नाम:बबीता चंचल
ग्राम:देवारा खसरजा
तहसील:सगड़ी
थाना:रौनापार
पिन:276122
अपराध - हिंदू देवी देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर राही है जो हिंदू संगठन बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा 😡
महोदय,@Uppolice@dgpup@azamgarhpolice@digazamgarh@adgzonevaranasi कड़ी कारवाही करे 🚨|
भारत पूरे विश्व में सबसे अद्भुत देश है –
यहाँ देश के सर्वोच्च पद पर पहुंच जाने के बाद भी व्यक्ति “आदिवासी” कहलाता है और सबसे बड़ा मंत्री बन जाने के बाद भी खुद को “पिछड़ा” ही मानता है।
यहां व्यक्ति की पहचान,
पद से नहीं, उसके जाति से तय होती है।
और व्यवस्था की ���ूबसूरती तो देखिए –
जिसके घर में 50 लाख की गाड़ी है और 5 लाख महीना आता है, उसके बच्चे का सरकारी नौकरी का फॉर्म भरने का शुल्क रुपए शून्य होता है
और जिसके घर में –
महीने भर में 2000 भी मुश्किल से आते हैं, वह 1000 रुपये फीस देकर अपने बच्चों के सपनों की पर्ची खरीदता है।
इसके बावजूद भी हम कहते हैं –
यह देश अवसरों का है, सबको समान मौका मिलता है। सबको समान जीने और आगे बढ़ने का अधिकार है।
सच तो यह है कि –
बराबरी का नारा भी अक्सर असमानता की सीढ़ियों पर खड़ा होकर लगाया जाता है।
आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद की टीम को अगर बीसीसीआई सस्पेंड नहीं करती है तो समझो बीसीसीआई दुश्मन देश से मिली हुई है देश के जवानों की शहादत और पहलगांव में हमारी बेटियों के, सिंदूर मिटे उसका बीसीसीआई को कोई दुख नहीं है @BCCI केवल पैसा देखती है, देश का स्वाभिमान नहीं।
#BoycottSRH
Prepaid Recharge Customers क�� साथ हो रही लूट का मुद्दा आज मैंने Parliament में उठाया।
(a) अगर आपका recharge खत्म हो जाए तो Outgoing Calls बंद होना समझ में आता है, लेकिन Incoming Calls बंद करना मनमानी है।रिचार्ज खत्म होते ही न कोई आपसे संपर्क कर सकता है और न ही आपके फोन पर OTP जैसे जरूरी मैसेज आ पाते हैं। Emergency के हालातों में व्यक्ति बेसहारा हो जाता है।
(b) 28 दिन का Recharge plan एक scam है। साल में महीने 12 होते हैं लेकिन रिचार्ज 13 बार करवाना पड़ता है (28 days x 13 times = 364 days).
Recharge plan की वैधता calender months (30–31 दिन) के हिसाब से होनी चाहिए, क्योंकि 28 दिन के चक्कर में लोगों को साल भर में एक अतिरिक्त रिचार्ज करवाना पड़ता है।
मोबाइल आज के समय में Luxury ���हीं, बल्कि आम नागरिक की Necessity बन चुका है।
इसलिए टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं के साथ Fair और Transparent रवैया रखना चाहिए।
आप कुत्ता बिल्ली के लिये प्रोटेस्ट करिये, मीडिया पहुँच जायेगी।
आप ईरान इसराइल पर प्रोटेस्ट करिये, मीडिया वाले आ जायेंगे।
आप बहुजन और ब्राह्मण विरोध पर प्रोटेस्ट करिये, मीडिया कवर करेगी।
लेकिन भारत के सामान्य वर्ग, जब अपने संवैधानिक अधिकार की माँग करेंगे यही मीडिया आँखे बंद कर लेगी।
एक भी पत्रकार नींद से नह���ं उठेगा।
क्योंकि, आप उनके लिये केवल TRP है, बाक़ी आपकी कोई हैसियत नहीं है।
आज मीडिया ने UGC प्रोटेस्ट का बॉयकॉट कर दिया। शर्म भी नहीं आती इन्हें। 🤷🏻♂️
रामलीला मैदान की रैली जितनी सफलता से रोकी जा रही है, शाहीन बाग भी रोका जा सकता था, लेकिन क्या है न कि वेडनसड�� फिल्म के कॉमन मैन का एक कालजयी डायलॉग है-
जैसे ही आपको पता चला कि अच्छा! टेररिस्ट नहीं है, अराजक नहीं है। आम आदमी है तो आपके अंदर अचानक एक कॉन्फिडेंस आ जाता है, अच्छा तब तो जब चाहे, जैसे चाहे, जहां चाहे रोक दूंगा।
रोक भी दिया 🙂 पुराना लेकिन समीचीन दोहा है -
सबै सहायक सबल के कोउ न निबल सहाय।
पवन जगावत आग कौं दीपहि देत बुझाय॥
मुझे सवर्ण रैली में जीरो इं��रेस्ट है पर इस बात का रहस्य जानने में बड़ा इंटरेस्ट है कि ये सख्ती, ये तेवर, ये बंदोबस्त शाहीन बाग के टाइम किधर चला जाता है 🥴
मेरा दोस्त रात-दिन 18 घंटे NEET की तैयारी करता था।
पिता ने खेत बेचकर कोचिंग की फीस भरी।
680+ स्कोर किया... लेकिन सीट चली गई 520 वाले को।
कारण? बस एक जाति प्रमाण-पत्र। 21 साल की उम्र में उसने आत्महत्या कर ली।
माँ से आखिरी बात: "माँ, मैंने बहुत कोशिश की... सच में।" ये न्याय नहीं, ये दिल तोड़ने वाली क्रूरता है।
आरक्षण गरीबी मिटाने के लिए था, जन्म से सजा देने के लिए नहीं। आरक्षण सुधार चाहिए — जरूरत और मेहनत के आधार पर मदद, जाति के नाम पर नहीं। कौन साथ है?
#आरक्षणसुधार #मेरिटकीहत्या #जनरलकादर्द