सृष्टि के किसी कोने
सचमुच ईश्वर कहीं है
और वह अपने अस्तित्व को लेकर सचेत भी है
तो फिर अब समय आ गया है कि
उसे अनाज बोना चाहिए
काटना चाहिए , रोना चाहिए
'ईश्वर को #किसान की तरह होना चाहिए ।'
- विहाग वैभव
@_YogendraYadav@aviksahaindia@_SwarajIndia@Devinder_Sharma
@dominos_india Found a fly inside my pizza from your Express Garden Market, Indirapuram, Ghaziabad store 🤢
Order No: 58
This is a shocking food safety & hygiene lapse. Attaching proof.
Need immediate action: investigation, strict measures, apology & compensation.
Please respond
Students demand Compensatory Marks for incorrect evaluation, blur & missing answer sheets. Their fate of higher edu hangs in doubt.
Prayers in our petition is doable for the Gov.
Let's Hope for the best!
@nsui@VinodJakharIN@IYC
NewG साहित्य
जब ताक़तवर आदमी ने कहा कि वह ग़रीब माँ का बेटा पैदा हुआ
और यहाँ तक पहुँच गया
तो मुझे याद आई वह मेरी माँ जो अब दुनिया में नहीं है
जिसके योग्य बनने में मेरी पूरी उम्र निकल गई.
~ मंगलेश डबराल
#Maa#NewgSahitya
NewG India | साहित्य
भाषा सिर्फ शब्दों का जाल नहीं,
यह हमारी रगों में बहती मिट्टी की सुगंध है,
हमारे लोक गीतों की तान है,
और आत्मा की वह धड़कन है
जो हमें अपनी जड़ों से बांधती है।
NewG India शुरू कर रहा है एक नई पहल— ‘साहित्य’।
यहां हिंदी की उजली धारा से लेकर
अवधी की मिठास,
ब्रह्मवाणी ब्रज का रस,
खड़ी बोली की सहजता,
और भोजपुरी-हिन्दवी-उर्दू का रंग
हर रोज आपकी आत्मा को छुएगा।
कविता, गद्य, पद्य और छंद—
हर रूप में यह पहल हमारी मिट्टी और
हमारी साझा विरासत को फिर से जीने का निमंत्रण है।
यदि यह प्रयास आपके दिल को छू ले,
तो इसे आगे साझा कीजिए—
क्योंकि भाषा और साहित्य ही हमारी असली पहचान हैं।
और हां, शुरुआत अनादि काल से हम सबके जेहन में मथने वाले एक सवाल से...
#NewGSahitya #NewGIndia
क्रांतिकारी रचनाकार - गोरख पांडे : स्मृति शेष
जन्म - सन् 1945
पुण्यतिथि - 29 जनवरी 1989
भागि,धरम, करम, अवतार सजनी
एही खुन चुसवन के हथियार सजनी ।
आखर परिवार अपना क्रांतिकारी साहित्यकार, भोजपुरी भाषा के सुप्रसिद्ध जनगीतकार गोरख पाण्डेय जी के पुण्यतिथि प बेर बेर नमन क रहल बा , श्रद्धांजलि दे रहल बा ।
गोरख पांडे जी के जन्म , उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला के 'मुड़ेरवा के पांडे' गांव में 1945 में एगो गरीब परिवार में जनम भइल रहे । जनम के कुछ समय बाद माई के निधन हो गइल । बाबुजी दोसर बिआह कइले बाकी सौतेली माई से इनिकर ना बनल । इनिकर पालन पोषण फुआ ( बुआ ) कइली । इ अपना फुआ के माई लेखा मानत रहले । फुआ विधवा रहली । ओहु फुआ प एगो हिन्दी कविता लिखले बाडे गोरख पांडे जी -
