अब किसी के जाने से फर्क नहीं पड़ता। हमने अपनी शर्तों पर जीना सीख लिया है। दुनिया कुछ भी कहे, अब हमें घंटा फर्क नहीं पड़ता। यही असली सुकून है—खुद से प्यार करना।
झगड़ा खत्म नहीं हुआ था, बस बात करते-करते हम दोनों दूर होते गए। कभी ब्लॉक, कभी अनब्लॉक… और आखिर में रिश्ता ही ब्लॉक हो गया। कुछ रिश्ते टूटते नहीं, बस धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं।