@HemantSorenJMM माननीय मुख्यमंत्री जी राजधनवार विधान सभा क्षेत्र में बीजली की बहुत बड़ी समस्या है 24 घंटे में मुस्किल से 2 घंटे ही लोगों को बीजली मील पाती है कृप्या इस तरह पर ध्यान देने का कष्ट करेंगे
महेशपुर–गुम्मामोड़ मुख्य सड़क पर शिव मंदिर और पेट्रोल पंप के बीच स्थित जर्जर पुलिया हादसों को खुला निमंत्रण दे रही है। पुलिया टूट चुकी है, सरिया बाहर निकल आया है और सड़क के बीच गहरा गड्ढा बन चुका है,।
रोज़ाना सैकड़ों वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन न तो सुरक्षा के इंतज़ाम किए गए हैं, न चेतावनी बोर्ड लगाया गया है और न ही मरम्मत का कोई ठोस कदम उठाया गया है। कई लोग दुर्घटना का शिकार होते-होते बचे हैं,।
जनता के टैक्स से सड़कें बनती हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? यदि समय रहते पुलिया की मरम्मत नहीं हुई और कोई जान-माल का नुकसान हुआ, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
महेशपुर की जनता मांग करती है कि इस जर्जर पुलिया की तत्काल मरम्मत कर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाए।
@deepakbiruajmm@dcpakur
8 साल बाद भी नहीं मिला मुआवज़ा, आखिर जिम्मेदार कौन?
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पाकुड़ द्वारा 14-09-2018 को जारी पत्र में भूमि अधिग्रहण को लेकर गंभीर विसंगति स्वीकार की गई थी। दस्तावेज़ों में जहां केवल 10 डिसमिल भूमि अधिग्रहण का उल्लेख है, वहीं जांच रिपोर्ट में करीब 70 डिसमिल भूमि पर सड़क निर्माण के लिए कब्ज़ा किए जाने की बात सामने आई।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस मामले में न्याय और मुआवज़े की मांग को लेकर पाकुड़ उपायुक्त (DC) को 09.12.2025, 23.12.2025 और 19.06.2026 को तीन अलग-अलग आवेदन दिए गए, लेकिन इसके बावजूद आज तक प्रभावित रैयत को उसकी अधिग्रहित भूमि का उचित मुआवज़ा नहीं मिला।
आखिर कब तक पीड़ित परिवार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाता रहेगा?
जब विभागीय पत्र और जांच रिपोर्ट स्वयं गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहे हैं, तो कार्रवाई और भुगतान में इतनी देरी क्यों?
क्या आम नागरिक की आवाज़ सिर्फ आवेदन पत्रों तक ही सीमित रह जाएगी?
2018 में अनियमितता सामने आई, 2025-26 में तीन बार आवेदन दिया गया, लेकिन 2026 तक भी मुआवज़ा नहीं मिला।
यह मामला सिर्फ मुआवज़े का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों का भी है। संबंधित अधिकारियों को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर लंबित मुआवज़े का भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।
ज़मीन चली गई, सड़क बन गई, लेकिन हक़ का मुआवज़ा आज भी अधूरा है।
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अग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आज़ादी का पहला बिगुल फूंकने वाले अमर शहीद सिदो-कान्हू, चाँद-भैरव और वीरांगना फुलो-झानो को हूल दिवस पर शत्-शत् नमन।
जल, जंगल, ज़मीन की रक्षा के लिए उनके बलिदान और संघर्ष की गाथा सदैव हमें अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देती रहेगी।
हूल जोहार।
पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक एवं सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक को विधि-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता तथा आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में लापरवाही के कारण तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध करने का निर्णय मैंने लिया है।
चाईबासा के आयुक्त एवं रांची के ADG को क्षेत्र में लगातार कैंप कर स्थिति की प्रतिदिन समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, DIG जमशेदपुर में रहकर कानून-व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही या जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
Delighted to be part of the MAGIS Award Ceremony organized by the Ranchi Jesuit Society, where the hard work and achievements of young students were celebrated.
It was inspiring to witness the dedication of students, the commitment of teachers and the unwavering support of parents behind every success story. Such initiatives encourage countless young minds to dream bigger and strive higher.
Heartiest congratulations to all the awardees. Wishing each one of you continued success and a bright future ahead.
“भारतीय राष्ट्रवाद की भावना मांग करती है कि हम उन फिलिस्तीनी भाई-बहनों के लिए आवाज उठाएं जिनके बच्चे इतनी बेरहमी से निशाना बनाए गए हैं।” ... सोनिया गांधी
राज्य के लोकप्रिय माननीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी मामले में अभिलंब संज्ञान लेने की कृपा करें
15 साल के बच्चे का अपहरण, फिरौती के लिए दो दिनों तक यातनाएं, शरीर को सिगरेट से दागा गया
जब बच्चे स्कूल से घर लौटते समय भी सुरक्षित नहीं हैं, जब अपराधी अपहरण कर दो-दो दिन तक बंधक बनाकर यातनाएं दे सकते हैं, तब आम नागरिक किस भरोसे जीए?
