आज दिनांक 24-09-2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के निर्देशानुसार जनपद लखनऊ स्थित मान्यवर मसीहा साहब श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल, पुरानी जेल रोड, लखनऊ में आगामी 9 अक्टूबर को मान्यवर मसीहा साहब श्री कांशीराम जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित होने वाले विशाल कार्यक्रम की तैयारियों के संबंध में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ कार्यक्रम स्थल का जायजा लिया।
#9_अक्टूबर_चलो_लखनऊ
#जयभीम #BSP #लखनऊ #मिशन_2027
जमुई में प्रेमी युगल के साथ नंदन यादव हिंसक हुआ तो पुलिस ने पैरों में गोली मारी गांव व यादव समाज की आलोचना जम कर हुई
किंतु जब यहीं प्रेमी युगलों के साथ हिंसा हर रोज #बजरंग_दल करता है, तब गर्व का विषय क्यों बन जाता है ?
नंदन यादव तो समाज का नया ठेकदार बना पर करना किन से सीखा ?
इस समय अनुसुचित जातिया/जनजाति सबसे मुश्किल दौर में है क्योंकि एक systematic तरीके से उसपर चारो तरफ से हमले हो रहे है।। प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष व साइलेंट तौर पर।।इसका मुख्य कारण यह है कि;
1.एससी एसटी को नया कुछ न मिले।
2.जो मिल रहा है, सरकार उसमे कटौती कर दे।
कुल मिलाकर एससी/एसटी को पुनः वंही ले जाने की योजना है, जँहा से बाबा साहब उठाकर लाये थे।।
ऐसे में इस Systematic अटैक का जवाब देने के लिए अनुसुचित जातीयो में से बुद्धिजीवी व्यक्तिओ को आगे आना चाहिए जो "क्यो, कब, कैसे" के आधार पर नैरेटिव को कॉउंटर कर सके।
इस सम्बंध में हम इस पर विचार कर रहे है की;
1.एक बकायदा टीम बनाई जाए।
2.वेबिनार के माध्यम से आपस मे कनेक्ट होकर कॉउंटर करने पर चर्चा करनी चाहिए।
3.व्हाट्सएप्प ग्रुप्स के माध्यम से।
3.वीडीओ/क्लिप्स बनाई जाए।।
कौन सा विचार सही है। या इससे अलग अन्य कोई विचार, जिसमे खर्च भी न हो। क्योंकि सहायता करने वाले 100 में से 2 ही मिलते है, फिर ऐसी कई योजनाओं में मेरी जेब से ही पैसा जाता है।।
बाकी एससी अपने ऊपर रहे कॉउंटर का जवाब नही दे रहा। जिसके कारण सरकार अंदर खाने उंसके लिए कोई योजना पर सीरियस नही है।। नई बनने की बात दूर की है, जो चल रही है, उसका क्रियान्वयन भी नही हो रहा।
कम से कम एससी समाज को इसकी जानकारी होनी चाहिए।।
विकास कुमार जाटव
सीसीटीवी फुटेज में मोबाइल फोन नहीं है।
सीसीटीवी फुटेज में सभी अभ्यर्थियों की डेस्क पर Calci रखी हुई है।
साहिल अपना एग्जाम देने के बाद परीक्षा हॉल से गया।
पहले जातिवादी प्रोफेसरों ने मिलकर साहिल की हत्या की।
जातिवादी प्रोफेसरों ने चीटिंग का आरोप लगाकर उसे बदनाम किया।
पहले साहिल पर चीटिंग का आरोप लगा फिर जब बहुजन समाज के लोगो ने उस मनगढ़ंत झूठ का विरोध किया तो IITB ने माफीनामा जारी कर दिया ।
फिर IITB ने वो ट्वीट डिलीट किया और फर्जी वीडियो वायरल हुआ फिर उस झूठ की भी पोल बहुजन समाज के लोगो ने खोल दिया तो अब फिर से IITB का माफीनामा आ गया ।
यकीन मानो साहिल वागोड़े की आत्महत्या/हत्या में बहुत गहरी साजिश है जिसे छुपाने के लिए साहिल वागोड़े का चरित्र हनन किया जा रहा है ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके ।
यह प्रोफ़ेसर दुल्ला ख़तरनाक व्यक्ति है, 2020 में दलित छात्र दर्शन सोलंकी को भी इसने सार्वजनिक रूप से अपमानित किया था, जिसके बाद उसने भी आत्महत्या कर ली थी,
Fine करना अलग बात है लेकिन पब्लिकली ह्यूमिलिएट करना बिल्कुल अलग बात है, यह आदतन अपराधी है, बच्चों को एब्यूज करता है, करियर तबाह करने की धमकी देता है,
यह सब जाति देखकर ही किया जाता है, इस दुष्ट के समर्थन में आ रहे हैं मनुवादी, 🔥
#IITBombay లో చనిపోయిన విద్యార్థి తల్లిదండ్రులతో రాహుల్ గాంధీ మాట్లాడిర్రు. గొప్ప విషయం.
