरा के सकल मानुष,जप राम राम,पाप से विमुक्त हुए
तेरी महिमा के भजन में,हे नाथ!राम माला से युक्त हुए
भारतेंदु गुप्त इकबाल से लेकर चकबस्त तक, हे राम तू
बाल्मीकि तुलसी व सकल कण अज़ान सा, हे राम तू
~इमरान सम्भलशाही
#imransambhalshahi
जब शहर गए थे
आज गांव में क्या लाए है
शहर जवानी में गए थे
गांव बुढ़ापा को लाए हैं
पासबुक में बैलेंस
ज़ीरो है
है ही नहीं
चढ़ेगा कैसे?
हां! इतना जरूर है
शहर की कमाई से
अपनी तमाम नस्लों को
हरे दरख़्त के मानिंद
खड़ा जरूर किए है।
यही पूंजी ही।
इमरान संभलशाही
@ImranSamblShahi
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फूल मिलेंगे ख़ार नहीं
होगा ये हर बार नहीं
उस पर भी चलना सीखो
जो रस्ता हमवार नहीं
सूरत अच्छी है लेकिन
अच्छा है किरदार नहीं
मतलब से मिलने वाले
जो भी हैं पर यार नहीं
ख़ार- काँटे | हमवार- समतल
#पंक्तियां~ राघवेंद्र द्विवेदी @RaghvendraLive#कविताएं
जैसे जीवन में अखबार बेचना
छोटा काम नही होता है,
लेकिन
अख़बार जिंदगी भर बेचना बड़ा पाप होता है
वैसे ही फुटपाथ पर पढ़कर
शिक्षा हासिल करना या
हिंदी इंग्लिश मीडियम के
किसी अच्छे बुरे स्कूल में
शिक्षा लेना भी छोटा काम नही होता है
मगर अपने लक्ष्य को भूलकर
बेपरवाह होकर शिक्षा से दूर रहना
बड़ा पाप होता है
निर्धन को
आगे बढ़ने के लिए और
लक्ष्य हासिल करने का एक मात्र जरिया
शिक्षा ही होता है
धनवान को भी।
अंधी तूफान हो या मुसीबतें
पढ़ो खूब पढ़ो
और आगे बढ़ो।
इमरान संभलशाही
राम युद्ध नहीं अपितु शांति के प्रतीक हैं।
राम प्रीति, सम्मान, शिष्टाचार के प्रतीक हैं।
राम सत्य व वचनबद्धता के प्रतीक हैं।
राम वो हैं जो एक डाकू को वाल्मीकि बना देते हैं।
राम सनातनियों लिए साध्य हैं उन्हें साधन बनाकर गलतियाँ करना पाप है।
आप सभी को रामनवमी की हार्दिक श���भकामनाएं
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रंग से क्या होता है, बनावट तो देखो
हसीन कुदरत की, सजावट तो देखो
रंग नस्ल भेद मिटाकर, रहो खल्क में
और नैन से अपनी भी आहट तो देखो
#पंक्तियां ~इमरान सम्भलशाही @ImranSamblShahi