समाज तब सुरक्षित माना जाता है जब सबसे कमजोर व्यक्ति भी खुद को सुरक्षित महसूस करे। यदि एक 15 वर्षीय छात्र को ऐसी बर्बरता झेलनी पड़े, तो यह केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का संकेत है।
.@dcjamtara उक्त मामले की जांच कर नौनिहालों मंजू और सुशील की शिक्षा हेतु हर जरूरी सहायता प्रदान कर सूचित करें।
साथ ही उनकी अभिभावक बालमुनि जी को भी हर जरूरी सरकारी योजनाओं से जोड़ने हेतु कार्रवाई कर सूचित करें।
आज स्मृति शेष बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी को माननीय राष्ट्रपति आदरणीय श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत किया जाना उनके आजीवन संघर्ष, त्याग, जनसेवा और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण को दिया गया सम्मान है। बाबा के संघर्ष की साथी, आदरणीय माँ ने यह सम्मान ग्रहण किया।
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन संघर्षों, मूल्यों और सपनों का सम्मान है, जिनके लिए विराट वृक्ष रूपी दिशोम गुरुजी जीवनभर अडिग होकर खड़े रहे। मैं स्मृति शेष दिशोम गुरुजी को यह सम्मान प्रदान किए जाने के लिए आदरणीय राष्ट्रपति जी एवं केंद्र सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।
जल, जंगल, जमीन, आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और झारखंड के हक-अधिकारों की लड़ाई में दिशोम गुरुजी का नेतृत्व ऐतिहासिक, अद्वितीय और अविस्मरणीय रहा है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वंचितों, शोषितों, आदिवासियों और मेहनतकश समाज के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित किया।
जहां एक ओर, दिशोम गुरुजी झारखण्ड अलग राज्य के निर्माण के संघर्ष के साथ-साथ, अखिल भारत के राज्यों के आदिवासी, दलित, शोषित, पीड़ित के संघर्ष के प्रेरणाश्रोत बनें; वहीं दूसरी ओर वे सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण, शिक्षा की अलख जगाने और समाज को संगठित करने के कार्य में भी सदैव नेतृत्वकर्ता रहे।
हम मानते हैं कि पुरस्कार/सम्मान का महत्व उस भावना में होता है जिसके साथ वह दिया जाता है। बाबा को किसी ने महाजनी व्यवस्था के खिलाफ लड़ने वाला योद्धा कहा, किसी ने आदिवासियों और गरीबों के अधिकारों का प्रहरी। लेकिन हमारे लिए वे ऐसे जननायक हैं जिन्होंने सत्ता से अधिक जनता के दिलों में अपनी जगह बनाई।
आज देश ने पद्म भूषण सम्मान से स्मृति शेष बाबा दिशोम गुरुजी के महान योगदान को नमन किया है, किंतु झारखंड सहित देशभर के करोड़ों लोगों के हृदय में बाबा को जो स्थान प्राप्त है, वह सदैव सर्वोच्च रहा है।
हमारे लिए दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी भारत के रत्न थे, हैं और सदैव रहेंगे।
स्मृति शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन अमर रहें!
जय झारखंड!
@rashtrapatibhvn
नवनियुक्त सभी अधिकारियों, चिकित्सकों और प्रबंधकों से कहना चाहूंगा कि वह यह याद रखें कि मिलने वाली तनख्वाह राज्य और देश के आम नागरिकों के पैसे से आती है। हम सभी जनता के कर्जदार हैं।
सरकार अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और भत्तों पर खर्च करती है जबकि विकास पर बजट का कम हिस्सा खर्च हो पाता है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि हम पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ जनता की सेवा करें। यदि हम अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करें, तो समाज और राज्य में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
झारखंड की जनता को आप सभी से बड़ी उम्मीदें हैं। सेवा ही आपका सबसे बड़ा धर्म और पहचान बने — यही शुभकामना है, जोहार।
झारखण्ड राज्य निर्माता शोशन जुल्म अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले योद्धा दिशोम गुरु बाबा शिबू सोरेन जी को पद्म भुषण सम्मान हम झारखण्डियों की गर्व की बात है
झारखंडवासियों के गौरव का पल!!
झारखंड की आत्मा और अनवरत संघर्ष के महाकाव्य,महाजनी प्रथा के खिलाफ विद्रोह से लेकर अलग राज्य के निर्माण तक का सफर,शांत सियासत, झारखंड की सबसे बुलंद आवाज,शोषितों के मसीहा,आदिवासियों की आवाज और झारखंड आंदोलन के महानायक आदरणीय बाबा को पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना हम सभी के लिए गर्व की बात है।
आदरणीय बाबा अमर रहें!
जय जोहार,
जय जय झारखंड!!
@HemantSorenJMM@PadmaAwards@JMMKalpanaSoren@JmmJharkhand
#publicaffairs
#PadmaAwards2026
दुनिया के सबसे अच्छे पापा हैं, जिन्होंने हर मोड़ पर दोस्त बनकर मेरा साथ दिया। ❤️�बिना कहे मेरी हर छोटी-बड़ी ख्वाहिश पूरी की और हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया।�आपका प्यार, भरोसा और साथ मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी ताकत है। Love you Papa! 👨👧✨
Happy father’s day papa 🧿❤️
पाकुड़िया प्रखंड के मोंगला बांध गांव में बारिश के बाद जलजमाव की समस्या ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। गांव की मुख्य सड़क और दुर्गा मंदिर के आसपास पानी भर जाने से लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक स्थायी समाधान देने में विफल नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नई पीसीसी सड़क बनने के बाद जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण बरसाती और गंदा पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। सवाल यह है कि जब विकास कार्य किए गए तो नालियों की योजना क्यों नहीं बनाई गई?
स्थिति इतनी खराब है कि मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। इससे न केवल दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। बदबू और गंदगी से आसपास के लोग परेशान हैं।
हर वर्ष बारिश के मौसम में यही समस्या सामने आती है, लेकिन प्रशासन केवल आश्वासन देता दिखाई देता है। यदि समय रहते नाली निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
ग्रामीणों की मांग बिल्कुल जायज है—या तो तत्काल नालियों का निर्माण कराया जाए या फिर सड़क के दोनों ओर ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे पानी का निकास हो सके। विकास केवल सड़क बनाने से नहीं, बल्कि लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने से साबित होता है।
@HemantSorenJMM@dcpakur@DipikaPS@JharkhandCMO