కానీ, ఆ విద్యార్థి క్యారెక్టర్ ను బ్యాడ్ చేసి.. దుర్మార్గుడైన ప్రొఫెసర్ కి మద్దతు ఇచ్చిన కాంగ్రెస్ జాతీయ అధికార ప్రతినిధి @drshamamohd మీద ఎందుకు చర్యలు తీసుకోలేదు?
ఇదేం డబుల్ (దగుల్బాజీ) రాజకీయం?
सुसाइड मामले में अभी पुलिस की जांच पूरी भी नहीं हुई है, फिर भी छात्र की संवेदनशीलता और गरिमा को ताक पर रखकर परीक्षा हॉल का CCTV फुटेज मीडिया/सोशल मीडिया पर लीक कर दिया गया! बिना सोचे-समझे इस तरह संवेदनशील अपूर्ण तथ्यों को सार्वजनिक करना न सिर्फ जांच को प्रभावित करता है, बल्कि छात्र और उसके परिवार के प्रति घोर असंवेदनशीलता है।
क्या हो गया भारतीय मीडिया को इतनी ज़हिलियत, नीच, जातिवादी कुंठा... एक दिन देश को ले डूबेगी।
एससी/एसटी केस में "आरोपी क्यो बरी" हो जाते है उसका चरणबद्ध तरीके से मेने कारण बताया था। फतेहाबाद हरियाणा की इस घटना ने मेरे लेख व क्रम को सिद्ध भी कर दिया है।।
एक एससी युवक एक जाट युवती से घर से भागकर अंतरजातीय विवाह कर लेता है। इंहा;
1.गाँव वाले एससी परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर देते है।
2.मुनादी करवाई जाती है।
3.दुकानदार सामान देने से मना कर देते है।
जिसके खिलाफ पीड़ितों ने रिपोर्ट दर्ज करवाई जिसके बाद पुलिस ने 50 से ऊपर लोगो के खिलाफ एफआईआर दर्ज करी। कुछ दुकानदार व अन्य जेल भेजे गए। अब;
4.गाँव मे पंचायत हुई।
5.सामाजिक बहिष्कार करने वालो ने पैसे इकट्ठे करे। एक परिवार को मिनिमम 40 हजार देने थे। कई लाखो इकट्ठा हुए। अब एससी/एक्ट की धाराओं को खत्म करने व केस को कमजोर करने के लिए पुलिस वालों को पैसे दिए गए। बकायदा रजिस्टर में किसने कितने पैसे दिए। पुलिस के किस अधिकारी को कितना पैसा दिया। पूरा विबरण लिखा गया।
6.रजिस्टर में डीएसपी को 9 लाख 30 हजार दिए दर्ज है।
7.इसके अलावा 2 लाख 20 हजार नम्बरदार,सरपंच व एक किसान को दिए दर्ज है।
8.इस सम्बंध में डीएसपी के रीडर से लेनदेन की बात का ऑडियो वायरल हुआ।
9.जिसके बाद हंगामा हुआ। रीडर अब रिटायर हो चुके है।
10.एंटी करप्शन ब्यूरो ने डीएसपी के रीडर सब इंस्पेक्टर दर्शन सिंह को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।
बस इसी तरह से एससी/एसर्टी एक्ट में केस अपने अंतिम मुकाम तक नही पहुच पाते। मेने एससी एसर्टी एक्ट में बरी होने के निम्न चरणबद्ध कारण बताए थे जिसमें;
1.एटॉसिटी घटना हुई।
2.पुलिस से दूर रहना। दबंग पहली धमकी देते है।
3.फिर गाँव की पंचायत उसे रोकती है।
4.अगर थाने चला भी गया तो पुलिस केस दर्ज नही करती
दूसरी पार्टी पुलिस पर प्रभाव डाल देती है।
5.पुलिस की तरफ से थानेदार इतने प्रश्न पूछता है और अकड़कर पूछता है कि पीड़ित डर जाता है।
6.लड़कीं पीड़ित है तो महिला पुलिसकर्मी उसका मोरल डाउन कर देती है।।
7.मेडिकल पर ले जाने पे मेडिकल टीम पर निर्भर करता है कि वो कैसा व्यवहार करेंगे।
