8 साल पहले, SC/ST Act को कमजोर करने के खिलाफ लाखों दलित-आदिवासी युवाओं ने आंदोलन किया, जिसमें कई गिरफ्तार हुए।
संसद ने कानून तो मजबूत किया, लेकिन आज भी निर्दोष युवा मुकदमों का बोझ उठा रहे हैं।
मजबूत SC/ST Act उनका हक है और शांतिपूर्ण आंदोलन उनका अधिकार।
आज प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि संवेदनशील और न्यायपूर्ण दृष्टि से ये सभी मामले वापस लिए जाएं।
Just finished watching season 2 of Squid Game and one thing is clear that season 2 is nowhere near season 1
hope #squidGame3 will bring back all the thriller, mystery and emotions that were there in season 1 #waiting#SquidGame2@NetflixKR
आज का ये जनआंदोलन केन्द्र व राज्य सरकारों के लिये स्पष्ट सन्देश है कि अब बहुजन समाज ‘फूट डालो राज करो’ की साजिश को कामयाब नहीं होने देगा।
एक तरफ SC-ST में क्रीमीलेयर खोजते हो दूसरी तरफ हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में हमारे जजों को गायब कर देते हों, NFS बताकर आरक्षित वर्ग की सीटें खाली छोड़ देते हो, एकल पद बताकर आरक्षण खत्म कर देते हो और अब हमें आपस में लड़ाने की साजिश भी करते हो।
कान खोलकर सुन लो आरक्षण और संविधान विरोधियों धन-धरती और राजपाट में संख्याबल के आधार पर जो हमारा हक बैठता है, अब वो देना ही होगा,
मैंने संसद में ललकारा था आज समाज सड़कों पर ललकार रहा है। बहुत हुआ, अब बहुजनों के अधिकारों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी तरह का हमला हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।
मैं राज्य सरकारों से भी कहना चाहता हूं कि आज बहुजन समाज अपने अधिकारों के लिये मजबूर होकर सड़कों पर आया है, तो राज्य सरकारें भी कानून व्यवस्था मजबूत कर, शांतिपूर्वक आंदोलन में मदद करें, कोई भी सरकार अगर हमारे साथ साजिश करेगी तो उसको भविष्य में अपनी कुर्सी गवानी पड़ेगी मेरे यह शब्द याद रखना।
जय भीम, जय भारत, जय मंडल, जय जोहर, जय संविधान।
#21_अगस्त_भारत_बंद_हैं
मैं वाल्मिकियों, मदीगाओं, मजहबियों, रामगढियाओं, रामदासियाओं, मातंग और सभी से अपील करता हूं कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ठीक से पढ़ें।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति देता है बल्कि अनुसूचित जातियों के आरक्षण में क्रीमी लेयर के प्रावधान की भी अनुमति देता है।
सरल शब्दों में, इसका मतलब है कि एक शिक्षित व्यक्ति के परिवार को, चाहे वह अनुसूचित जाति के अंतर्गत किसी भी जाति का हो, आरक्षण नहीं मिलेगा। चाहे वह व्यक्ति चमार हो या वाल्मिकी, क्रीमी लेयर सभी उप-वर्गीकरण जातियों पर लागू होंगी।
एक दलित जिसने जातिवादी समाज के सभी बाधाओं से जूझते हुए, शिक्षा में कम से कम 15 साल और एक अच्छी नौकरी पाने में कम से कम 2 साल का समय लगाया है, उसके परिवार को आगे आरक्षण नहीं मिलेगा। क्योंकि वह क्रीमी लेयर के प्रावधान के अधीन होंगा। एक बार एक दलित कमाने लगा तो अनुसूचित जाति क्रीमी लेयर के प्रावधान के भीतर उसकी जाति कोई मायने नहीं रखेगी।
अनुसूचित जाति में शामिल हर दलित, चाहे वह किसी भी जाति का हो, जिसके पास नौकरी है, वह क्रीमी लेयर में आएगा और उसका परिवार आरक्षण का लाभ नहीं ले पाएगा।
जो परिवार अभी तक आरक्षण का लाभ नहीं उठा पाया है, वह कम से कम 15 साल शिक्षा में और 2 साल नौकरी पाने में लगाएगा। लेकिन कम से कम 15-17 साल तक आरक्षण की नीति निष्क्रिय रहेंगी, क्योंकि तब तक आरक्षण का लाभ न लेने वाले परिवारों को शिक्षा और नौकरी पाने में 15-17 साल निवेश करना पड़ेगा और नौकरी वाले परिवार आरक्षण का लाभ नहीं ले पाएंगे।
तो 15-20 साल तक आरक्षण का लाभ कौन उठाएगा? आरक्षण का उपयोग ही नहीं होगा। शिक्षा और पब्लिक सेक्टर में अनुसूचित जातियों का रिप्रजेंटेशन बिल्कुल नहीं रहेगा।
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस गवई ने हमें कई मौकों पर हरिजन कहकर संबोधित किया है।
मैं सभी से अपील करता हूं कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पीछे की रणनीति को पढ़ें और समझें, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जातियों के आरक्षण को धीरे-धीरे खत्म करना है।
डियर मी-लॉड-
देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों से लेकर IIT, IIM जैसे सर्वोच्च अकादमिक संस्थानों में आज भी SC, ST, OBC के आधे से ज़्यादा पद ख़ाली हैं। क्रीम कहाँ है? आँकड़े तो बताओ।
डियर मी-लॉड-
बिना जाति जनगणना के कैसे अंतिम व्यक्ति तक अवसर पहुँचा सकेंगे?
#SaveReservations
#IndiaDemandsCasteCensus
• The judgement has been silent on the parameters to measure the backwardness of different castes within the Scheduled Castes;
• EV Chinnaiah holds ground even though the 7-judge bench of the Supreme Court(by 6-1) held that sub-classification of Scheduled Castes is permissible for the simple reason that this judgement is against Article 14, and
• Beneficiaries of reservation are not just SCs, STs and OBCs but those belonging to the General Category as well. If only the SC category (historically disadvantaged) is classified, it violates the principle of equality enshrined and does not do just justice for every citizen under Article 14 of the Constitution.
India’s Debt in 2014: ₹49 Lakh Crore
India’s Debt in 2024: ₹205 Lakh Crore
Under Modi Govt, there has been a massive increase in debt but the Godi propaganda has brainwashed people to think otherwise.