মাত্র বিশ সেকেন্ডেই ইরানি শিশুটি কালাশনিকভ খুলে আবার জোড়া লাগিয়ে সবাইকে তাক লাগিয়ে দিয়েছে!
ইরানে এখন সম্ভাব্য হামলা প্রতিরোধে ঘরে ঘরে সাধারণ মানুষেরা স্বেচ্ছায় প্রশিক���ষণ নিচ্ছেন ও নিজেদের নাম রিজার্ভ ফোর্সে লিপিবদ্ধ করছে।
ইরান তৈরি করে যোদ্ধা আর আমাদের দেশে তৈরি হয়
-বাংলাদেশের দেয়ালে ঠাকুরের ছবি কেন থাকবে?
-বাংলাদেশের জন্য তাঁর অবদান কী?
-আর তাঁর ছবিতে চ��ন-কালি দিলে গ্রেপ্তার হতে হয় কেন? এই দ্বিমুখী নীতি মানুষ প্রশ্ন করবেই।
মুসলিমবিদ্বেষী রাজনীতির বিরুদ্ধে মুসলমানদের জেগে ওঠা অনিবার্য। #মুসলিম_জাগরণ #রাজনীতি #ঠাকুর_বিতর্ক #ঢাবি
শুধু মোশতাক নয়, কুমিল্লার মাটিতে জন্ম নেওয়া প্রতিটি কু'লা'ঙ্গার রাজাকার এবং দেশদ্রোহীর বাড়িকে আগামীতে পাবলিক টয়লেট বানানো হবে। বাংলার আকাশে আর কোনো মীরজাফরের ঠাঁই হবে না!
⚫️ Yol kenarında dorsesinin lastiği patlayan tır şoförünün çağırdığı lastik tamircisi, kısa sürede lastiği değiştirerek tırın yeniden yola çıkmasını sağladı;
Pleural Effusion क्या है और फेफड़ों से पानी कैसे निकाला जाता है?
डॉ. अभिषेक शुक्ला, वरिष्ठ जेरियाट��रिशियन (वृद्धावस्था रोग विशेषज्ञ), समझाते हैं कि प्लूरल इफ्यूजन (Pleural Effusion) क्या है और फेफड़ों के आसपास जमा पानी को कैसे निकाला जाता है।
प्लूरल इफ्यूजन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें फेफड़ों के चारों ओर मौजूद प्लूरल स्पेस (Pleural Space) में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। सामान्यतः सांस लेते समय फेफड़े आसानी से फैलते और सिकुड़ते हैं। लेकिन जब फेफड़ों के आसपास अधिक मात्रा में तरल जमा हो जाता है, तो वह फेफड़ों पर दबाव डाल सकता है, जिससे मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
इस मामले में मरीज को कई महीनों से सांस फूलने की समस्या थी। डॉक्टर न��� मरीज में कमजोरी, वजन कम होना, खांसी, बलगम आना और बलगम में खून आने जैसे लक्षणों के बारे में जानकारी ली। इस बीमारी के मूल कारण का पता लगाना बहुत जरूरी है, क्योंकि प्लूरल इफ्यूजन टीबी, निमोनिया, हृदय की विफलता, कैंसर या अन्य बीमारियों के कारण हो सकता है।
इस स्थिति की जांच और उपचार के लिए डॉक्टर थोरासेंटेसिस (Thoracentesis) नामक प्रक्रिया कर सकते हैं, जिसे प्लूरल फ्लूड एस्पिरेशन भी कहते हैं। इस प्रक्रिया में छाती पर सुई डालने के लिए सुरक्षित स्थान की पहचान की जाती है, त्वचा को एंटीसेप्टिक से साफ किया जाता है और उचित स्टेराइल उपकरणों की सहायता से फेफड़ों के आसपास जमा तरल निकाला जाता है। निकाले गए तरल का नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है, ताकि बीमारी के कारण का पता लगाया जा सके।
तरल निकालने से फेफड़ों पर दबाव कम हो सकता है और मरीज को सांस लेने में राहत मिल सकती है। हालांकि, मरीज की स्थिति के अनुसार तरल निकालने की मात्रा और गति का सावधानीपूर्वक निर्धारण करना आवश्यक है। अधिक मात्रा में तरल निकालते समय मरीज की लगातार निगरानी जरूरी होती है, क्योंकि इस प्रक्रिया में कुछ जटिलताएं हो सकती हैं।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेडिकल टीम मरीज की सांस लेने क�� स्थिति और समग्र स्वास्थ्य का दोबारा आ��लन करती है। आवश्यकता के अनुसार अल्ट्रासाउंड या छाती का एक्स-रे करके बचे हुए तरल, फेफड़ों के फैलाव और संभावित जटिलताओं की जांच की जा सकती है।
महत्वपूर्ण संदेश: लंबे समय तक सांस फूलने की समस्या को कभी भी नजरअंदाज न करें। समय पर बीमारी की पहचान और उचित उपचार से मरीज के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है। फेफड़ों के आसपास जमा तरल निकालने की प्रक्रिया हमेशा प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा उचित चिकित्सा व्यवस्था में ही की जानी चाहिए।
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স্বৈরাচারের তল্পিবাহক ব্যারিস্টার সুমন আর গোলাম দস্তগীর গাজীর নির্বাচনী ক্যাম্পেইন প্রচারক বিশিষ্ট কনটেন্ট ক্রিয়েটরের সাথে পরিচিত হোন।
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