8.उंसके बाद पीड़ित अगर साहस दिखा दे तो ही एफआईआर दर्ज होती है।।
अब अगला चरण शुरू होता है;
9.आरोपी फर्जी केस में फँसाने की कोशिस करता है।
10.गवाहों को धमकी या धन से खरीद लिए जाते है।
11.केस लम्बा खिंचवाया जाता है जिससे लड़कीं अविवाहित हो तो तंग आ जाए। शादी के नाम पर केस पर ध्यान ने दे सके।
12.पीड़ित परिवारों का गांव में रहना दूभर कर देते है। पंचायतो के माध्यम से लगातार दवाब बनाया जाता है।
13.इतना दवाब बनाया जाता है कि पीड़ित डर जाता है। पीड़ित कमजोर है इसलिए ही एट्रोसिटी हुई।।
14.पुलिस को प्रभाव में ले लिया जाता है। जो पैरवी सही नह करती। जानबूझकर लूपहोल रखती है।
इसलिए केस में आरोपी बरी हो जाते है। पीड़ित अगर मनोबलयुक्त व सामान्य क्षमता वाला होता तो उसके साथ एट्रोसिटी ही नही होती। एट्रोसिटी केस में त्वरित कारवाई, एक साल में केस खत्म व एक विशेष पुलिस सेक्शन बनाना चाहिए जिसमें एससी व मुस्लिम, ईसाई अधिकारी हो।
विकास कुमार जाटव
#iitbombay#indianmedia#trail
दलित छात्र सोहिल की मौत की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है, उसने किसी तरह का आधिकारिक बयान नहीं दिया कक्षा में प्रथम पंक्ति में बैठे तीन इनविजलीटर और 4 कैमरे के बीच सोहिल और प्रोफेसर के बीच क्या संवाद या आदान प्रदान हुआ ना सीसीटीवी फुटेज में कुछ क्लियर आया फिर मीडिया किस आधार पर सोहिल को बिना आधिकारिक जांच या पुष्टि हुए बिना बदनाम कर रही है ?
IIT का मैनुवल में चीटिंग करते पकड़े जाने पर डिवाइज जब्त कर उसके सीरियल नंबर या Equipment Identity नंबर दर्ज कर कार्यवाही होती है,
इस तरह के किसी दस्तावेज का जिक्र ना प्रोफेसर ने किया ना संस्था ने फिर भारतीय मीडिया को इतनी छूट किसने दी वो जांच एजेंसियों की पुष्टि के बिना किसी मृतक छात्र के सम्मान के साथ घिनोना खिलवाड़ कर सके !
सभी मीडिया चैनलों की फुटेज रख कर कोर्ट में मानहानि का मुकदमा लिखवाया जाएगा !
जब हिंदू नेता नितिन गडकरी के परिवार बीफ़ एक्सपोर्ट पर बिना जांच हुए वीडियो बनाने पर एक अदने से यूट्यूबर कोई मुकेश पर 200 करोड़ का मानहानि का मुकदमा चलाया जा सकता है,
तब भारतीय मीडिया भी इसे परे नहीं ब्राह्मण बनिया वर्ग द्वारा पोषित इंडियन मीडिया दुनिया की सबसे घंटिया मीडिया में गिनती ऐसे ही नहीं होती और जांच से पहले गलत तथ्य चलाने पर ये ब्राह्मणवादी नारपिशाच मीडिया माफ़ी तक नहीं मांगती !
बहुजन समाज की सामाजिक संस्था आगे आए इन सभी यूट्यूबर्स और न्यूज चैनल पर मानहानि का मुकदमा कर सब पर भारी आर्थिक दंड भरवाया जाए अगर इन्हें अभी नहीं रोका तो जातिवादी आतंकी देश को बर्बाद कर देंगे !! नमस्ते
#Baba_Manish
30 मैनस्ट्रीम न्यूज़ चैनलों के 100 सवर्ण न्यूज़ एंकर CCTV फुटेज के क्लिप को वायरल कर के झूठ फैला रहे हैं.
