Meet Sejal Pawar :
> Belongs to ST community.
> Scored 406 marks in NEET.
> Took the reservation quota.
> Went into Government medical college
> Started playing with the dicks of dead bodies.
> She even told this proudly to everyone.
This is the reality of reservation. These shameless people don't deserve a medical seat but still they get it because of that stupid system. Blood boils man.
डीके शिवकुमार तो बड़े ही चतुर निकले !!
छत्तीसगढ़ से शुरू हुआ कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने का खेल ?
सूत्रों के हवाले से खबर है कि कांग्रेस खेमे में बड़ी बेचैनी देखी जा रही है । जब से DK के कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने की घोषणा हुई है, तभी से यह सवाल स��के मन में है की आखिर ये खेला हुआ कैसे ?
कहानी शुरू होती है फरवरी 2023 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के रायपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजन से । इसी साल मई में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव थे ।
DK अधिवेशन में शामिल होने रायपुर आए और उन्होंने कथित तौर पर एक फार्म हाउस में बाबा से एक गोपनीय डिनर मीटिंग की और समझा की राहुल गांधी द्वारा उनसे किया गया ��ादा (ढाई साल में मुख्यमंत्री बनाने का ) आख़िर क्यों पूरा नहीं किया गया था ?
बाबा ने क्या क्या प्रयत्न किया था और कहाँ चूक हुई ? DK दूरदर्शी थे ! चुनाव जीतने के पहले ही उन्हें ये साज़िश समझनी थी ?
सूत्रों के मुताबिक़ उन्होंने बघेल जी से भी समझा कि कैसे उन्होंने पासा पलटा ? युद्ध में विरोधी पक्ष, ख़ास तौर पर विजेता पक्ष की रणनीति समझना ही कुशल योद्धा की परिचायक है ।
उन्होंने यह भी समझा था कि राहुल गांधी के वादों को भूपेश बघेल ने कैसे धराशायी किया था. कैसे जो विधायक पहले बाबा के पक्ष में थे, पैसों के दम पर बघेल ने उन्हें तनखैया बनाकर कैसे दिल्ली में परेड करवा दी थी ? और राहुल जी की जबरदस्त हार हुयी थी ?
उस समय चर्चा तो यह भी थी की बघेल ने पार्टी तोड़ने की धमकी भी दी थी ? राहुल गांधी एक दुधारू गाय को नहीं छोड़न��� चाहते थे, तो उस वक़्त उन्होंने अपनी हार में ही जीत मानकर जाने दिया ?
मई में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनी। राहुल गांधी ने वही पैंतरा आजमाया जो छत्तीसगढ़ में किया था पर बुरी तरह फेल हुए थे । डीके को ढाई साल बाद मुख्यमंत्री बनाने का ऑफर दिया गया। डीके को झुकना पड़ा, पर उन्होंने राहुल गांधी की वादाखिलाफी के किस्से सुन रखे थे और इस साजिश को पूरी तरह से समझते थे. उन्होंने जबरदस्त मोलभाव किया ���र राहुल को यह भी बताया की छत्तीसगढ़ में उनके वादों की हवा भूपेश ने निकाल दी थी.
खैर, कर्णाटक में ढाई साल पूरे हुए और डीके ने इस बार बाबा की ईमानदार शैली नहीं बल्कि बघेल की चतुराई से खेल खेला। उन्होंने भी परेड करवा दी? बाकायदा बैग हाथ में लेकर! खबरों की मानें तो बाबा के पास 1000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है ? पर सूत्रों के मुताबिक डीके की संपत्ति बाबा से कहीं ज्यादा है ? यहीं खेला कर गए डीके !
रायपुर से शुरू ये कहानी अब बेंगलुरु में खत्�� हुई है। डीके ने पूरा खेल अच्छे से खेला और राहुल गांधी को झुकने पर मजबूर किया ! बाबा की हार ने डीके को जितवा दिया ? भूपेश की कपटपूर्ण राजनीति ने भी सहायता की. इसे कहते हैं खेला करना। बाबा के प्रति पूर्ण सहानुभूति है ! बघेल के गुर्गों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनने नहीं दिया ?
छत्तीसगढ़ को कांग्रेस पार्टी ने हमेशा प्रयोगशाला बनाया है। तरह तरह के प्रयोग यहां किये गए. पहले एक नकली आदिवासी को मुख्यमंत्री बनाना। फिर चरणदास महंत, ताम्रध्वज साहू और बाबा जैसे कद्दावर नेताओं के सामने बघेल को आगे बढ़ाना। फिर राज्यसभा से सभी बाहरी लोगों को चुनना।
इसी उपेक्षा एवं वादाखिलाफी ने कांग्रेस को कहीं का नहीं छोड़ा है। जाति की राजनीति करने वाले राहुल गाँधी को तो यह जवाब भी देना चाहिए की उनके अभी 4 राज्यों के मुख्यमंत्रियों में कितने OBC / दलित / SC ST / आदिवासी वर्ग से आते हैं ?
@INCChhattisgarh @TS_SinghDeo