कहाँ है समाजवादी पार्टी का तथाकथित PDA?
आज की इस जघन्य घटना पर इतनी खामोशी क्यों?
क्या ग़लत को ग़लत कहने की हिम्मत भी अब राजनीतिक नफ़ा-नुकसान देखकर आती है?
चुनिंदा अन्याय पर आक्रोश और बाकी पर मौन—जनता यह दोहरा चरित्र देख रही है।
#कांट_हत्याकांड#शाहजहांपुर
एक ट्रेंड चल रहा है— 'Reservation Hatao'
हो सकता है आपके चार दोस्त हों, जिन्हें लगता हो कि आरक्षण की वजह से उनका चयन नहीं हुआ। उनकी पीड़ा भी वास्तविक है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
लेकिन क्या सिर्फ़ उन्हीं चार लोगों की कहानी पूरे भारत की कहानी है?
मैं गाँव से आता हूँ। मैंने अपनी आँखों से ऐसे परिवार देखे हैं जो इंसानी मल साफ़ करते थे। ऐसे बच्चे देखे हैं जिन्हें स्कूल में अलग बैठाया जाता था। जिनके छू लेने पर लोग नहाने चले जाते थे। यह कोई सैकड़ों साल पुरानी कहानी नहीं, आज भी बहुत से गाँव ऐसे हैं जहाँ वो समाज के नल से पानी नहीं पी सकते। आज भी उनकी बारात गाँव के बीच से नहीं निकल सकती।
सोचिए... जिस समाज ने किसी इंसान को जन्म के आधार पर ही सम्मान से वंचित कर दिया हो, उस मानसिक और सामाजिक दूरी का क्या ?
इसका मतलब यह भी नहीं कि आज का आरक्षण सिस्टम बिल्कुल परफेक्ट है।मैं खुद मानता हूँ कि Reforms की ज़रूरत है।?
जैसे General वर्ग में EWS आया।
जैसे OBC में Creamy Layer और Non-Creamy Layer का सिद्धांत आया।
SC/ST आरक्षण में जिन परिवारों की कई पीढ़ियाँ शिक्षा और अवसरों के माध्यम से आगे बढ़ चुकी हैं, उनके बारे में भी नीति-निर्माण के स्तर पर चर्चा हो सकती है।
लेकिन एक बात समझिए।
जब राजनीति आज भी जाति पर होती है...
जब समाज में आज भी जाति पूछी जाती है...
जब सामाजिक भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ...तब केवल यह कहना कि "आरक्षण पूरी तरह खत्म कर दो और सब कुछ सिर्फ़ आर्थिक आधार पर कर दो"
मेरा मानना है कि देश को दो अतियों से बचना होगा।
एक - 'कुछ मत बदलो।'
दूसरी -'सब खत्म कर दो।
'सही रास्ता है- सुधार (Reform), डेटा के आधार पर नीति, और सामाजिक न्याय के साथ समान अवसर।
क्योंकि किसी भी नीति का उद्देश्य समाज को बाँटना नहीं, बल्कि एक दिन ऐसी स्थिति तक पहुँचाना होना चाहिए जहाँ किसी विशेष सहायता की आवश्यकता ही न रह जाए।
सिर्फ़ परीक्षा की कट-ऑफ़ कम या ज़्यादा होना ही Reservation नहीं है।......Cut-off की चर्चा इतनी isliye होती है?