इस वायरल CCTV फुटेज से बिल्कुल साबित नही होता है साहिल वकोडे नकल कर रहा था.
वो एग्जाम खत्म कर के अपना पेपर सम्मिट करके क्लासरूम से बाहर जाता है दिख रहा है.
पीछे की बेंच पर एक स्टूडेंट ने Calculator इस्तेमाल कर रहा है. साहिल भी Calculator ही इस्तेमाल कर रहा है.
साहिल ने अपना पेपर दिया, कैलकुलेटर और पानी का बोतल उठाया और चलता बना.
साहिल को जिस तरह बदनाम किया जा रहा है, कहना ही होगा न्यायपालिका को बंद कर देना चाहिए और न्यूज़ चैनलों को न्यायपालिका और डिप्लोमा धारी न्यूज़ एंकरों को जज बना देना चाहिए. दिन रात बीजेपी के लिए PR करने वाले न्यूज़ एंकर तीन दिनों से जज बनकर ही एक बच्चे का चरित्र हनन कर रहे हैं.
#iitbombay#DalitLivesMatter
समझ से परे है, क्राइम ब्रांच मीडिया को चैतावनी देनी की जगह अपील क्यों कर रही है ?
अभी तक पुष्टि नहीं हुई सीसीटीवी फुटेज में मोबाइल ही था या नहीं ? अगर कोई भी इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस था तो उसे IIT संस्था के नियमावली के अनुसार विभाग में जब्त क्यों नहीं किया जबकि साहिल प्रोफ़ेसर के हाथ में कुछ देता हुआ स्पष्ट दिख रहा है लेकिन प्रोफेसर ने कुछ लौटाया हो ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है, बावजूद साहिल के कमरे में से मोबाइल कैसे बरामद हुआ ?
प्रोफेसर जिसे पूछताछ होनी चाहिए थी उसे छोड़ा हुआ क्यों है ? क्यों उसे घटना के बाद छुट्टी पर जाने दिया ?
एक ऐसा प्रोफेसर किसी भी छात्र को कितना डरा सकता है इसका अनुमान कोई भी पढ़ा लिखा आराम से लगा सकता है,
क्या हो अगर साहिल के दोस्तो पर दबाव बनाए या जो प्रोफेसर के खिलाफ जाए उनको चुप करवाए ? प्रोफेसर का साथ देने को तो उसका पूरा फैकल्टी फॉर्म स्पष्ट ही उतर गया, आए भी क्यों ना 91% प्रोफेसर एक ही जाति समूह के iit बम्बई में है किंतु अगर छात्रों पर दबाव बनाया तब छात्रों का साथ देने को कौन आयेगा है ?
प्रोफेसर अपना कोई दो साल पहले का email सोशल मीडिया पर लगा सहानुभूति बटौर के दिखा रहा है, जबकि उस ईमेल की सच्चाई कुछ और है !
( ये कोई उसका व्यक्तिगत लिखा हुआ email नहीं कोई भी प्रोफेसर जो डिपार्टमेंट का डिन iit में बनता है तब ऐसे फॉर्मल email भेजता है, भले ही में डिन बनु या आप तब एक निश्चित फॉर्मेट का email जिसमें जात धर्म पर भेदभाव मत करो , जीवो पर दया, जल जीवन , प्रकृति की रक्षा करना टाइप सभी छात्रों को डिन भेजता है ) अगर इतना ही जातिभेद के खिलाफ था डीन पद से हटने के बाद इसका कोई ऐसा ईमेल क्यों नहीं आया ?
पहले दिन से ही ये प्रोफेसर सिंपैथी गेम ही खेल रहा है, सवाल कुछ भी करो जवाब सिंपैथी लेने वाला ही होगा,
इसका ईमेल ही जातिवादी प्रोफेसर को मरवा गया , इस ईमेल से ऑनलाइन लोगो को मूर्ख बना सिंपैथी अर्जित करी जा सकती है, पर थाने में जब क्राइम ब्रांच ऑफिसर दो थप्पड़ लगाएगा कूद कूद के खुदी सब सच बतायेगा किस किस छात्र छात्रा के साथ क्या क्या भेदभाव किया !
