पूरा वीडियो देखिए।
घमंड देखिये।
यहाँ प्रदीप भंडारी मनीष कश्यप से कह रहा है कि बीच में मत बोलो।
क्या तुम एथेनॉल के एक्सपर्ट हो?
और खुद एथेनॉल के बारे ऐसे बोल रहा जैसे ये इथेनॉल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल हो।
एक भी बात लॉजिकल नहीं कर पा रहा सिवा हवा हवाई के।
इसे रगड़ना कहते हैं?
#FabaKiBaat:
असंतोष ही सबसे बड़ा दुःख है।
सुख का संबंध इस बात से नहीं कि आपने कितना पा लिया, बल्कि इस बात से है कि और पाने की बेचैनी कितनी कम हुई।
सोने के महल में भी व्यक्ति दुःखी रह सकता है, यदि उसकी इच्छाएँ अनंत हों।
झोपड़ी में भी कोई परम सुखी हो सकता है, यदि उसके भीतर संतोष हो।
धन सुविधाएँ खरीद सकता है, सुख नहीं।
सुख बाहर नहीं, भीतर जन्म लेता है, धैर्य, संतोष और कृतज्ञता से।
The movie Satluj is a textbook example of manufactured history. It claims to show the truth, but it purposely hides the real facts
The film completely ignores the bombings, bus massacres, and brutal violence caused by Khalistani terrorists against thousands of innocent people. By erasing the real killers from the story, it is not history but propaganda.
Showing only one side of the story is dishonest. Weaponizing a one-sided narrative while completely silencing the actual victims of terrorism is a dangerous game. You cannot just blame the police and give a free pass to the armed terrorists who actually started the bloodshed in Punjab.
Caring about only side of the story makes it a lie. True justice means remembering every innocent life lost, not just the ones that fit a political agenda.
It is time to stop falling for half-truths meant to brainwash the next generation.
Will fraud Diljit ever make a film on this massacre of Hindus too? This was an even more despicable massacre of Hindus than Pahalgam. Even Pakistani Muslims have never carried out such a vile terrorist attack in North India. It was the Sikh terrorist who did it to the Hindus, and that too in the name of religion.
Will someone ever dare make a fact-based movie on what terrorists did to Sri Harmandir Sahib, to thousands of innocents, to girls/ladies before during and after 1984? Save this post if that ever happens, scores of people including the Committee will line up to ban the movie throwing freedom of expression argument out of the window calling it biased and misrepresentation of facts.
JaiHind🇮🇳
फाबा की बात: #FabaKiBaat :
हम भाजपा के आलोचक हैं, विरोधी नहीं।
कुछ लोगों को लगता है कि भाजपा से एक सवाल पूछ दिया तो हम विरोधी हो गए। ऐसा नहीं है।
हम 10 मुद्दों पर भाजपा की खुलकर आलोचना करते हैं, क्योंकि अंधभक्ति हमारी प्रवृत्ति नहीं है। लेकिन 100 मुद्दों पर पूरी मजबूती से भाजपा के साथ खड़े रहते हैं, क्योंकि देशहित हमारे लिए दलगत राजनीति से बड़ा है।
सरकार की गलतियों पर चुप रहना समर्थन नहीं, बल्कि उसे कमजोर करना है। सही समय पर की गई आलोचना ही किसी सरकार को सही दिशा में बनाए रखती है।
हम भाजपा में किसी पद, एजेंडे या किसी नेता के व्यक्तिगत प्रभाव के कारण नहीं हैं। न हम जाति की राजनीति करते हैं, न क्षेत्र की राजनीति। हम भाजपा के साथ इसलिए हैं क्योंकि वह 'राष्ट्र प्रथम' की बात करती है और अधिकांश मामलों में उस पर चलती हुई भी दिखाई देती है।
इसके विपरीत, देश ने कई ऐसे राजनीतिक दल भी देखे हैं जिन्होंने एक विशेष वोट बैंक को खुश करने के लिए राष्ट्रीय हितों तक से समझौता किया। हमारी राजनीति का आधार वोट बैंक नहीं, राष्ट्रहित है।
और एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि जब तक भाजपा की दिशा और निर्णयों पर प्रधानमंत्री @narendramodi का प्रभाव बना रहेगा, तब तक हमारा समर्थन पूरी दृढ़ता के साथ उनके साथ रहेगा। जहाँ सुधार की आवश्यकता होगी, वहाँ हम सबसे पहले आवाज़ उठाएँगे और जहाँ सही काम होगा, वहाँ सबसे आगे खड़े होकर समर्थन भी करेंगे।
हमारी निष्ठा किसी व्यक्ति, जाति, क्षेत्र या दल से पहले भारत के प्रति है। राष्ट्र पहले, राजनीति बाद में।
मैने मान लिया कि नितिन गडकरी के बेटों के इथेनॉल बनाने वाली कंपनीज में कोई शेयर नहीं हैं।
ये भी मान लिया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग देश हित में है।
पर मेरी एक छोटी सी क्यूरी है।।
बाकी पत्रकारिता की तरह एक बिजनेस या फाइनेंस पत्रकारिता भी होती है।।
उसके किसी भी पत्रकार ने अभी तक शोध करके बताया क्या कि भारत की सबसे बड़ी इथेनॉल निर्माता कम्पनी कौन कौन सी हैं?
उनके मालिक कौन कौन हैं?
फैक्ट्रियां कहां लगी हैं?
सरकार कितनी सब्सिडी देती?
कितना इनकम टैक्स देते?
पिछले दस वर्षों में ग्रोथ कितने परसेंट रही?
ऐसी काम की कोई चीज तो मैंने हाल फिलहाल पढ़ी नहीं!
जनता से पैसे लेकर खुलासा करने का ढोंग करने वाले विजय पटेल और ज़ुबैर ही ये काम कर दें।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है E20 ब्लेंडिंग परीक्षण/ प्रयोग के दौर में है अभी। मतलब प्रयोग है और सौ प्रतिशत गाड़ियों पर हैं। किस तरह की जोकरई चल रही है भाई ये। आप प्रयोग के दौर में हो और आपने शुद्ध पेट्रोल की बिक्री ही बंद कर दी है। पूरे देश के ही ऊपर प्रयोग कर रहे हो आप?
Dr Muzaffar Ahmad. Paediatrician. Popular among parents, kind to children. Yesterday, NIA chargesheeted him as one of the prime architects of the Red Fort terror attack that killed 11. He was secretly manufacturing, testing and safekeeping TATP-based IEDs.
You can't do anything.
क्रिकेट में किसी भी टीम का dominance किसी rider के साथ नहीं आता। तो पिछले तीन चार वर्षों से ये जो भारतीय टीम के dominance की बात होती रही है, वो खोखली लगती है। और ऐसा नहीं कि ये आयरलैंड से हारने के कारण है, ये पहले से ही खोखली लगती है।
Dominance को हम लोगों ने ICC के टूर्नामेंट जीतने से जोड़ दिया है, पर हमें यह देखने की जरूरत है कि क्लाइव लायड, एलन बॉर्डर, स्टीव वॉ, रिकी पोंटिंग, हैंसी क्रोनिए वगैरह की टीमों का dominance क्या केवल ICC टूर्नामेंट जीतने के कारण था?