@Ramraajya@FirozKh15976393 तो फिर कोरोनाकाल में जनता का इलाज न कराकर घपले से शीशमहल बनवानेवाला मुख्यमंत्री कैसे है?
तो फिर शराब के ठेके में घूस लेनेवाला मुख्यमंत्री कैसे है ?
तो फिर पंजाब के प्लेन से पार्टी के काम से घूमनेवाला दिल्ली का मुख्यमंत्री कैसे है ?
@ANI Kejriwal is a liar and manipulator.
There are properties in the list in the name of Sisodiya/his wife that were acquired after 2018.
Secondly, ED has named other accused also whose properties have been attached . Kejri simply forgets about them.
पापियों ने दिल्ली को बरबाद कर दिया।
ऐसी दुर्गति दिल्ली की कभी नहीं हुयी।अभी तो बरसात की शुरुआत है। बाद में क्या होगा सोचा जा सकता है ।
भ्रष्ट,कामचोर आपियों की सरकार को जनता की समस्या से कोई सरोकार नहीं।वह जानते हैं कि लालची लोग मुफ्त बिजली-पानी के चक्कर में उन्हें वोट देंगे ही ।
अभी थोड़ी सी बारिश हुई तो दिल्ली की सडकों पर पानी भर गया ।
अब आपिये चालू हो गये- यूपी देखो , गुरुग्राम देखो ।दिल्ली से भी बुरी हालत है।
अरे मूर्खों, कोई स्त्री क्या इसलिए अपने पति की हत्या कर देगी क्योंकि उसकी पड़ोसिनें विधवा हैं।
जनता जान गयी है कि तुम भ्रष्ट भी हो और नाकारा भी।
@s_afreen7 अगर तबरेज अंसारी किसी मुस्लिम देश में होता तो किसी को कोई सजा नहीं होती और अगर उसकी बीबी पैरवी करती तो उसे जरूर 100-200 कोड़ों की सजा दी जाती कि वह चोर की पैरवी कर रही है।
जो लोग 5 साल की बेटी से बलात्कार करनेवाले फहयान-घमड़ी को सजा नहीं दे पाते उनको कुछ कहने का हक है क्या ?
@AamAadmiParty अबे झूठों, अभी सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल को लताड़ क्यों पड़ी थी ? वहाँ तो तुमने कहा था कि सरकार के पास पैसे ही नहीं हैं । कोर्ट ने तीन साल का विज्ञापन खर्च मांग लिया तो अब पाठ पढ़ा रहे हो । दिल्ली की वो दुर्गति की है तुमने कि अब कोई भला आदमी वहाँ रहना नहीं चाहता ।
@s_afreen7 इसमें गलत क्या है?
हिन्दू नाम रखकर,रुद्राक्ष की माला पहनकर, तिलक लगाकर किसी हिन्दू लड़की को बरगलाना गलत नहीं है लेकिन इस बात को सब को बताना गलत है।
लड़की की हत्या गलत नहीं है पर हत्यारे का नाम, काम, कारण बताना गलत है।
वाह री मुल्ली !!
सबको बेवकूफ समझ रखा है क्या?
अब दिन लद गये।
जूते पड़े तो कलेक्शन तुरंत बढ़ गया ।अभी परसों ही तो Aam Aadmi Party ने उच्चतम न्यायालय में कहा था कि दिल्ली सरकार कंगाल है , उसके पास विकास योजनाओं के लिये धन नहीं है । तीन साल का विज्ञापन खर्च मांगते ही कलेक्शन ठीक हो गया।
सच है, लातों के भूत बातों से नहीं मानते।
@AamAadmiParty
मालिक अपने पशु से कितना भी दुर्व्यवहार करे पशु मालिक को छोड़कर नहीं जाता । शायद इसलिए कि वह बुद्धिहीन है।उसे और क़ोई रास्ता पता ही नहीं।
लेकिन जो मुस्लिम औरतें इस्लाम का गुणगान करते थकती नहीं उन्हें क्या कहूँ? इस्लाम में तो स्त्री का कोई दर्जा है ही नहीं।
@s_afreen7
@s_afreen7 तुझे पागल कुत्ते ने काटा है क्या ? FIR सज़ा होती है क्या ? अभी इस देश में इस्लामी कानून नहीं लगा है ।
वैसे सड़क पर नमाज़ क्यों पढ़ी जब इसकी मनाही है ?
बाप का राज समझ रखा है क्या?
France and India are getting ready to write a new, ambitious chapter of our outstanding strategic partnership.
Read my interview @timesofindia@sachinpTOI : https://t.co/b8nszFRABP
सारा विश्व वर्णाश्रम-व्यवस्था का पालन करता है।
कैसे ?
पढ़ने-लिखने , प्रशिक्षण में जीवन के पहले 25 वर्ष लग ही जाते हैं - ब्रह्मचर्य ।
फिर काम-धाम, नौकरी , विवाह, परिवार- गृहस्थ ।
अब बच्चों का विवाह, उनके जीवन को व्यवस्थित करने पर ध्यान - वाणप्रस्थ ।
कुछ बचा क्या ?
