रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया हुसैन मुझसे है और मैं ह��सैन से हूं जो हुसैन से मोहब्बत करें अल्लाह उससे मोहब्बत करे हुसैन मेरे नस्लों में से एक है !
(तिर्मिज़ी शरीफ हदीस नम्बर 3775)
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शाहिद आज़मी याद हैं ....
वो वकील जो मुंबई ट्रेन ब्लास्ट 2006 में फंसाए गए 12 निर्दोष आरोपियों का केस लड़ रहा था लेकिन 2010 में शाहिद की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
अपनी वकालत क��� जरिए 7 साल में 17 बेगुनाहों को बचाया। इनमें वह मामले भी थे जिसमें मुसलमानो को गलत तरीके से आतंकवादी मामलों में लिप्त दिखाया गया था।
15 साल की उम्र में शाहिद 1992 में TADA के तहत मामला दर्ज किया गया। 1999 में शाहिद को जेल से रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद मुंबई पहुंचते ही शाहिद ने अपने भाई से दो फॉर्म लाने को कहा - एक LLB के लिए और दूसरा पत्रकारिता के लिए। वे सुबह LLB की कक्षाओं में जाते थे और शाम को पत्रकारित�� की कक्षाओं में।
धीरे-धीरे शाहिद ने कोर्ट में जाकर प्रेक्टिस करना शुरू किया और बहुत जल्द तेज तर्रार वकीलों में उनका शुमार हो गया। कितने ही बेगुनाहों के केस शाहिद ने फ्री में लड़ा।
वह मामले जिसे बड़े से बड़ा वकील भी छूने से डरता था शाहिद उस केस में हाथ डालने में डरते नही थे जिसमें 7/11 मुंबई लोकल ट्रेन विस्फोट, 2006 मालेगांव बम विस्फोट, 2006 औरंगाबाद हथियार बरामदगी मामला और 26/11 मुंबई आतंकवादी हमला मामला शामिल हैं ।
कर्बला से हमें सीख मिलती है कि इंसान को अपने ऊंचे उसूलों और नैतिकता के लिए बड़ी से बड़ी सुख-सुविधा का त्याग करने के लिए तैयार रहना चाहिए !
यज़ीद के पास ताकत और दौलत थी, ल���किन इमाम हुसैन के पास किरदार और पाकीज़गी थी ! जीत आख़िरकार किरदार की हुई !
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नबी ﷺ ने फरमाया:
*❝किसी इंसान के झूठा होने के लिए इतना ही काफी है कि वह हर सुनी-सुनाई बात को (बिना तहकीक़ के) आगे बयान कर दे।* ❞ ...!!!
(सहीह मुस्लिम: 5)
हुज़ूर ﷺ ने फरमाया:-
“बेहतरीन माल यह की आदमी के पास अल्लाह को याद करने वाली ज़ुबान हो, शुक्रगुज़ार दिल हो और इसकी बीवी ऐसी मोमिना औरत हो जो इसके ईमान को पुख़्तातर बनाने में मददगार हो”
(तिर्मिजी 3094)
#HadithOfTheDay
रोबोट से चलने वाला फ़ोन फ़ार्म लगातार शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल और चला सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर नकली “व्यूज़” बनाए जा सकते हैं।
ऐसी लोकप्रियता जो लोगों की वास्तविक पसंद से नहीं, बल्कि प्रचार, हेरफेर, नकली व्यूज़, लाइक्स या मार्केटिंग के ज़रिए बनाई जा रही।
इसलिए अब व्यूज़ को किसी चीज़ की असली लोकप्रियता का भरोसेमंद मापदंड नहीं मान लेना चाहिए।
अब नसल दर नसल सबसे ज़्य��दा "भरोसे" को याद किया जाएगा।
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :-
“अल्लाह त’आला का इरशाद है के मेने अपने अपने नेक बंदो के लिए वह चीज़ तय्यार कर रखी है जिन्हें ना आँखो ने देखा, ना कानों ने सुना और ना किसी इंसान के दिल में इनका ख़्याल गुज़रा है”
(��ुख़ारी 3244)
#HadithOfTheDay
रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
"जुमा का दि�� तुम्हारे बेहतरीन दिनों में से है लिहाज़ा इस दिन मेरे ऊपर कसरत से दुरूद भेजा करो इसलिए कि तुम्हारे दुरूद मुझ पर पेश किए जाते है।
📗(जामे तिरमिज़ी 1531
हुज़ूर ﷺ ने फरमाया:-
इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर रखी गई है,
1) ग्वाही देना के अल्लाह के सिवा कोई माबूद बरहक़ नहीं और मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल है,
2) नमाज़ क़ायम करना
3) ज़कात देना
4) रमजान के रोज़े रखना
5)बैतुल्लाह क��� हज़ करना
(तिर्मिज़ी 2609)
#HadithOfTheDay
हज़रत मुहम्���द बिन अम्र बिन हज़्म (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी करीम सलल्ललाहों अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया जो मोमिन अपने किसी मोमिन भाई की मुसीबत में उसे सब्र और सुकून की तालीम देगा, अल्लाह तआला क़यामत के दिन उसे इज़्ज़त का लिबास पहनाएँगे !
(इब्ने माजह: 1601)
रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
"बेशक जुमा का दिन तमाम दिनों का सरदार और अल्लाह तआला के नज़दीक सबसे ज़्यादा अज़मत वाला दिन है इसका दर्ज़ा अल्लाह तआला के नज़दीक ईद उल फितर और ईद अज़हा से भी ज़्यादा है"....!!!
(इब्ने माजा 884)
नबी ﷺ ने फ़रमाया:-
"जो लोगों का माल लौटाने ���ी नीयत से लेता है, अल्लाह उसकी मदद करता है; और जो हड़पने की नीयत से लेता है, अल्लाह उसे तबाह कर देता है।
Sahih al-Bukhari:2387
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :-
“हसद जायज़ नहीं मगर दो में, एक वह जिसे अल्लाह ने क़ुरान दिया वह इसके साथ रात की घड़ियों में क़ायम करता है और दिन में, दूसरा वह जिसे अल्लाह ने माल दिया और वह दिन और रात की घड़ियों में इस�� ख़र्च करता है”
(सुनन बेहकी 7826)
#HadithOfTheDay
हुज़ूर ﷺ ने फरमाया:-
“अल्लाह ने रहमत के सौ हिस्से बनाए, और अपने पास इन में से निन्नानवे हिस्से रखे सिर्फ़ एक हिस्सा जमीन पर उतारा और इसी की ��जह से तुम देखते हो की मख़लूक़ एक दूसरे से मुहब्बत करती है…”
(बुख़ारी 6000)
#HadithOfTheDay
हुज़ूर ﷺ ने फरमाया :-
“अल्लाह के नज़दीक बेहतरीन साथी वह है जो अपने साथी के लिए बेहतर है और अल्लाह के नज़दीक बेहतरीन पड़ोसी वह है जो अपने पड़ोसी के लिए बेहतर है”...!!!
(मिश्कात 4987)