' तुम हमारे लिए माँ हो
और माँ से ज्यादा भी हो ।'
कम उमिर में बिआह भइला के बादो गोरख पांडे जी आपन आगे के पढाई आ घुमाई जारी रखनी आ शुरुवाती शिक्षा के बाद बनारस चल गइनी । बनारस में सम्पुर्णानंद संस्कृत महाविद्यालय से साहित्यचार्य के उपाधि पवनी । बनारस में आवते सामाजिक सक्रियता भी बढ गइल आ बाद में इहां के सम्पुर्णानंद से ही छात्र अध्यक्ष बननी । बाद में काशी हिंदू विश्वविद्यालय से 1971 के आसपास दर्शनशात्र से एम ए कइनी । बाद में डाक्टरेट ( शोध काम ) खातिर जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय ( जेएनयु ) में दाखिला लेहनी । एजुगा इहां के 'ज्यां पाल सात्र के अस्तित्ववाद में अलगाव के तत्व ' विषय प आपन शोध के काम कइनी । शोध के दौरान ही 29 जनवरी 1989 के गोरख पांडे जी के मात्र 44 साल के उमिर में निधन हो गइल ।
सबसे पहिले गोरख पांडे के भोजपुरी काव्य संग्रह ' भोजपुरी के नौ गीत ' 1978 में आइल । फेरु 1983 में ' जागते रहो सोने वालो ' प्रकाशित भइल । गोरख पांडे जी के मृत्यु के बाद इहां के लिखल चार गो किताब प्रकाशित भइली स जवना में 1989 में गद्य - पद्य संकलन ' स्वर्ग से विदाई ' , 1990 में ' लोहा गरम हो गया है ' आ शोध पुस्तक ' धर्म की मार्क्सवादी धारणा' 2003 में आ फेरु 2005 में ' समय का पहिया ' प्रकाशित भइल ।
गोरख पांडे जी के लिखल कुछ भोजपुरी गीत -
1-नेह की पाती -
तू हव स्रम के सुरुजुवा , हम किरिनिया तोहार
तोहरा से भगली बन्हनवा के रतिया,
हमरा से हरियर भइली धरतिया
तू हव जग के परनवा हो , हम संसरिया तोहार
तोहरा से डगरेला जिनगी के पहिया
हमरा से बन बन उपजेले रहिया
रचना के हव तू बसूलवा हो , हम रुखनिया तोहार
हमरा के छोडि के ना जइह बिदेसवा
जइह त भुलिह न भेजल सनेसवा
तू हव नेहिया के पतिया हो , हम अछरिया तोहार
तोहरे हंथौडवा से कांपे पुंजीखोरवा
हमरे हंसुअवा से हिली भुँईचोरवा
तू हव जुझे के पूकारवा हो , हम तुरहिया तोहार
चाहे जहाँ रहिह जो न माथवा झुकइब
हमरा के हरदम संगे संगे पइब
तू हव मुकुति के धारवा , हो हम लहरिया तोहार ।
2-जागरण
बीतऽता अन्हरिया के जमनवा हो संघतिया
सबके जगा दs
गंउवा जगा द आ सहरवा जगा दs
छतिया में भरल अंगरवा जगा दs
जइसे जरे पाप के खनवा हो संघतिया
सबके जगा दs
तनवा जगा द आपन मनवा जगा दs
अपने जंगरवा के धनवा जगा दs
ठग देखि माँगे जगरनवा हो संघतिया
सबके जगा दs
नेहिया के बन्हल परनवा जगा दs
अँसुआ में डूबल सपनवा जगा दs
मुकुती के मिल बा बयनवा हो संघतिया
सबके जगा दs
हथवा जगा द हथियरवा जगा दs
