किस पर खुल कर बोलूँ ?
देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री को साँप कहने वालों पर ?
एक वरिष्ठ महिला नेता, एक माँ को विषकन्या कहने वालों पर ?
कभी दोस्त की इनोवा में, दोस्त से पैट्रोल भरवाकर स्वराज बाँचने वालों के महल में जनता के पैसों से टाँगे लखपति पर्दों पर ?
सड़क पर बैठी सोना और स्वाभिमान लाने वाली बेटियों पर कीचड़ उछालते दलों और देश की नपुसंक खामोशी पर ?
मनचाहे पक्षपाती एजेंडें पर चीखने और ख़ामोश हो जाने वाले मीडिया पर ?
जब इस देश को सच सुनने, सच बोलने और उसे सहने की आदत ही नहीं बची तो किस पर, किसके लिए और क्यूँ बोलूँ ? 😢🇮🇳🙏
@JagoJabalpur@SwapnilIAS@JagatAnnu Ek bar hatane ki koshish ki gai thi, Par woha ke neta ke karan action nai ho paya. Yahi hal Panda ki Madiya se Garha Bazar ka hai. Koi action nai le sakta en logo ke upar.