इसको जल्द से जल्द हिरासत में लेना चाहिए,
अब इतनी बड़ी संस्था में इतने निम्न स्तर के सीसीटीवी जिनका विजुअल तक क्लियर नहीं जो केवल भ्रम पैदा कर रहे है, वो भी सिर्फ एक ही एंगल से दिखाए जा रहे है, क्या कारण है ?
खैर ACP रैंक के अधिकारी को DCP की निगरानी में जांच चल रही है, अभी तक किसी मोबाइल की पुष्टि नहीं हुई पर जातिवादी भारतीय समाज की कुछ निरालज जातियां सदा से दलितों से बेचैन रही उसका कोई ईलाज नहीं पर मीडिया पर मानहानि का मुकदमा हर जिला से बहुजन समाज के वकीलों को करना चाहिए ताकि भविष्य में किसी छात्र की मौत पर एजेंडा ना बनाया जाए, ये जातिवादी आतंकी भारत को कभी उभरते देखना नहीं चाहते ! नमस्ते
#Baba_Manish
जो माहौल 2022 में समाजवादी पार्टी के लिए बना था उससे अच्छा माहौल 2027 में बहुजन समाज पार्टी के लिए बन रहा है।
2022 में सपा ने तो हरा नहीं पाया लेकिन 2027 में बसपा भाजपा को जरूर हराएगी।
जाति वादी दुनिया के सबसे अमानवीय घटिया इंसान हैं। IIT Bombay का छात्र साहिल प्रताड़ना से तंग आकर अपनी जान दे दिया।
मगर जातिवादी बिना प्रूफ के दिन रात पानी पीकर-पीकर कर जान दे चुके विद्यार्थी पर नकल करने का आरोप लगा रहे हैं।
अभी तक IIT ने और जांच एजेंसी ने इसकी इसकी पुष्टि नहीं।
सोचो ये जातिवादी कितने क्रूर होते हैं। मरने के बाद जातिवादी करने से बाज नहीं आ रहे। जब साहिल जीवित होगा तो उसके साथ किस हद तक अत्याचार करते होंगे।
खैर कानून किसी भी आरोपी को नहीं छोड़ेगा, सबूत के साथ दोषी को पकड़ा जाएगा।
भाजपाइयों का छोड़ो, जितने कांग्रेसी paid ट्वीट करके दलित छात्र की मौत का तमाशा बना रहे हैं, उनमें से किसी को राहुल गांधी पार्टी से निकालेंगे?
नहीं भाईजान, ब्रो हरिजन।
ही इज़ नाउ रियल गांधियन।
सब्स्क्राइब करने वाले घटते जा रहे है। लेकिन इनबॉक्स में आग्रह करने वाले बढ़ते जा रहे है। ऐसा काहे?
जबकिं हम उसमे प्राप्त धन व स्वयं का निकालकर सामाजिक Pay back to Society में इसे खर्च करते रहते है।
जैसे यह बैग अत्यंत गरीब स्कूल में दिए थे।
ऐसे Pay back to Society के कार्यक्रम हम लगातार करते रहते है। हर महीने इनबॉक्स में कम से कम 50 से ऊपर मदद मांगने वालों के मैसेज पड़े होते है। जिसमे वाकई काफी जरूरतमंद होते है।।
दिक्कत यह है कि इस मुहिम में सहयोग करने वाले काफी कम है। क्योंकि एससी में केवल अम्बेडकरवादी ही समाज की मदद करता है। जो है, वो ही बार बार करते है। कुछ पर ही बर्डन डालना सही नही है। इसलिए इनबॉक्स में मैसेज करने वाले मजबूरी समझा करे।। फिर भी कोशिस करते है कि कुछ की मदद हो सके।
इस मुहिम में जो थोड़े बहुत सामाजिक जिम्मेदारी समझकर हमारे कहने पर अन्य अत्यंत जरूरतमंद एससी युवा की मदद कर देते है उनका हार्दिक आभार, शुक्रिया। उन लोगो के कंधे पर ही समाज थोडा ही सही लेकिन आगे बढ़ रहा है।
जय भीम। जय भारत।।
संकल्प दिवस: 109 साल पहले लिया संकल्प, जिसने देश के कई करोड़ो की जिंदगी बदल दी।
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आज संकल्प दिवस है। यह दिन देश के 27 करोड़ अनुसुचित जातीयो के लिए काफी महत्वपूर्ण है। बाबा साहब अगर 109 साल पहले आज के ही दिन संकल्प न लेते तो एससी में मिडिल क्लास बनाना मुश्किल था। अधिकारों की जानकारी तक नही हो पाती।।
