CRPF (CAPF) या सेना की बात भाजपा वालों के मुंह से सुनना ही बेईमानी लगता हैं क्यूंकि इन्होंने जवानों को बस धोखा ही दिया है हमेशा, पुरानी पेंशन माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रत्येक जवान को देने का आदेश दिया लेकिन सरकार नहीं मानी, 100 दिन की छुट्टी आज तक नहीं मिली, काला कानून ( CAPF) तक ले आए माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के विरुद्ध । बस वोट माँगिए शहीदों के नाम पर लेकिन जवानों के सारे अधिकार छीन लीजिए? जवान विरोधी पार्टी है भाजपा 🙏
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#CRPF_Valour_Day: दुनिया हैरान थी कि CRPF की 2nd बटालियन की दो कंपनियों (करीब 150 जवान) ने पाकिस्तान आर्मी की 51 वीं ब्रिगेड के 3500 सैनिकों को खदेड़ दिया।तोप से लैस दुश्मन ने 14 घंटे में 3 बार हमले का प्रयास किया, मगर CRPF ने उन्हें दौड़ा दिया।
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CRPF शौर्य दिवस पर फोर्स के हमारे साहसी और वीर जवानों को हार्दिक बधाई और सादर नमन।
आपका साहस और बलिदान हर दिन हमारे देश की रक्षा करता है। आप सीमाओं पर तैनात रहकर देश को सुरक्षित रखते हैं, आतंकवाद और नक्सलवाद से लोहा लेते हैं, और लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव, चुनावों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाते हैं।
लेकिन सच्ची श्रद्धांजलि केवल शब्दों से नहीं होती। वर्षों के त्याग, तपस्या और सेवा के बावजूद CAPF जवानों को न तो समय पर प्रमोशन मिलता है, न ही अपनी ही फोर्स का नेतृत्व करने का अधिकार - क्योंकि शीर्ष पद फ़ोर्स से बाहर के लोगों के लिए आरक्षित हैं।
CAPF के जवान विशेष प्रशिक्षण, जमीनी अनुभव और गहरी रणनीतिक समझ रखते हैं - इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिये से भी यह जरूरी है कि इन बलों का नेतृत्व उसी सिस्टम से आने वाले लोग करें, जो उनकी चुनौतियों और जरूरतों को सही मायनों में समझते हों।
नेतृत्व के अवसरों से वंचित रखने से लेकर वेतन, कल्याण और सम्मान से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों तक - यह संस्थागत अन्याय उन जवानों के मनोबल को ठेस पहुंचाता है, जो अपना जीवन देश की सुरक्षा में समर्पित कर देते हैं।
यह सिर्फ़ करियर का सवाल नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान का मुद्दा है।
मैं और कांग्रेस पार्टी आपका पूरा आदर और आपसे मोहब्बत करते हैं और ये मानते हैं कि अपने फ़ोर्स में आपकी तरक्की, शीर्ष नेतृत्व और सम्मान आपका हक है - हमारी सरकार आते ही इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा और CAPF जवानों को उनका पूरा अधिकार दिया जाएगा।
देश आप वीरों का ऋणी है - अब समय है कि आपके साथ न्याय हो।
जय हिंद! 🇮🇳
#CAPF Bill को संसद की मंजूरी मिलने के बाद #CRPF_Valour_Day पर डीजी जीपी सिंह, कैडर अफसरों और अधीनस्थ रैंक वालों को भरोसा दिला रहे हैं कि कुछ समय में उनकी पदोन्नति की समस्या हल होगी।MHA में कैडर रिव्यू संस्तुति भेज रहे हैं। दूसरे बलों की तरह CRPF में पदोन्नति मिले, ऐसा प्रयास है।
To all CAPF officers & jawans - we stand with you and against the injustice meted to you by BJP’s Central Govt. IPS officers in your top positions is clear politicisation of CAPF.
संसद में सरकार ने 5 साल का जो आंकड़ा दिया उसके मुताबिक CAPF फोर्सेस में प्रतिवर्ष 150 आत्महत्याएं, 2000 इस्तीफे और 10,000 VRS हो रहे हैं। सरकार को CAPF बिल लाने की बजाय इस पर चिंतन करना चाहिए।
लोकसभा में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान।
CAPF को मजबूत करने के लिए सरकार से मेरी मांग है कि -
◆ CAPF के लिए OGAS और NFFU को लागू किया जाए
◆ CAPF कर्मियों को मिलने वाली छुट्टी बढ़ाई जाए
◆ आर्मी फ्लैग डे फंड की तर्ज पर पैरा-मिलिट्री फ्लैग डे फंड बनाया जाए
◆ हर राज्य में सैनिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर राज्य अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड का गठन हो
◆ CGHS डिस्पेंसरी का विस्तार किया जाए। रोहतक, रेवाड़ी और बहादुरगढ़ में मेरे द्वारा मंजूर कराई गई तीनों CGHS डिस्पेंसरी बनाई जाए
◆ नयी बटालियन बने, फोर्स बढ़ाई जाए। झज्जर में मेरे द्वारा मंजूर कराए गए BSF, CRPF ग्रुप सेंटर का काम पूरा कराया जाए।
जय हिन्द, जय हिन्द की सेना!
आज लोकसभा में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल 'CAPF' (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान।
असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक जी ने नक्सली मुठभेड़ के दौरान IED ब्लास्ट में अपना एक पैर खो दिया - देश की रक्षा में सब कुछ दांव पर लगा दिया।
और इस बलिदान के बदले मिला क्या?