करम जगा द आ बिचरवा जगा दs
रोसनी से रचऽ नया जहनवा हो संघतिया
सबके जगा दs
बीतऽता अन्हरिया के जमनवा हो संघतिया
सबके जगा दs
3- बारहमासा
मेघ ओनवे असाढ कजरार सजना
हर-बैल ले के चलल जवार सजना
धान रोपे गइली धनिया तोहार सजना
लेकिन घर में अकाल के पसार सजना
सावन खेत-खेत कजरी-मल्हार सजना
हम एक जुनि कइलीं अहार सजना
भादो मास में उपास के अधार सजना
रोवे मड़ई गरीबी के निहार सजना
नियराइल गंवे गंवे जब कुआर सजना
फसल काटे गइनी दुखवा बिसार सजना
अपने घरे आइल बोझा दुइ चार सजना
चढल कातिक जोते बोवै के सुतार सजना
मास अगहन आसा पर तुसार सजना
तन लुगरी भइल तार-तार सजना
पूस-माघ में उपास के अधार सजना
चुभे हाड निरमोहिया बयार सजना
फागुन-चइत काटे दांवे के लहार सजना
पेट कटलो प करजा सवार सजना
धरती तबे बइसाख के मझार सजना
एक ठो रोटी दिन-दिन भर कुदार सजना
रंग देहि के भइल जरि छार सजना
फिर से जेठ में उपासे के अधार सजना
अस जिनगी जिअल धिरकार सजना ।
4-जमीन
केकरे नांवे जमीन पटवारी
केकरे नांवे जमीन ?
कागज कइसन कलमिया कइसन
कइसन घोडा लगमिया कइसन
कोरट कचहरी मे केकर सवारी
कइसन नियाव के जीन ?
केकर करनी आ केकर भरनी
केकर नाव केकर बैतरनी
केकरे जांगरि से माटी फुलाईलि
के खाये चाउर महीन ?
जाडा , गरमी , बरखा ना जनली
गोँहू ओसवली त भूसा बनली
कांहे बरध सब खेतवा चरले
हम भइली कउडी के तीन ?
नालिश कइली दरोगा आइल
बाबू के बंगला मुरगा कटाइल
मडई फुंकि तमाशा देखले
चमकवले संगीन ।
जेकरे धुरिया मे जिनगी सिराइल
ओकर नउँवा कंहवा बिलाइल
जे दहरती से दुरे रहेला
कइसे करेला अधीन !
खून पसीना नगरिया लूटल
लखि-लखि धीरज के बन्हवा टूटल
अब हम किसान-मजूरा मिलि के
हक लेइब चोरन से छीन ।
5-नेहिया
कइसे चलेलेँ सुरुज चनरमा ....
कइसे चलेलेँ सुरुज चनरमा
धरतिया हे पिया केकर बनावल ?
सुरुज चनरमा चले अपनी गतिया
धरतिया हे धनि गति के बनावल
माटी मे बोके आपन परानवाँ
फसलिया हे पिया केकर उगावल ?
माटी मे बोके आपन परानवाँ
फसलिया हे धनि हमरे उगावल ।
रचना के हथवा बिचरवा के रंगवा
सुरतिया हे पिया केकर जगावल ?
रचना के हथवा बिचरवा के रंगवा
सुरतिया हे धनि हमरे जगावल ।
मनवा के बगिया अजदिया के फुलवा
इ नेहिया हे पिया केकर लगावल
मनवा के बगिया अजदिया के फुलवा
इ नेहिया हे धनि तोहरे लगावल ।
6-समाजवाद
समाजवाद बबुआ, धीरे-धीरे आई
समाजवाद उनके धीरे-धीरे आई
हाथी से आई, घोड़ा से आई
अँगरेजी बाजा बजाई, समाजवाद...
नोटवा से आई, बोटवा से आई
बिड़ला के घर में समाई, समाजवाद...
गाँधी से आई, आँधी से आई
टुटही मड़इयो उड़ाई, समाजवाद...
काँगरेस से आई, जनता से आई
झंडा से बदली हो आई, समाजवाद...
डालर से आई, रूबल से आई
देसवा के बान्हे धराई, समाजवाद...
