बूढ़ानाथ मंदिर, भागलपुर के उत्तरवाहिनी गंगा तट पर स्थित अछि। ई प्राचीन शिव मंदिर के स्थापना त्रेता युग में विश्वामित्र जी, राम आ लक्ष्मण द्वारा कयल गेल। गंगाक किनारे मंदिर के वातावरण अति पवित्र अछि।
श्रावण मास आ महाशिवरात्रि में हजारों भक्त जलाभिषेक कय अपन श्रद्धा प्रकट करैत छथि। स्वतंत्रता आंदोलन में तिलकामांझी जइसन सेनानीओं एतय शक्ति लेल पूजा कयने छलाह।
पर्यटन दृष्टिकोण सं देखल जाए त कंधा सूर्य मंदिर गुमनाम स्थल अछि, जेतेक ख्याति कोणार्क वा देव सूर्य मंदिर के भेटैत अछि, ओतेक नहि। प्रशासनिक उपेक्षा के बावजूद, ई स्थल मिथिलाक संस्कृति आ धार्मिक परंपरा के अमूल्य पहचान बनेने अछि।
सहरसा जिलाक कंधा गाँव में स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर मिथिलाक ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर छी। ई मंदिर द्वापर युग सं जुड़ल अछि जे भगवान श्रीकृष्णक पुत्र साम्भ द्वारा स्थापित भेल। मिथिला क्षेत्रक सूर्य उपासना आ छठ पर्वक केंद्र के रूप में ई मंदिर लोकविधि आ संस्कृति संग जुड़ल अछि।
छठ पर्व आ प्रत्येक रवि के दिन एहि मंदिर पर श्रद्धालु दूर—दूर सं पूजा—अर्चना करय लेल अबैत छथि। लोक विश्वास अछि जे मंदिरक कुंडक पानी त्वचा सहित अन्य रोग दूर करैछ।
मंदिरक निर्माण चौदहवीं सदी में कर्णाट वंशक राजा हरिसिंह देव द्वारा कैल गेल छल आ समय—समय पर कई बार जीर्णोद्धार भेल। कालांतर में प्रसिद्ध संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं द्वारा पुनर्निर्माण भेल। ई स्थल पुजारी, भक्तजन आ पर्यटक सभक लेल आस्था आ चमत्कारक केन्द्र छी।
कंधा सूर्य मंदिरक विशेषता अछि— एतय काले पत्थर पर सूर्य भगवानक दुर्लभ मूर्ति बनल अछि, जेकी रथ पर सवार सात घोड़ासँ शोभित छथिन। एहि मूर्ति पर मेष राशि सेहो अंकित अछि; मान्यता अनुसार वैशाख मास में सूर्यक पहिल किरण एहि मूर्ति पर पड़ैत अछि।
रामनवमी आ विवाह पंचमी पर विशेष भीड़ लागैत अछि। ई स्थल मिथिलाक धार्मिक आ सांस्कृतिक प्रतीक अछि। श्रद्धालु दूर-दूर सँ पूजा-अर्चना हेतु अबैत छथि आ अहिल्या देवी सँ दुःख-कष्ट दूर होयबाक प्रार्थना करैत छथि।
दरभंगा जिलाक अहियारी गाँव में स्थित अहिल्या स्थान मिथिलाक प्रमुख तीर्थस्थल अछि। रामायण अनुसार, अहिल्या गौतम ऋषिक पत्नी छलीह, जिनका शापित कऽ पत्थर बनल गेल। त्रेता युग में भगवान राम मिथिला आबिकय अहिल्याक उद्धार केलनि।
इएह घटनाक स्मृति में ई स्थल 'अहिल्या स्थान' नाम सँ प्रसिद्ध भेल। एहि पवित्र मंदिर में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, गौतम ऋषि आ अहिल्या केर मूर्ति अछि। महिला पुजारी द्वारा पूजा-अर्चना होइत अछि, जे देश में विरल अछि।
हरिमोहन झा मैथिली साहित्यक आधुनिक युगमे एकटा अमर लेखक छथि। हिनकर जन्म १९०८ ई. में वैशाली जिलाक कुंवर बाजितपुर गाममे भेल। बचपनसँ हुनका संस्कृत, दर्शनशास्त्र आ इंग्लिशमे गहरी रुचि छल। पिता जनार्दन झा "जनसीदन" मिथिला मिहिर पत्रिकाक सम्पादक आ कवि छलाह। #maithili
प्रातःकाल घुमब-फिरब स्वास्थ्यक लेल बहुत फायदेमंद अछि। सूर्योदयक समय ताजा हवा आ शुद्ध वातावरण शरीर आ मन दूनू के स्वस्थ राखैत अछि। नियमित सैर सं हृदय मजबूत होइत अछि रक्तचाप नियंत्रित रहैत अछि आ मानसिक तनाव कम होइत अछि। मात्र ३० मिनट दैनिक चलब जीवनमे सकारात्मक परिवर्तन आनि सकैत अछि।