और बढ़ते बढ़ते बात यहाँ तक बढ़ गयी कि फ्रांस का सबसे बड़ा पुस्तकालय फूँक दिया गया। संसार का कोई भी सभ्य व्यक्ति पुस्तकों को नहीं जलाता। सभ्यता कोई भी हो, पुस्तकों को जलाया जाना सभ्य आचरण नहीं माना जाता। पर यह भी सत्य है कि हजारों वर्षों से पुस्तकालय जलाए जाते रहे हैं...
नालन्दा याद है? कहते हैं, वहाँ छह महीने तक किताबें जलती रही थीं। विश्व के सबसे बड़े विश्विद्यालय की उस भव्य लाइब्रेरी में संसार का समूचा ज्ञान एकत्र था। इतनी किताबें थीं कि एक व्यक्ति को सब पढ़ने के लिए असँख्य जन्म लेने पड़ते। फिर कहीं से एक असभ्य व्यक्ति अपने दो सौ लुटेरे साथियों के साथ आया और संसार में ज्ञान के सबसे बड़े भंडार को फूंक दिया।
बख्तियार खिलजी यहीं नहीं रुका! आगे बढ़ा और पहुँचा विक्रमशिला विश्वविद्यालय के प्रांगण में। वहाँ भी वही बर्बर व्यवहार! सभी शिक्षक और छात्र मार दिए गए, भवन को ध्वस्त कर दिया गया और फूंक दिया गया पुस्तकालय! ऐसा लगता था जैसे बख्तियार संसार के समस्त ज्ञान को फूंक देने ही निकला था।
तक्षशिला! 500 ई पूर्व में जब संसार मे कहीं भी चिकित्सा व्यवस्था नहीं थी, तब भी वहाँ आयुर्वेद की उच्च और व्यवस्थित पढ़ाई होती थी। संसार के उस पहले विश्वविद्यालय में ऐसे ही कुछ लुटेरे घुसे और सबकुछ फूँक दिया।
उदाहरण केवल इतने ही नहीं हैं। अजयमेरु का विश्व प्रसिद्ध महाविद्यालय, शारदा पीठ, वल्लभी विश्वविद्यालय आदि अनेक शिक्षा केन्द्र थे जिन्हें बर्बरों ने समाप्त कर दिया।
सोचिये तो, वे ऐसा क्यों कर रहे थे? किताबें किसी को क्या नुकसान पहुँचा सकती हैं? दरअसल हर अज्ञानी चाहता है कि संसार उसी की भांति हो जाय। वह ज्ञान को पनपने ही नहीं देना चाहता, बल्कि ज्ञान के हर मन्दिर को तोड़ देना चाहता है, फूंक देना चाहता है।
संसार के हर देश में ऐसे उदाहरण हैं जब सभ्य समाज द्वार बनाया गया विद्यालय और पुस्तकालय असभ्यों द्वारा फूँक दिए गए, तोड़ दिए गए। सभ्यता बर्बरों से हार जाती है।
बहुत लोग बार बार कहते हैं कि भारतीय बहुत ही वीर थे, पराक्रमी थे, सक्षम थे तो पराजित क्यों हो जाते थे? उनके मन्दिर क्यों टूट जाते थे, उनके विद्यालय क्यों जला दिए जाते थे? अब यही प्रश्न फ्रांस से पूछिए! वह आज के समय के सबसे शक्तिशाली देशों में से है। सबसे सम्पन्न, सभ्य, ताकतवर... फिर चार दिन पहले गिड़गिड़ा कर शरण मांगते घुसे कुछ लोग पूरे देश को परेशान कैसे कर रहे हैं? स्कूल कैसे तोड़ रहे हैं, पुस्तकालय कैसे फूंक रहे हैं?
उत्तर वही है, बर्बरता कभी कभी सभ्यता को पराजित कर देती है। सभ्य समाज अपने हर निर्णय को नैतिकता की तराजू पर तौल कर देखता है, वह बार बार सोचता है कि हमारे इस कदम का संसार पर, जीव जंतुओं पर, प्रकृति पर क्या असर पड़ेगा। जबकि असभ्यों के सामने नैतिकता का प्रश्न नहीं होता। उन्हें किसी के होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। वे कुछ भी कर देते हैं। और इसी के कारण वे जीत जाते हैं।
तो क्या इस बर्बर भीड़ को नहीं रोका जा सकता? क्या सभ्यता यूँ ही समाप्त हो जाएगी? नहीं! इन्हें रोका जा सकता है। बस सभ्य समाज अपनी सहिष्णुता त्यागे और बर्बरों के आतंक को बर्बरता से कुचल कर समाप्त कर दे... अन्यथा समाप्त...
फ्रांस यही करेगा। आज नहीं तो कुछ साल बाद!
#TheKeralaStory #FranceRiots
@preetiagr123 भाग लो इस पार्टी से । केजरीवाल किसी का सगा नहीं है और पक्का झूठा है। शीला दीक्षित के खिलाफ कोई कार्रवाई की ? लालू, शरद पवार के पीछे घूम रहा है। प्रशांत, कुमार विश्वास जैसे ईमानदारों को भगा दिया ।
स्वार्थ में सब कुछ न्योछावर करना हो तो कोई बात नहीं वरना भाग लो ।