वादा से आई, लबादा से आई
जनता के कुरसी बनाई, समाजवाद...
लाठी से आई, गोली से आई
लेकिन अंहिसा कहाई, समाजवाद...
महंगी ले आई, ग़रीबी ले आई
केतनो मजूरा कमाई, समाजवाद...
छोटका का छोटहन, बड़का का बड़हन
बखरा बराबर लगाई, समाजवाद...
परसों ले आई, बरसों ले आई
हरदम अकासे तकाई, समाजवाद...
धीरे-धीरे आई, चुपे-चुपे आई
अँखियन पर परदा लगाई
समाजवाद बबुआ, धीरे-धीरे आई
समाजवाद उनके धीरे-धीरे आई
7-सपना
सूतल रहलीं सपन एक देखलीं
सपन मनभावन हो सखिया,
फूटलि किरनिया पुरुब असमनवा
उजर घर आँगन हो सखिया,
अँखिया के नीरवा भइल खेत सोनवा
त खेत भइलें आपन हो सखिया,
गोसयाँ के लठिया मुरइआ अस तूरलीं
भगवलीं महाजन हो सखिया,
केहू नाहीं ऊँचा नीच केहू के न भय
नाहीं केहू बा भयावन हो सखिय,
मेहनति माटी चारों ओर चमकवली
ढहल इनरासन हो सखिया,
बैरी पैसवा के रजवा मेटवलीं
मिलल मोर साजन हो सखिया ।
8 - गुहार
सुरु बा किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया।
कब तक सुतब, मूंदि के नयनवा
कब तक ढोवब सुख के सपनवा
फूटलि ललकि किरनिया, चल तूहूं लड़े बदे भइया
सुरु बा किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया ।
तोहरे पसीनवा से अन धन सोनवा
तोहरा के चूसि-चूसि बढ़े उनके तोनवा
तोह के बा मुट्ठी भर मकइया, चल तूहूं लड़े बदे भइया
सुरु बा किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया ।
तोहरे लरिकवन से फउजि बनावे
उनके बनूकि देके तोरे पर चलावें
जेल के बतावे कचहरिया, चल तूहूं लड़े बदे भइया
सुरु बा किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया।
तोहरी अंगुरिया पर दुनिया टिकलि बा
बखरा में तोहरे नरके परल बा
उठ, भहरावे के ई दुनिया, चल तूहूं लड़े बदे भइया
सुरु बा किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया।
जनमलि तोहरे खून से फउजिया
खेत करखनवा के ललकी फउजिया
तोहके बोलावे दिन रतिया, चल तूहूं लड़े बदे भइया
सुरु या किसान के लड़इया, चल तूहूं लड़े बदे भइया।
आखर परिवार अपना एह महान रचनाकार साहित्यकार के बेर बेर नमन क रहल बा श्रधांजलि दे रहल बा ।
@erbmjha@_YogendraYadav Fake news alert!
Taking @_YogendraYadav’s views out of context? Wow, propaganda at its finest!
He explained why democracy is essential—accountability, catching bad decisions early, and boosting self-worth.
Watch the full video and feel some shame: https://t.co/4qRbhVMjU4
@ankursingh@_YogendraYadav Fake news alert!
Misrepresenting @_YogendraYadav views? Classic propaganda!🙃
He highlighted why democracy is essential despite its flaws: accountability, detecting bad decisions, and enhancing self-worth.
Stop spreading fake news. Watch the full video: https://t.co/4qRbhVMjU4
“गोरखपंथी”
1921 की जनगणना में
▪️6,29,978 हिंदू योगी
▪️31,158 मुस्लिम जोगी
▪️1,41,132 हिंदू फकीर गोरखपंथ से जुड़े थे।
गुरु गोरखनाथ ने हिंदू-मुस्लिम अनुयायियों को गोरखपंथ में शामिल किया था।
जानें असली गोरखपंथी कौन है?
