हाथ नहीं है... तो क्या हुआ, हौसले तो हैं
जब इरादे बुलंद हों, तो कोई कमी मंज़िल नहीं रोक सकती।
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के पैरा धावकों दिलीप महादू गावित ने पुरुष टी-47 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक, जबकि मोहम्मद बासिल ने रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। गावित पहले 50 मीटर तक टॉप 4 में भी नही थे, लेकिन अंतिम 50 मीटर में उन्होंने बिजली की गति से जादुई स्प्रिंट मारते हुए ऐसी रफ्तार पकड़ी कि सीधे देश को गोल्ड मैडल जिता दिया।
यह केवल दो पदक नहीं,बल्कि साहस, संघर्ष और आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल है,जो हर भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा कर देती है।
शरीर की सीमाएँ नहीं, हौसलों की उड़ान इतिहास लिखती है।
@DCO_UP@CMOfficeUP@UPGovt@ChiefSecyUP@InfoDeptUP@PibLucknow प्रथम चरण की जनगणना किये हुए आज 1 माह से अधिक हो गया पर हमारे मानदेय का भुगतान अभी तक नही हुआ है।
जबकि जनगणना मानदेय का भुगतान की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है।
Sant kabir nagar
Mehdawal
प्रथम चरण की जनगणना किये हुए आज 1 माह से अधिक हो गया पर हमारे मानदेय का भुगतान अभी तक नही हुआ है।
जबकि जनगणना मानदेय का भुगतान की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है।
@DCO_UP
@dmsantkabirnagar
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भ्रम
एक बार कागज का एक टुकड़ा हवा के वेग से उड़ा और पर्वत के शिखर पर जा पहुँचा। पर्वत ने उसका आत्मीय स्वागत किया और कहा-भाई ! यहाँ कैसे पधारे ? कागज ने कहा -अपने दम पर।
जैसे ही कागज ने अकड़ कर कहा अपने दम पर और तभी हवा का एक दूसरा झोंका आया और कागज को उड़ा ले गया। अगले ही पल वह कागज नाली में गिरकर गल-सड़ गया। जो दशा एक कागज की है वही दशा हमारी है।
पुण्य की अनुकूल वायु का वेग आता है तो हमें शिखर पर पहुँचा देता है और पाप का झोंका आता है तो रसातल पर पहुँचा देता है।
किसका मान ? किसका गुमान ? सन्त कहते हैं कि जीवन की सच्चाई को समझो। संसार के सारे संयोग हमारे अधीन नहीं हैं। कर्म के अधीन हैं और कर्म कब कैसी करवट बदल ले, कोई भरोसा नहीं।
इसलिए कर्मों के अधीन परिस्थितियों का कैसा गुमान ?
बीज की यात्रा वृक्ष तक है,नदी की यात्रा सागर तक है, और मनुष्य की यात्रा परमात्मा तक..
संसार में जो कुछ भी हो रहा है। वह सब ईश्वरीय विधान है, हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं, इसीलिये कभी भी ये भ्रम न पालें कि मै न होता तो क्या होता !!
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारिय गण की प्रदेश समीक्षा बैठक में उनके स्तर पर पेंडिंग चयन वेतनमान की समीक्षा हो जाती है ,लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी स्तर पर जो पेंडिंग चयन वेतनमान की समीक्षा नहीं हो पाती है, कृपया खंड शिक्षा अधिकारी का भी समीक्षा करें ।
ताकि 100% चयन वेतनमान सरकार की मंशा के अनुरूप लगे ।
@basicshiksha_up@DM_Sknagar@CMOfficeUP@thisissanjubjp
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♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️
!! मानव चरित्र !!
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एक बार एक जिज्ञासु व्यक्ति ने एक संत से प्रश्न किया, “महाराज, रंग रूप, बनावट प्रकृति में एक जैसे होते हुए भी कुछ लोग अत्यधिक उन्नति करते हैं। जबकि कुछ लोग पतन के गर्त में डूब जाते हैं।
संत ने उत्तर दिया, “तुम कल सुबह मुझे तालाब के किनारे मिलना। तब मैं तुम्हे इस प्रश्न का उत्तर दूंगा। अगले दिन वह व्यक्ति सुबह तालाब के किनारे पहुंचा। उसने देखा कि संत दोनों हाथ में एक एक कमंडल लिए खड़े हैं।
जब उसने ध्यान से देखा तो पाया कि एक कमंडल तो सही है। लेकिन दूसरे की पेंदी में एक छेद है। उसके सामने ही संत ने दोनों कमंडल तालाब के जल में फेंक दिए। सही वाला कमंडल तो तालाब में तैरता रहा।
लेकिन छेद वाला कमंडल थोड़ी देर तैरा, लेकिन जैसे जैसे उसके छेद से पानी अंदर आता गया। वह डूबने लगा और अंत में पूरी तरह डूब गया।
संत ने जिज्ञासु व्यक्ति से कहा- “जिस प्रकार दोनों कमंडल रंग-रूप और प्रकृति में एक समान थे। किंतु दूसरे कमंडल में एक छेद था। जिसके कारण वह डूब गया। उसी प्रकार मनुष्य का चरित्र ही इस संसार सागर में उसे तैराता है। जिसके चरित्र में छेद (दोष) होता है। वह पतन के गर्त में चला जाता है। लेकिन एक सच्चरित्र व्यक्ति इस संसार में उन्नति करता है। जिज्ञासु को अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया।
शिक्षा:-
जीवन में चरित्र का महत्व सर्वाधिक है। इसलिए हमें चरित्रवान बनना चाहिए..!!
सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।
जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।
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Hey @Instagram@MetaIndia, my account @Neerajjoshi5014 is being targeted by a malicious copyright fraud.
I have all the original raw footage and project files to prove ownership of the flagged content. The automated system is being manipulated for extortion. I request a human representative to look into this case and restore my access.
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*विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने का असरदार फॉर्मूला*
सरकारी विद्यालयों में नामांकन और बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने की जिम्मेदारी अक्सर सिर्फ शिक्षकों पर डाल दी जाती है। लेकिन सच्चाई यह है कि जब तक अभिभावकों की भूमिका तय नहीं होगी, तब तक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव नहीं है।
💡 *_कुछ छोटे लेकिन प्रभावी सुझाव_*
👉 *1. DBT की जगह सामग्री का वितरण स्कूल से हो*
ड्रेस, जूते, बैग, किताबें जैसी जरूरी चीजें सीधे विद्यालय से बच्चों को दी जाएं।
इससे:
✔️ हर बच्चे को समय पर जरूरी सामान मिलेगा
✔️ बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा
✔️ सरकारी स्कूलों पर विश्वास मजबूत होगा
👉 *2. सरकारी योजनाओं को शिक्षा से जोड़ा जाए*
राशन, आवास, छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का लाभ तभी मिले, जब:
✔️ बच्चा विद्यालय में नामांकित हो
✔️ नियमित रूप से स्कूल आ रहा हो
इससे अभिभावक खुद बच्चों की पढ़ाई को गंभीरता से लेंगे और उपस्थिति में स्वतः सुधार होगा।
📢 *अब समय है जिम्मेदारी बांटने का*
शिक्षक, अभिभावक और सरकार—तीनों की साझेदारी से ही शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
सिर्फ शिक्षकों पर दबाव डालने से नहीं, बल्कि अभिभावकों की जवाबदेही तय करने से ही असली बदलाव आएगा
BSA पर आरोप लगा कर सुसाइड कर लिया..!!
देवरिया के BSA और उनके एक ऑफिस स्टॉफ पर गंभीर आरोप लगाते हुए गोरखपुर निवासी कृष्णमोहन सिंह ने आत्महत्या कर ली..
यह आत्महत्या से पहले का वीडियो है जो परिजनों ने दिया है कृष्णमोहन सिंह ने आत्महत्या से पहले सुसाइड नोट भी लिखा
@basicshiksha_up
माननीय मुख्यमंत्री जी ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था जनहित में कराते हुए निर्देश दिया कि कोई फाइल 4 दिन से ज्यादा न रोकी जाए ।
संत कबीर नगर में चयन वेतन मान की फाइलों को 2 माह से अधिक से रोका गया है ।
@AnkurRajBJP313@myogiadityanath@thisissanjubjp
शिक्षक अपना छुट्टी और रविवार छोड़कर प्राथमिकता पर SIR का काम कर रहा है ,माननीय मुख्यमंत्री जी के 3 दिवस के फाइल निपटाने के निर्देशो की अवहेलना कर एक टेबल पर 15 दिन से अधिक चयन वेतन मान की फाइलों को रोका जा रहा है ।
@myogiadityanath@thisissanjubjp@basicshiksha_up
#शिक्षकों और #BLO के ऊपर #SIR का प्रेशर बना हुआ है ।
चुनाव आयोग का कार्य है ,लेकिन किसी के जान से महत्वपूर्ण नहीं है किसी को समस्या किसी स्तर से आ रही है तो अपने साथियों को अवश्य साझा करें ।।
#गोंडा@bstvlive@Aamitabh2@ECISVEEP
शिक्षक को जो कार्य सौंपा जाता है वो समय बद्ध हो कर करता है ,लेकिन शिक्षकों का चयन वेतनमान 4-4 माह से लटका हुआ है ।यह किसी कर्मचारी के मनोबल के लिए अच्छा नहीं है ।
@myogioffice@thisissanjubjp@basicshiksha_up
प्राइवेट स्कूल जिन बच्चों के पास 3.5 वर्ष में पहुंचते हैं परिषदीय स्कूल नियमों के कारण 6 वर्ष पर पहुंचते हैं । प्रवेश का यह युद्ध सुखोई और राफेल के युद्ध जैसा है ।
@CMOfficeUP@basicshiksha_up
RTE एक्ट के तहत परिषदीय विद्यालयों में 6 साल के बच्चों का प्रवेश कक्षा 1 में होता है जबकि प्राइवेट स्कूलों में 3.5 वर्ष तो सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए बच्चे मिलना कठिन हो जाता है ,कृपया सभी स्कूलों के लिए प्रवेश का उम्र एक समान किया जाए l
@CMOfficeUP@basicshiksha_up