15 साल से अधिक की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद - प्रमोशन नहीं, अपनी ही फोर्स को लीड करने का अधिकार नहीं। क्योंकि सभी शीर्ष पद IPS अफसरों के लिए आरक्षित हैं।
यह सिर्फ एक अफसर की पीड़ा नहीं - यह लाखों CAPF जवानों के साथ हो रहा संस्थागत अन्याय है।
ये जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं, आतंक और नक्सलवाद से लोहा लेते हैं, लोकतंत्र के उत्सव चुनावों को सुरक्षित बनाते हैं। लेकिन जब इनके अधिकार और सम्मान की बात आती है, तो व्यवस्था मुँह फेर लेती है।
खुद CAPF के जवान इस भेदभाव के विरुद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। फिर भी, वर्तमान सरकार इसी अन्याय को कानूनी रूप से स्थायी बनाने पर आमादा है।
यह विधेयक केवल एक करियर रोकने का प्रयास नहीं - यह उन लोगों का मनोबल तोड़ने की कोशिश है जो देश की पहली रक्षा पंक्ति हैं। और जब उनका मनोबल टूटता है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव हिलती है।
हम CAPF के जवानों का सम्मान सिर्फ शब्दों में नहीं, नीतियों में करते हैं। कांग्रेस का साफ वादा है - हमारी सरकार आते ही यह भेदभावपूर्ण कानून समाप्त होगा। क्योंकि जो देश के लिए लड़ता है, उसे नेतृत्व का अधिकार मिलना ही चाहिए।
असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक जी ने देश की रक्षा में नक्सली मुठभेड़ के दौरान IED ब्लास्ट में अपना एक पैर खो दिया
जिसके बावजूद - प्रमोशन नहीं, अपनी फोर्स को लीड नहीं कर सकते. सभी शीर्ष पद IPS अफसरों के लिए आरक्षित हैं
आख़िर मोदी सरकार इस अन्याय को कानून बनाने पर क्यों आमादा है?
यह विधेयक केवल एक करियर रोकने का प्रयास नहीं - यह उन लोगों का मनोबल तोड़ने की कोशिश है जो देश की पहली रक्षा पंक्ति हैं। और जब उनका मनोबल टूटता है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव हिलती है।#CAPFBill
CAPF Bill: संसद में सीएपीएफ बिल पारित, पूर्व कैडर अफसर बोले, हम फिर से सर्वोच्च अदालत में जाएंगे, नए एक्ट को देंगे चुनौती। हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटकर अर्धसैनिक बलों के कैडर अफसरों के हितों पर चोट की है। https://t.co/bPnGUouzSX
#CAPF में 13000 कैडर अफसर और 10 लाख जवान हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने CAPF को #पुरानी_पेंशन देने का फैसला सुनाया।सरकार #OPS देने की बजाए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चली गई। वे सुप्रीम कोर्ट में जीते तो सरकार रिव्यू पिटीशन में जाएगी।वहां जीते तो फिर बिल ले आएंगे।-@MPDharmendraYdv
@VTankha@SudhanshuTrived@RijijuOffice जमीनी हैं ये जी
पर हवाई हैं बाते
आशा का चूरन
खुले आम बांटे
ग़र हक भी जो मांगे
तो कैडर को ही डांटे
जंगल में गुजारी हैं
बस कैडर वालो ने राते
इनका क्या हैं बस बाते ही बाते
Please see the difference in leadership of IPS & a CAPF officer. Despite being hit by a bullet CAPF officer is giving directions and importantly not crying
The recent appointments of IPS officers as DIGs in the CRPF reveal an intriguing pattern. Despite the MHA's claims that these inductions aim to improve coordination with state police forces in critical operational theatres like J&K, LWE-affected areas, and the North East, none of the recently inducted IPS DIGs have been posted in these key zones. Instead, they are predominantly stationed in their respective home states or other non-operational hubs:
1. Shri Annappa E, IPS (2005 Batch, WB cadre), native of Karnataka – Posted in Bangalore (Karnataka)
2. Shri Uday Bhaskar Billa, IPS (2008 Batch, AGMUT cadre), native of Telangana – Posted in Hyderabad (Telangana)
3. Shri S. Arul Kumar, IPS (2008 Batch, Himachal cadre), native of Tamil Nadu – Posted in Chennai (Tamil Nadu)
4. Shri Nimbalkar Vaibhav C., IPS (2009 Batch, AM cadre), native of Maharashtra – Posted in Pune (Maharashtra)
5. Shri Anupam Agrawal, IPS (2008 Batch, Karnataka cadre), native of Rajasthan – Posted in New Delhi
6. Shri Vikas Katharia, IPS (2009 Batch, Nagaland cadre), native of Haryana – Posted in New Delhi
This raises a pressing question: Is the MHA merely presenting a façade to the Hon’ble Supreme Court with its review petition?
#Modi_Paramilitary_Virodhi
#JusticeForCAPF
@HMOIndia@PMOIndia@RahulGandhi@gpsinghips@niravshah112
After repeated grants of justice by the Supreme Court, the government, to please a very limited number of IPS officers in the top brass, is pushing CAPF families onto the streets for their legitimate dues and rights.
@HMOIndia@PMOIndia@RahulGandhi@priyankagandhi
#JusticeForCAPF
#Modi_Paramilitary_Virodhi
https://t.co/arlvZSnEHT