Wonderful to speak with my dear friend President Trump today. Delighted that Made in India products will now have a reduced tariff of 18%. Big thanks to President Trump on behalf of the 1.4 billion people of India for this wonderful announcement.
When two large economies and the world’s largest democracies work together, it benefits our people and unlocks immense opportunities for mutually beneficial cooperation.
President Trump’s leadership is vital for global peace, stability, and prosperity. India fully supports his efforts for peace.
I look forward to working closely with him to take our partnership to unprecedented heights.
@POTUS@realDonaldTrump
संसद में शपथ लेने के लिए मैं अपने परिवार के साथ दिल्ली पहुंची। संसद की सीढ़ी तक पहुंचाने और मेरी सफलता में अहम योगदान निभाने वाली मेरी मां, सासु मां, बड़ी सासु मां, छोटी सासु मां का आशीर्वाद लेकर संसद में प्रवेश किया। उनका स्नेह, समर्थन, और आशीर्वाद ही मेरी प्रेरणा का स्रोत है।
मयंक चला गया, अभी कई जाने वाले हैं !
आप यह पढ़ लें बस, इतना अहसान बहुत होगा !
मयंक सक्सेना के दिल मे दर्द हुआ था, चेकअप कराने के लिए अस्पताल में गया था। दिल वहीं बैठ गया और मयंक की रूह वहां से रुखसत हो गई ! मयंक ने X पर जो पोस्ट पिन की हुई है। उसमें मयंक ने अपने संसाधनों से चुनावी कवरेज़ की दुश्वारियों का वर्णन किया था। मयंक का जाना खराब लगता है ! यह बुरा है ! दुःखद है और आक्रोश पैदा करता है !
अभी कुछ और भी मयंक लाइन में लगे हैं, वो भी चले जाएंगे ! हो सकता है मैं भी चला जाऊं, शायद 2 बेटियों का पिता हूँ, इसलिए अल्लाह ने रोका हुआ है। पिछले कुछ सालों से पत्रकार सबसे उत्पीड़ित जाति है। सब तनाव में है। किसी की नौकरी चली गई ! किसी पर मुक़दमा हो गया ! कोई खून का घूट पीकर गुलामी कर रहा है। किसी ने चाट की दुकान खोल ली है। हजारों की बच्चों के स्कूल की फीस नही जा पा रही ! शहरों में घर का किराया नही जा रहा ! गांव में मम्मी को पैसा नही जा रहा ! शादियों में शिरकत करनी बंद कर दी है, पत्नी रोज झगड़ा करती है , फ्रीलांस जर्नलिज्म अपने अंत की और है। कुछ रात के अंधेरे में ओला -उबर चलाते हैं। इन्हें नेता रोज़ अपमानित करते हैं ! आज हजारों पत्रकार अवसाद में हैं। यह वैकल्पिक मीडिया के पत्रकार है। जिनमे क़ाबलियत तो है मगर देश की मैनस्ट्रीम मीडिया ने उनके लिए दरवाज़े बंद कर दिए हैं, या फिर उन्होंने सम्मानपूर्वक किनारा कर लिया है।
आज इंडिया गठबंधन जिन 235 सीटों पर रीझ रहा है, इनमे इन अपने संसाधनों पर संघर्ष करने वाले पत्रकारों का सबसे महत्वपूर्ण योगदान हैं। यह वैचारिक चुनाव था और इन मुख्य धारा से 'निकाले' असली पत्रकारों ने सच और हक़ की आवाज को दबने नही दिया ! सच के विचार को जिंदा रखता ! टीवी मीडिया ने षड्यंत्र कर लिया था ! राहुल की यात्रा किसने दिखाई ! राहुल की बात किसने उठाई ! अखिलेश के पी डी ए पर किसने बात की ! मयंक जैसे स्वयंभु संस्थानों ने ! जिन्हें किसी ने एक रुपया नही दिया ! जो खुद से लड़ रहे थे ! अपने अपमान का बदला लेने के लिए, खुद की हताशा से और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की चाहत में !
आज इन पत्रकारों को इंडिया गठबंधन का चाटुकार कहने वाले क्या जाने ! कि मीडिया की आज़ादी छिन जाने के बाद मयंक सक्सेना जैसे पत्रकारों ने आखिर झेला क्या है, जो उनका दिल इतना कमज़ोर हो चुका है ! सच कह रहा हूँ ! मेरा दिल भी कई बार बैठ चुका है ! मगर कोई ताक़त मुझे बचा लेती है ! ज़रा सा नाम बन जाए ! तो सीनियर षड्यंत्र करने लगते हैं ! किस -किस से लड़े आज के 'मयंक'। स्टोरी अप्रूवल के लिए युद्ध लड़ने पड़ते हैं !-
मयंक जैसे पत्रकार जनता की सही बात खोज कर लाते है तो विपक्ष को मुद्दा मिलता है। इस चुनाव में खुद मैंने कितने संघर्ष करके रिपोर्टिंग की है, मगर बयां नही कर सकता ! दोस्तों के घर रात गुजारी ! पैदल ,ऑटो, बाइक से यात्रा की, बस और ट्रेन की गर्मी झेली ! चलिए यह सब भी ठीक है ! कलेजा तो तब छिलता था, जब हमसे बहुत कम क़ाबिल मैनस्ट्रीम वाले पत्रकार इनोवा में घूम रहे हैं ! महंगे होटल में रुक रहे हैं! और तो और हेलिकॉप्टर में उड़ रहे हैं ! और वो हमारी खिल्ली भी उड़ा रहे हैं।
मयंक की मौत ने हिला दिया है ! अब तक स्वतंत्र पत्रकारों की इस दशा के लिए मैं सरकार और उसकी नीतियों को जिम्मेदार मानता था। मगर अब मैं इस तनाव और अवसाद का कारण कांग्रेस और उनके सहयोगी दल को मानूंगा ! क्योंकि जब मयंक जनता के दिल की बात खोज कर लाया तो राजनीतिक लाभ किसे मिला,मुद्दे किसके हाथ आए ! आत्मविश्वास किसका जनित हुआ !- ख़तरा उठाया किसने ! दम दिखाया किसने ! जगाया किसने ! तो मुसीबत में मदद करेगा कौन !!
सुन लो आज लोकतंत्र के तमाम संविधान रक्षकों !
एक -एक करके सारे मयंक खो दोगे ! तुम ! और जनता जी कोई नही लड़ेगा तुम्हारी लड़ाई ! संभाल लो, संभाल सकते हो ! यह बात गंभीर है।
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