@MrinalPande1
Read: https://t.co/RZy27PXkZK
पग पग लिए जाऊँ तोहरी बलैया!✨
शारदा सिन्हा की आवाज़ की मिठास पूरब की हवा में घुली है। ‘बिटिया’ की ममता, ‘फगुआ’ की थाप, ‘छठ’ के गीत—सब उनकी धुन पर थिरकते हैं। वो खामोश हैं, पर हर लहर, हर पगडंडी पर उनकी धुन हमेशा चलेगी।
अलविदा शारदा जी 🙏
जिस आवाज़ से छठ की शुरूआत हुआ करती थी, वही आवाज़ छठ के शुरू होते ही ख़ामोश हो गई। शारदा सिन्हा जी अब हमारे बीच नहीं हैं। शारदा सिन्हा ने अपनी गायकी से ऐसी सामूहिकता का सृजन किया जिसे पहचानने के लिए ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना नहीं पड़ता है बल्कि चुपचाप अपने भीतर महसूस करना होता है। उनके गीत छठ का हिस्सा हैं। कहते हैं छठ में कुछ भी बाहरी परिवर्तन नहीं हुआ, जो पुराना है वही चला आ रहा है सिवाय शारदा सिन्हा के छठ गीतों के। क्या कोई छठ को शारदा सिन्ही की आवाज़ से अलग कर सकता है? इन्हीं दिनों लाउड स्पीकर बजने लगते हैं। खेत खलिहानों और नदी किनारे बने घाटों से आ रही उनकी आवाज़ गांव-घर बुलाने लग जाती है।शारदा सिन्हा की आवाज़ बिहार जैसे ग़रीब राज्य की सबसे बड़ी समृद्धी थी। आज बिहार थोड़ा ग़रीब हो गया। हम आपको अपनी यादों में रखेंगे। जब रोएँगे अपनों की याद में, आपको भी याद करेंगे। अलविदा शारदा जी।
शक्ति अभियान की नेशनल एग्जीक्यूटिव में कम्युनिकेशन टीम की 100 दिनों की प्रगति
सिमरा(@SimraAnsari_) इल्मा (@firoz_ilma), सदफ (@SadafKh93859836) और आशुतोष मिश्रा (कम्युनिकेशन इंचार्ज) @mishutosh ने पिछले 100 दिनों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला:
🔹 इंदिरा फेलोशिप ने सोशल मीडिया के माध्यम से 2.3 मिलियन लोगों तक पहुंच बनाई।
🔹 वर्धा में नेशनल कम्युनिकेशन बूट कैंप सफलतापूर्वक आयोजित।
🔹 ‘Her India’ पहल की शुरुआत, महिला कंटेंट क्रिएटर्स को सशक्त बनाने के लिए।
🔹 शक्ति क्लब के लिए ट्विटर और इंस्टाग्राम पेज लॉन्च।
🔹 नई वेबसाइट का उद्घाटन और साप्ताहिक ‘शक्ति संवाद’ की डिजिटल शुरुआत।
यह टीम के संकल्प और प्रयास का प्रतीक है!
#ShaktiAbhiyan #IndiraFellowship #WomenInLeadership #DigitalEmpowerment
गांधी को मारने वाले गोडसे की चाहे जितनी मूर्तियां बना लें, वे गोडसे में प्राण नहीं फूंक सकते. जबकि गांधी को वे जितनी गोलियां मारें, गांधी जैसे अब भी हिलते-डुलते, सांस लेते हैं, उनकी खट-खट करती खड़ाऊं रास्ता बताती है।
आज इस भरोसे का भी दिन है । #GandhiJayanthi
किशन पटनायक की 20वीं पुण्यतिथि पर हम एक क्रांतिकारी विचारक को याद कर रहे हैं जिन्होंने पूरी ज़िंदगी समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के लिए संघर्ष में बिताई।
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