#InfiniteIndia | ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड या MIT से बहुत पहले, प्राचीन भारत दुनिया के सबसे महान शिक्षा केंद्रों का घर था, जिनमें तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, वल्लभी, पुष्पगिरि, शारदा पीठ, काशी और कांचीपुरम जैसे विश्वविद्यालय शामिल थे।
लगभग 2600 वर्ष पहले स्थापित तक्षशिला को विश्व के सबसे प्राचीन विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है। यहाँ आचार्य चाणक्य, चरक, जीवक और पाणिनि जैसे महान विद्वानों ने अध्ययन और अध्यापन किया, जिनका योगदान अर्थशास्त्र, चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, भाषा विज्ञान और संस्कृत में आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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नोएडा में एक नौजवान खुले नाले में डूब कर मर गया, क्या कार्यवाही हुई?
दिल्ली में एक बाइक सवार खुले गड्ढे में गिर गया, रात भर पड़ा रहा फिर मर गया, क्या कार्यवाही हुई?
दिल्ली में एक होटल में आग लगी 22 लोग मारे गए, किसको सजा मिली?
आज लखनऊ में कोचिंग सेंटर में में आग लग गई 15 बच्चे जल कर मर गए, क्या कार्यवाही होगी?
उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि, आम आदमी सिर्फ एक संख्या है।
संख्या के हिसाब से मुआवजा भी घोषित हो जाएगा, फिर सब भूल जाएंगे।
माननीय सांसद महोदया अनुप्रिया पटेल जी ,
आप लगातार तीसरी बार मिर्जापुर से सांसद चुनी गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी तीसरी बार वाराणसी से सांसद चुने गए हैं। ऐसे में मिर्जापुर की जनता का एक सीधा सवाल है।
जब वाराणसी में रिंग रोड, विश्वनाथ कॉरिडोर, रोपवे, क्रूज सेवा , अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम , रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर, स्वर्वेद महामंदिर , चौड़ी सड़कें और 24 घंटे बिजली की व्यवस्था हो सकती है , तो मिर्जापुर में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?
मिर्जापुर में माँ विंध्यवासिनी धाम, लखनिया दरी, विंढम फॉल, टांडा फॉल और चुनार किला जैसे अनेक स्थल हैं, जिन्हें विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाया जा सकता है। इससे रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
लेकिन आज भी जिले में खराब सड़कें, गड्ढे, पेयजल संकट , बिजली की समस्या, बेरोजगारी , कमजोर स्वास्थ्य सुविधाएँ और पर्यटन स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएँ बनी हुई हैं।
जनता का यह भी मानना है कि चुनाव के बाद आप क्षेत्र में कम दिखाई देती हैं और मिर्जापुर की समस्याएँ प्राथमिकता नहीं बन पातीं। लोगों का आरोप है कि जातीय समीकरणों के सहारे चुनाव जीत लिया जाता है, लेकिन विकास के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
मिर्जापुर की जनता केवल वादे नहीं, बल्कि जमीन पर विकास देखना चाहती है। सवाल सिर्फ इतना है कि जो विकास वाराणसी में संभव है, वह मिर्जापुर में क्यों नहीं हो सकता? जनता को भी बेहतर सड़कें , बिजली, पानी , रोजगार और पर्यटन विकास का अधिकार है।
टीटीई साहब जबरदस्त एक लड़की को ट्रेन से उतार रहे हैं, क्योंकि लड़की की टिकट मिस हो गई।
वो भी आधी रात में जब बरसात भी हो रही है।
कोई अनहोनी हो जाएगी तो साहब मुँह सिकोड़ देंगे।
ये वही भारतीय रेलवे है जहां सांसद विधायक की सीट हमेशा रिजर्व रहती है।
Living in 100% Amrit Kaal,
driving 80% ethanol cars,
breathing 60% polluted air,
drinking 40% adulterated milk,
in an education system with 20% credibility,
to get killed with 0% dignity, by USA missiles, by mob lynchings, by a badly made bridge or a pothole, or just a stampede.
उत्तरप्रदेश के GST वाले अधिकारियों को फिर से एक बार चेतवानी दे रहा हूँ,
ये फ़र्ज़ी नोटिसों के बेसिस पे जो बिजनेस करने वालों से उगाही कर रहे हो।
ये सब बंद कर दो!
The real Cockroach Janata Party has been in power since 1947. It is not elected but selected. It's built of steel that survives everything.
https://t.co/9OSuKTGg4p
>इस देश में शिक्षा माफिया हैं,
>इस देश में भू माफिया हैं,
>इस देश में खनन माफिया हैं,
लेकिन कौन है, मीडिया ने हमे कभी बताया ही नहीं,
>शिक्षा माफिया वो हैं, जिनके स्कूलों में लाखों की फीस है, किताबें हजारों में आती हैं, वो सारे स्कूल नेताओं के हैं,
लेकिन दलाल मीडिया ने कभी नहीं बताया।
>भू माफिया सब नेता, मंत्री, विधायक, जिला अध्यक्ष हैं, लेकिन मीडिया ने कभी आवाज नहीं उठाई।
>खनन माफिया नेताओं के चेले चपाटे हैं, लेकिन मीडिया ने कभी सवाल नहीं किया।
>आखिर मीडिया कर क्या रहा, कभी अपने गिरेबान में क्यों नहीं झांक रहा है?
या विलेन सिर्फ यूट्यूब टीचर हैं?