क्योंकिstudent का सीधा सामना उसी से होता है।
उसे दिखता है कि-
General की Cut-off 160 है,
SC की 115 है,
OBC की 130 है।
इसलिए apko लगता है कि यही Reservation है।Reservation केवल परीक्षा में सीट दिलाने की व्यवस्था नहीं है। इसका उद्देश्य वंचित समुदायों की representation (प्रतिनिधित्व) बढ़ाना और अवसरों की असमानता को कम करना है।
इसका दायरा कई क्षेत्रों तक है:
शिक्षा – सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश।
सरकारी नौकरियाँ – भर्ती में आरक्षण।
कुछ परिस्थितियों में पदोन्नति (Promotion) – विशेषकर SC/ST के लिए संवैधानिक प्रावधानों के तहत।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व – लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों में आरक्षित सीटें।
छात्रवृत्तियाँ, हॉस्टल, कोचिंग योजनाएँ, फीस में रियायत जैसी कई सहायक योजनाएँ।
संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत इसे केवल गरीबी उन्मूलन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के साधन के रूप में सक्षम बनाया गया है।
Reservation पर सवाल बिल्कुल उठाए जा सकते हैं।
जैसे:
Creamy Layer का दायरा,
Sub-categorisation,
लाभ का समान वितरण,
समय-समय पर समीक्षा,
Minimum Qualifying marks (-40 marks ❌)
Reforms is required in reservation...लेकिन Reservation की पूरी बहस को केवल Cut-off तक सीमित कर देना, विषय को बहुत छोटा कर देना है।
Reservation सिर्फ कटऑफ नहीं, बल्कि Representation, Education, Employment, Political Participation और Social Justice का पूरा ढांचा है…...
एक ट्रेंड चल रहा है— 'Reservation Hatao'
हो सकता है आपके चार दोस्त हों, जिन्हें लगता हो कि आरक्षण की वजह से उनका चयन नहीं हुआ। उनकी पीड़ा भी वास्तविक है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
लेकिन क्या सिर्फ़ उन्हीं चार लोगों की कहानी पूरे भारत की कहानी है?
मैं गाँव से आता हूँ। मैंने अपनी आँखों से ऐसे परिवार देखे हैं जो इंसानी मल साफ़ करते थे। ऐसे बच्चे देखे हैं जिन्हें स्कूल में अलग बैठाया जाता था। जिनके छू लेने पर लोग नहाने चले जाते थे। यह कोई सैकड़ों साल पुरानी कहानी नहीं, आज भी बहुत से गाँव ऐसे हैं जहाँ वो समाज के नल से पानी नहीं पी सकते। आज भी उनकी बारात गाँव के बीच से नहीं निकल सकती।
सोचिए... जिस समाज ने किसी इंसान को जन्म के आधार पर ही सम्मान से वंचित कर दिया हो, उस मानसिक और सामाजिक दूरी का क्या ?
इसका मतलब यह भी नहीं कि आज का आरक्षण सिस्टम बिल्कुल परफेक्ट है।मैं खुद मानता हूँ कि Reforms की ज़रूरत है।?
जैसे General वर्ग में EWS आया।
जैसे OBC में Creamy Layer और Non-Creamy Layer का सिद्धांत आया।
SC/ST आरक्षण में जिन परिवारों की कई पीढ़ियाँ शिक्षा और अवसरों के माध्यम से आगे बढ़ चुकी हैं, उनके बारे में भी नीति-निर्माण के स्तर पर चर्चा हो सकती है।
लेकिन एक बात समझिए।
जब राजनीति आज भी जाति पर होती है...
जब समाज में आज भी जाति पूछी जाती है...
जब सामाजिक भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ...तब केवल यह कहना कि "आरक्षण पूरी तरह खत्म कर दो और सब कुछ सिर्फ़ आर्थिक आधार पर कर दो"
मेरा मानना है कि देश को दो अतियों से बचना होगा।
एक - 'कुछ मत बदलो।'
दूसरी -'सब खत्म कर दो।
'सही रास्ता है- सुधार (Reform), डेटा के आधार पर नीति, और सामाजिक न्याय के साथ समान अवसर।
क्योंकि किसी भी नीति का उद्देश्य समाज को बाँटना नहीं, बल्कि एक दिन ऐसी स्थिति तक पहुँचाना होना चाहिए जहाँ किसी विशेष सहायता की आवश्यकता ही न रह जाए।
लोकतंत्र की जीत हुई साथियो !
तानाशाहों को झुकना पड़ा !
धमेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दिया !!
Next number ab Ethanol and Butanol walo ka lgne wala h
#DharmendraPradhan#NEETExamProtest
#INDWvsSAW#ICCWomensWorldCup2025#INSvsSA#CWC#CWC25
Congratulations team india and thankyou so much for this ❤️❤️,
Deepti Sharma and captain harmanpreet Kaur 🙏🙏
Thank you so much DEEPTI SHARMA ( Player of the tournament)
, congratulations
Shefali for the POTM