वन्देमातरम
🙏 विश्व का कल्याण हो, प्राणियों में सद्भावना हो। 🙏
हे रघुनन्ददन राम सलौने, फिर से धनुष बाण ले आओ।
दानवता कर दलन देश में, मानवता का दीप जलाओ ।।
@NijiSachiv भाई नेताओं की तरह सरकारी बाबाओं की भी अपनी कुछ मजबूरियां हैं। अगर वे #UGC_काला_कानून_वापस_लो वाले मुद्दे पर कुछ भी बोलेंगे तो पंडालों में भीड़ कहाँ से लाएंगे।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी हमें एक बात की याद दिलाते हैं। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने ब्रिटेन की संसद में कुछ बातें बताई थीं जिस को 2035 को 200 वर्ष हो रहे हैं। मैकाले के उस विचार और योजना के तहत ही भारत को केवल राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं बौद्धिक रूप से भी कैसे गुलाम बनाया जा सकता है इस का खाका तैयार किया गया और उसी को अंजाम दिया गया। अपना देश स्वतंत्र हो कर इतने वर्ष होने के बाद भी अनेक मैकाले पुत्र जीवित हैं और भारत के सनातन संस्कृति को, आध्यात्मिक ज्ञान और साधना को समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।
1835 में रखे उस योजना के तहत हमारी शिक्षा प्रणाली को बदल दिया गया, भारतीयों के मन में हीन भाव पैदा करने के प्रयास किए गए और सामाजिक तानेबाने को कमजोर करने के प्रयास भी किए गए।
उसी के दूरगामी परिणाम हुए हैं जिस ने हमारी परिवार संस्था को कमजोर बनाया गया, अपने सनातन के बारे में भ्रम फैलाया गया और भारतीय ज्ञान परंपरा के स्थान पर एक “आयातित विचार” हमारे देश में थोपने की कोशिश की गई।
आज हम सब अनुभव कर रहे हैं कि हमारी Family System ऐसे कई बातों का शिकार बन गई हैं जिसका भारी नुकसान सामाजिक तानेबाने पर पड़ रहा है। पश्चिमी जीवन शैली का अनुसरण करने की मानो होड़ लगी हुई है। हमारी विवाह संस्था, परिवार में संस्कार देने वाली बातें कमजोर हो रही हैं।
नशीले पदार्थों का सेवन करने की बात इतनी मात्रा में बढ़ रही है जिस का कोई ठिकाना नहीं है।
स्वयं को Progressive साबित करने के लिए आप को Hindu को अपमानित करना होगा। वैसे ही स्वयं को Modern साबित करना है तो आप को अपने जीवन मूल्यों के विपरीत काम करना होगा यह बात स्वाभाविक सी हो गई है।
नशा करने वालों की संख्या बढ़ रही हैं। Drug Syndicate सक्रिय हो कर काम कर रहे हैं। Campuses, हॉस्पिटल्स, हॉस्टल्स इस के केंद्र बन रहे हैं। ग़रीब परिवारों के लिए नशा एक अभिशाप बन चुका है वहीं पर कुछ उच्चभ्रू परिवार इसे Fashion मानकर अपने परिवार सहित एकसाथ ये बातें करते हैं।
परिस्थिति भयावह रूप धारण कर चुकी है।
इस नशे के बारे में चिंता का विषय इस लिए भी बढ़ा है कि हमारे युवा युवती भी खुशियाँ मनाने के चक्कर में इस में फस जाते हैं। Relaxation या mental Hangover से निजात पाने के लिये ये सब करना पड़ता है यह भी कहने लगते हैं। टीवी पर OTT पर जो देखते हैं वही सच मानकर चलते हैं।
विदेश के कुछ विश्वविद्यालयों में छात्र छात्राओं के बीच जो माहौल बना है उसकी Carbon Copy हमारे यहाँ के शिक्षा संस्थानों में भी होती है।
आज नशे का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक नशीले पदार्थों के साथ-साथ Synthetic Drugs, नए Psychoactive Substances और कुछ नई तरह की नशीली दवाओं का चलन भी चिंता का विषय बन रहा है। ‘Zombie Drug‘ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी ऐसे ही नए और खतरनाक नशीले पदार्थों के संदर्भ में सामने आया है।
इसके साथ ही Prescription Drugs के गलत इस्तेमाल और Cannabis सहित विभिन्न नशीले पदार्थों के दुरुपयोग भी चिंता का विषय है।
नशे का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। इससे पढ़ाई और करियर प्रभावित होते हैं, परिवारों पर आर्थिक और सामाजिक दबाव बढ़ता है तथा व्यक्ति की कार्यक्षमता और सामाजिक संबंध प्रभावित होते हैं। इसके साथ ही नशे से जुड़ी दुर्घटनाओं, अपराध और अन्य सामाजिक समस्याओं का जोखिम तो बढ़ता ही है। लंबे समय तक नशे का सेवन व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। तनाव, अवसाद, अकेलापन और निराशा जैसी स्थितियाँ और अधिक गंभीर हो सकती हैं तथा कुछ मामलों में व्यक्ति में Suicidal Thoughts यानी आत्महत्या के विचार या Self-Harm जैसी प्रवृत्तियों का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था या स्वास्थ्य की समस्या के रूप में नहीं बल्कि युवा मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर सामाजिक चुनौती के रूप में भी समझना आवश्यक है।
‘Zombie Drug’ जैसे नए नाम और बदलते हुए नशीले पदार्थ यह संकेत हैं कि Drug Abuse की चुनौती लगातार अपना स्वरूप भी बदल रही है इसलिए नशे के विरुद्ध जागरूकता का दायरा भी बदलती परिस्थितियों के अनुरूप व्यापक करना आवश्यक है।
नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल कानून और प्रतिबंध की लड़ाई नहीं है, यह परिवार, समाज, शिक्षा व्यवस्था और सरकार सभी की साझा जिम्मेदारी है। हमें ऐसा वातावरण बनाना होगा जिसमें युवा नशे के वास्तविक परिणामों को समझें और उससे दूर रहने के लिए सही जानकारी तथा आवश्यक सहयोग प्राप्त कर सकें।
परिवार में संवाद, विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में Counselling, समाज में जागरूकता और आवश्यकता पड़ने पर उपचार और पुनर्वास इन सभी को साथ लेकर ही इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है|
#SCSTएक्ट के जो झूठे मुकदमे पूरे देश में अलग-अलग जगह पे फाइल हो रहे हैं, अब आपको डरने की जरूरत नहीं आपकी हर प्रकार से हेल्प की जाएगी...