>मीडिया अगर अपना काम सही से करे तो, देश की 50 फीसदी समस्या अपने आप खत्म हो जाएगी।
"लेकिन मीडिया दलाल है"
जब हम हल्की मूँछ और छिछली दाढ़ी लिए तरुणाई की दहलीज़ पर खड़े थे और इश्क़ बाँस की कोंपलों की तरह दिलो-दिमाग़ में अनायास इधर-उधर फूट रहा था, उसी वक़्त रेख़्ता का भी उदय हो रहा था। तब तलक शायरी का मतलब मेरे लिए सिर्फ़ मिर्ज़ा ग़ालिब थे।
पर जब एक शायर को पहली बार पढ़ा, तो मिर्ज़ा कब जीवन से रुख़्सत हो गए, पता ही नहीं चला। बस बशीर ही बशीर रह गए।
बशीर के शेर और ग़ज़लें आम लहज़े में थीं, जिन्हें सुनकर हमारे ज़माने की जावा/पायथन पढ़ने वाली लड़कियों का दिल भी धड़क जाता था। हालाँकि इस क्लब में बाद में वसीम बरेलवी भी शामिल हुए, पर बशीर का असर पहले प्यार जैसा था, इसलिए वे हमेशा करीब ही रहे।
जब बालकनी में सिगरेट पीते हुए उनका शेर “हमको शाम बता देती है, तुम कैसे कपड़े पहने हो” दिमाग़ में घूमता , तो दूर देस में बैठी एक लड़की की तस्वीर भी ज़ेहन में उतर आती थी।
ऐसा लगता जैसे वह भी दूध-सी उजली अपनी स्लीवलेस कुर्ती, जिस पर पर्पल और ग्रीन कलर के रेशमी धागों से छोटे-छोटे फूल बने हैं, पहने बालकनी में खड़ी एक माइल्ड सुलगाए होगी।
आज बशीर साहब को आज उनकी रुख़्सती पर सलाम, दुआएँ और प्रणाम। ईश्वर-अल्लाह आपको अपने करीब रखें। ❤️
ये कैसा कानून का राज है जहां -
1- चोरी लगातार हो रही है
2- मर्डर लगातार हो रहे हैं
3- बलात्कार लगातार हो रहे हैं
5- छेड़खानी लगातार हो रही है
ये कैसा भ्रष्टाचार कम किया आपने, जहां -
1- हर एक सरकारी डिपार्टमेंट पहले से ज्यादा भ्रष्ट हो गया है
2- पुलिस वाले अब ज्यादा घूस ले रहे हैं
3- प्रधान, पार्षद, मंत्री, विधायक, सब अब ज्यादा भ्रष्टाचार कर रहे हैं
ये कैसा बदलाव हुआ है जो पहले से ज्यादा भ्रष्ट, बिकाऊ मीडिया, लुटखोर नेता, हो गए हैं।
अभी तो सब चंगा सी वाला हिसाब चल रहा पर आज से बीस पच्चीस साल बाद ये वाली मोदी सरकार अजूबे के रूप में याद की जायेगी जहां
सड़क मंत्री पेट्रोलियम और इथेनॉल की बात करता है,
पेट्रोलियम मंत्री विदेश सेवा की बातों में ज़्यादा रुचि लेता है।
वित्त मंत्री को प्रधानमंत्री के बताने के बाद पता चलता है कि देश पर कोई वित्तीय संकट है।
जिस मंत्री के सरंक्षण में नीट परीक्षा लीक घोटाले हुए हों, वही फिर से अपनी देख रेख में परीक्षा करवाने का सुपात्र पाया जाता हो।
और उस शिक्षा मंत्री को सीबीएसई की दसवीं बारहवीं की पुनर्परीक्षा में हो रही कमियों का पता ही न हो।
टेक्सटाइल मंत्री को अपने विभाग के काम से ज्यादा औवैसी को हिंदू बनाने में रुचि हो
और देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील के अगले ही दिन प्रधानमंत्री सौ से अधिक गाड़ियों के साथ रोड शो कर रहे हों।
वाकई इतिहास में ये एक यादगार सरकार के तौर पर लिखी जायेगी।
~NEET पेपर लीक - कोई आवाज नहीं
~पेट्रोल डीजल मंहगा - कोई आवाज नहीं
~रुपया की गिरावट - कोई आवाज नहीं
~भयानक मंदी की आहट - कोई आवाज नहीं
~नौकरी पर खतरा - कोई आवाज नहीं
लेकिन "मेलोडी टॉफी" पर सुबह से हंगामा काटे हुए हैं।
पता नहीं क्या मजबूरी है इनकी, जो इनको शर्म भी नहीं आती है?
• कांग्रेस के समय पेट्रोल महंगा हो तो “जनता पर बोझ”।
• बीजेपी के समय पेट्रोल महंगा हो तो “देशहित में योगदान”।
• कांग्रेस के समय डॉलर महंगा हो तो “अर्थव्यवस्था खतरे में”।
• बीजेपी के समय डॉलर महंगा हो तो “ग्लोबल फैक्टर”।
• कांग्रेस के समय बेरोजगारी हो तो “युवा बर्बाद”।
• बीजेपी के समय बेरोजगारी हो तो “स्टार्टअप करो, पकौड़े तलो, स्किल सीखो”।
• कांग्रेस के समय महंगाई हो तो सरकार फेल।
• बीजेपी के समय महंगाई हो तो “दुनिया में देखो क्या हाल है, भारत फिर भी बेहतर है।”
• मतलब तुलना भी सुविधा के हिसाब से, सवाल भी सुविधा के हिसाब से और राष्ट्रवाद भी सुविधा के हिसाब से।
• जब श्रेय लेना हो तो भारत विश्वगुरु है।
जब जवाब देना हो तो भारत पाकिस्तान से बेहतर है।
• यही बीजेपी और मीडिया हाउसों का असली दोगलापन है।