भारतीय शोषित समाज के लिए आज का दिन काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है। आज से 109 साल पहले अगर आज ही के दिन 23 सितम्बर 1917 को एक महान हस्ती "संकल्प" न लेते तो;
1.मान्यवर कांशीराम, मायावती जी, पासवान जी, व संसद में शोषित समाज के 131 सांसद नही होते।
2.जो पढ़ रहे है उनमें से कई आई ए एस, आई पी एस, आई एफ एस से लेकर क्लर्क तक इतने बड़े स्तर पर शोषित समाज से नही होते।
3.शोषित समाज से व्यवसायी बनने के रास्ते मे रुकावट ही रुकावट मिलती।
4.राजनीति में दलित राजनीति नाम कोई नही लेता। सिम्पल शब्दो मे शोषित समाज समाज मे मुख्यधारा से नही जुड़ पाता।
5.सबसे मुख्य पशु समान जीवन से बाहर न आ पाते।।
बाबा साहब विश्व की प्रसिद्ध कोलम्बिया यूनिवर्सिटी से पढ़कर वापस आये तब सयाजी गायकवाड़ से किये गए अनुबन्ध के आधार पर वडोदरा रियासत में सचिव के पद पर कार्य करने लगे। बाबा साहब दक्षिण एशिया के उन प्रथम व्यक्तिओ में से जिन्होंने कोलम्बिया यूनवर्सिटी से शिक्षा ली थी। एक ज्ञानी व्यक्ति के साथ साथ वडोदरा रियासत के सबसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन होने के बाद भी चपरासी बाबा साहब को फेंक कर फाइल देता था, बाबा साहब के पानी पीने का गिलास अलग था।
बाबा साहब को रहने के लिए किसी ने ठिकाना नही दिया। एक पारसी गेस्ट हाउस में अपने आप को गैर शोषित वर्ग से बोलने की वजह से रहने की अनुमति मिली। कुछ दिन बाद पारसियों को बाबा साहब की असलियत पता लग गयी, पारसियों का एक समूह बाबा साहब के पास आया और उन्हें घर खाली करने के लिए कहा। बाबा साहब के कुछ समय का मोहलत मांगने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया। बाबा साहब को तुरंत उनके समान के साथ बाहर कर दिया गया। बाबा साहब वँहा से सीधा रेलवे स्टेशन आकर ट्रैन की इंतजार में बैठ गए।
ट्रैन आने में 5 घण्टे थे। बाबा साहब परेशान थे। इतनी शिक्षा व ज्ञान के साथ उच्च पद होने के बाद भी जातिवाद की वजह से बेईज्जती कर दी गयी। बाबा साहब स्टेशन के पास एक पार्क में आकर बैठ गए। काफी देर सोचते रहे, पूरा समाज आंखों के सामने घूम रहा था, उन्हें एहसास हुआ कि जब मेरे साथ ऐसा हुआ तो मेरा समाज तो जानवर से भी बेकार स्तिथि में जी रहा है, शोषित समाज के कोई मानव अधिकार नही थे। इसलिए एकाएक बाबा साहब ने यह संकल्प लिया कि अब नौकरी के चक्कर मे लगने की जगह पूरी जिंदगी शोषित समाज को गुलामो व जानवर से भी बदतर स्तिथि से बाहर निकालने में लगा दूंगा और अगर नाकामयाब रहा तो अपने आप को गोली मार लूंगा।
तो मित्रो। आज में एक स्वतंत्र लेखक के तौर पर इसलिए लिख पा रहा हूँ क्योंकि बाबा साहब ने आज से 109 साल पहले आज ही के दिन संकल्प लिया था। इसलिए यह सही दिन है जब हमे भी संकल्प लेना चाहिए कि अंधविश्वास, धार्मिक मान्यताओं को छोड़कर समाज मे शिक्षा का प्रसार करने व समय लगाएंगे व किसी न किसी रूप में Pay back to Society के अंतर्गत शोषित समाज के भाई व बहन की ज्ञान, सुरक्षा, जनजागरूकता व आर्थिक तौर पर मदद करनी है। तभी बाबा साहब का संकल्प पूरी तरह से कामयाब रहेगा। ।
विकास कुमार जाटव