कौम परस्ती की बाते उस शख्स के मुंह से अच्छी नही लगती जो कयादत पैसा कमाने के लिए संभाले।
कौमी नेता का मतलब होता है नायक या सरदार।
नोटो का लालची इंसान दलाल तो बन सकता है लेकिन कभी नेता यानी कौम का सरदार नहीं बन सकता।
चुनावी वक्त मे सियासी दलाल तो बौहत निकलते है लेकिन सरदार नहीं।
कौम परस्ती की बाते उस शख्स के मुंह से अच्छी नही लगती जो कयादत पैसा कमाने के लिए संभाले।
कौमी नेता का मतलब होता है नायक या सरदार।
नोटो का लालची इंसान दलाल तो बन सकता है लेकिन कभी नेता यानी कौम का सरदार नहीं बन सकता।
चुनावी वक्त मे सियासी दलाल तो बौहत निकलते है लेकिन सरदार नहीं।
जिस कौम का लीडर बुज़दिल होता है वो क़ौम बुज़दिल हो जाती है।
जिस कौम का कोई लीडर नही होता है वो क़ौम कमज़ोर वा ज़ुल्म ओ ज़्यादती का शिकार रहती है।
अगर खुद को मज़बूत वा ज़िल्लत ओ रुसवाई से बचाना चाहते हो तो एक होकर अपना एक लीडर चुनो।
बिना सरपरस्ती के क़ौमे अनाथ हो जाया करती हैं।
@JournoMirror सिर्फ 9 करोड़ ही नहीं बल्कि उन सारे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए और उनको 9 सालों तक जेल में डालना चाहिए जिन्होंने तुम्हें तुम्हारे मुसलमान होने पर जेल के अंदर डाल।
दुनिया से हर जाने वाला चेहरा अपने पीछे एक पैगाम छोड़ कर जाता है कि ये दुनिया फानी है और मौत बरहक़ है।
वो गवाही देता है कि ए लोगो दुनिया कमाने के चक्कर मे अपनी आख़िरत मत गवा बैठना।
अब हम सोचें क्या हम तैयार हैं उस दिन के लिए।
आज मेरी तो कल तेरी बारी है मौत से भला किसकी यारी है।
@ChandanSharmaG कट्टरवादी तेरी भाजपा सरकार से मुराद क्या है क्या भाजपा सरकार मुस्लिम विरोधी सरकार है जो हर बार तू भाजपा सरकार भाजपा सरकार लिख रहा है।
तुझे हर वक्त मुसलमान हिंदू वा देश में सांप्रदायिकता का माहौल पैदा करने वा मुसलमान को टारगेट करने के अलावा कोई दूसरा काम है।
मज़लूम की आवाज़ उठाने के लिए फिलिस्तीन का झंडा 🇵🇸 फहराना देश द्रोह है तो इज़राइल का झंडा फहराना देशभक्ति कैसे।
मसला फिलिस्तीन या इज़राइल का नहीं बल्कि मसला मुसलमान है।
कट्टरवाद हर उस शख्स के साथ खड़ा है जो मुसलमानों का दुश्मन है, उसकी असल देशभक्ति ही मुसलमानों से नफरत करना है।
महोदय भगवती प्रसाद शुक्ला नामी एक शख्स insta id https://t.co/h3fEhtaVj6 पर इस्लाम धर्म के पैगम्बर मोहम्मद साहब पर आपत्तिजनक अलफाजों का इस्तेमाल कर देश का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है, इसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए
@Uppolice@dgpup@myogiadityanath@BBCHindi@Millat_Times
ईद मिलादुन्नबी पर इस कौम ने जितनी जद्दोजहद डीजे की धुन पर नाचने के लिए की है अगर,
इतनी जद्दोजहद मस्जिद के इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने के लिए करती तो आज ये क़ौम इमाम मेहंदी के इंतेज़ार मे नही बैठी होती।
जब क़ौम शरीयत को बोझ और हरामकारी से दिल बहलाने लग जाए तो उसका हलाक होना तय है।
आज 20/8/2025 को उत्तर प्रदेश के बरेली शरीफ में आला हज़रत उर्स के मौके पर इस्लामिया इण्टर कालेज के मैदान में लाखों मुसलमानों की भीड़ में बेखौफ चाय बेचता एक हिन्दू भाई।
मज़े की बात ये है कि एक भी मुस्लिम ने इस के हिन्दू होने की वजह से इस से चाय खरीदने से इन्कार नहीं किया।
लाखों लोगों का दुनिया भर से उर्स ए रज़वी में आने का मतलब सिर्फ उर्स में शिरकत करना नहीं होता है।
बल्कि वो इस बात की गवाही होती है के ये वो दीवाने हैं जो सभी सहाबा का अहतराम करते हैं,
नबी को हाज़िर ओ नाज़िर वा मुख्तारे कुल मानते हैं,
सरकार की मिलाद को बिदत नहीं बताते हैं।