हेल्पलाइन नंबर - 8882002222
#SCST#ugc_rollback#ReservationReform
🚨 बरगदिया गाँव में भूख से जूझता एक ब्राह्मण परिवार …
सबसे दर्दनाक बात ये है कि …
बच्चों की थाली में महीनों से दाल-सब्जी नहीं, सिर्फ सूखे चावल, नमक और थोड़ा तेल है। 😢
अर्पिता पांडे नाम की यह महिला अपने तीन मासूम बच्चों के साथ ऐसी गरीबी में जी रही हैं, जिसे “गरीब” कहना भी कम होगा। यह परिवार महा-गरीब है। घर का हाल इतना बुरा है कि दीवारें टूट-फूट चुकी हैं, छत कहीं-कहीं धँसी हुई है और पूरा मकान खंडहर जैसा लगता है।
सबसे दर्दनाक बात यह है कि इनके तीन छोटे-छोटे बच्चे आज नहीं, बल्कि कई महीनों से भूखे पेट सो रहे हैं। उनका रोजाना का भोजन सिर्फ सूखे चावल में नमक और थोड़ा तेल मिलाकर बनाया जाता है। न दाल, न सब्जी, न दूध… सिर्फ वही एक थाली जो भूख मिटाने के बजाय सिर्फ जिंदा रहने के लिए काफी है।
जब अर्पिता पांडे ने रो-रोकर अपना दुख सुनाया तो रूहें थर्रा गई 🥹💔
अयोध्या के बरगदिया गाँव का यह परिवार अब आपकी नजर में है। अगर आप मदद करना चाहते हैं, तो आगे बढ़कर हाथ बढ़ाएँ।
क्योंकि भूख से लड़ते इन मासूम चेहरों को देखने के बाद, चुप रहना संभव नहीं।
गोल्ड मेडलिस्ट भावना मिश्रा ने SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग पर उठाए सवाल, जब घर पर नहीं थी तब हुई FIR;
वीडियो के मुताबिक, भावना का आरोप है कि उनके खिलाफ झूठा SC/ST Act का मुकदमा दर्ज किया गया, जिसके चलते उन्हें पांच वर्षो से लगातार कोर्ट की तारीखों, आरोपों और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि लंबे समय बाद भी न तो उन्हें राहत मिली है और न ही मामला पूरी तरह समाप्त हुआ है।
(नोट: वीडियो की तारीख और मामले से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।)
देश में #ReservationReforms पर चर्चा हो रही है और बहुत लोग इसका समर्थन कर रहे है
मगर समय आ गया है की #PoliticalReforms पर भी चर्चा हो।
“अनुसूचित जनजाति” के कन्वर्टेड नेता ही जनजाति समाज र्का धर्मांतरण कर रहे है,
“रिजर्व ट्राइबल सीट” से टिकट लेकर,चुनाव जीतकर विधायक और सांसद तथा मंत्री बनकर खुलेआम मिशनरी माफियाओ का एजेंडा चला रहे है और सरकारी ग्रांट के नाम पर “सरकारी योजना” का पैसा जनजाति समाज का धर्मांतरण करवाने में खर्च हो रहा है।
#PoliticalReforms_In_ST_Seat
@narendramodi@AmitShah@blsanthosh@rashtrapatibhvn
अनुराधा तिवारी ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस किया वो किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, सिर्फ मेरिट और न्याय के पक्ष में हैं।
✅ एक परिवार — एक आरक्षण — एक बार
✅ न्यूनतम कट-ऑफ मार्क्स सभी के लिए
✅ 1950 से अब तक की पूर्ण समीक्षा
✅ SC/ST में क्रीमी लेयर
✅ जनरल कैटेगरी के लिए राष्ट्रीय आयोग
✅ UGC रोलबैक
✅ चुनाव में आरक्षण के वादों पर बैन
✅ गरीबी-आधारित मदद
योग्यता को बचाओ, सिस्टम को सुधारो।
डटे रहो बस
एक दिन देश की पूरी की पूरी जनता केवल नेताओं और अंध भक्तों को छोड़कर, एक साथ खड़े हो जायेंगे, क्या हिन्दू क्या मुस्लिम क्या सिक्ख क्या ईसाई सब तिरंगे के ध्वज तले खड़े होकर देश की तस्वीर बदल देंगे
संगठन में ही शक्ति निहित है
और जनता ही जनार्दन है 🇮🇳
जय हिन्द