ये हैं देश के असली गद्दार, जिन्होंने अपने मतलब के लिए आपके बच्चों का भविष्य बर्बाद कर दिया…!
SBI चेयरमैन, CVC, CAG, RBI के डिप्टी गवर्नर, IOC चेयरमैन, सुप्रीम कोर्ट के जज…
सभी ऊंचे पदों पर रहे और देश की दौलत संभाली,
फिर रिटायरमेंट के बाद मुकेश अंबानी के साथ हो गए।
• अरुंधति भट्टाचार्य (SBI चेयरमैन) → 2017 में रिटायर → 2018 में RIL बोर्ड
• के.वी. चौधरी (CVC + CBDT) → जून 2019 में रिटायर → सिर्फ़ चार महीने बाद RIL के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर
• संजीव सिंह (IOC चेयरमैन) → 30 जून, 2020 को रिटायर → दो महीने में RIL ग्रुप प्रेसिडेंट
• राजीव महर्षि (CAG) → 2020 में रिटायर → 2023 में Jio Financial Board
• एम.के. जैन (RBI डिप्टी गवर्नर) → जून 2023 में रिटायर हो रहे हैं → मार्च 2025 में RIL एडवाइजर
दोस्तों, यह सिर्फ़ "अनुभव" नहीं है।
यह सिस्टम है।
जब वे ऑफिस में थे, तो उन्होंने अंबानी को फ़ायदा पहुँचाया।
ऑफिस छोड़ने के बाद, वे खुद अंबानी के साथ बैठे।
गोदावरी गैस चोरी का खुला आरोप:
रिलायंस ने ONGC के ब्लॉक से $1.55 बिलियन (लगभग Rs 13,000 करोड़) की गैस "माइग्रेट" की।
ए.पी. शाह कमेटी ने भी इसे माना।
दिल्ली हाई कोर्ट ने आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को खारिज कर दिया।
सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट से कहा, "यह चोरी है।"
फिर भी कोई FIR नहीं, कोई गिरफ़्तारी नहीं।
क्योंकि सिस्टम उनका है।
अनिल अंबानी का स्पेक्ट्रम गेम:
2G के ज़माने में स्पेक्ट्रम खरीदा, बैंकों से हज़ारों करोड़ निकाले,
फिर कंपनी को दिवालिया कर दिया। बैंकों का पैसा डूब गया, और स्पेक्ट्रम का क्या हुआ, पता नहीं।
अब मुकेश अंबानी की कंपनी उसी स्पेक्ट्रम और टावर पर कब्ज़ा कर रही है।
बैंकों से होने वाला मुनाफ़ा छिपा रहता है।
PSU बैंकों ने अंबानी ग्रुप को कितना लोन दिया, कितना NPA बना, कितना राइट ऑफ़ किया –
यह सब "कॉर्पोरेट कॉन्फिडेंशियलिटी" की आड़ में छिपा रहता है।
देश की गैस, देश का स्पेक्ट्रम, देश के बैंकों का पैसा...
सब अंबानी के पास जा रहा है।
और जो लोग उसे बचा रहे थे,
अब उसके बोर्ड में बैठकर मुनाफ़ा कमा रहे हैं।
यह "रिटायरमेंट के बाद की नौकरी" नहीं है।
यह एक रिवॉर्ड सिस्टम है।
देश के एसेट्स बचाने वालों को सज़ा मिलती है।
देश के एसेट्स बेचने वालों को अंबानी का बोर्ड सज़ा देता है।
अब समझ आया अंबानी इतने अमीर कैसे बने?
क्या देश के लोग देश बेचने वालों को सज़ा देंगे?
@RahulGandhi@PChidambaram_IN@INCIndia
🚨 BREAKING:
The International Court of Justice calls on Israel to return the occupied territories, including Jerusalem, and compensate the Palestinians.
दिल्ली में अभी बच्चों की लाशें निकाली जा रही हैं और ये महामानव गुजरात में खिलखिलाता हुआ मस्त रील बनवा रहा है.
क्योंकि ये 'नाराज़ फूफा' नहीं है...ये 'मस्त मामा' है...जो हमेशा अपनी मस्ती में रहेगा, चाहे 7 बच्चे मर जाएँ, चाहे 700 किसान मर जाएँ.
दिल्ली के हादसे पर इस महामानव ने एक ट्वीट तक नहीं किया है. लेकिन अगर दिल्ली के इन्हीं बच्चों के किसी कॉलेज में भाषण देना हो या फीता काटना हो तो दौड़कर चला आएगा...
मस्तराम मस्ती में...
याद रखा जाएगा ना???...
A 66-yr-old man from Bengal has spent nearly 3 months in holding centres & jail after police picked him up on 'Bangladeshi' charge. His name is on voter rolls since 1982. He cleared SIR in 2002 & 2026.
This is the story of Jalil Akhtar. @anindyahazra96
https://t.co/aaCrl6Z67j
Pimpri-Chinchwad, Maharashtra: The Municipal Corporation demolished the religious building ‘Jesus Is Lord Church’ at midnight, calling it illegal. Church members allege the action was carried out without notice despite a court stay order, just hours before the hearing.
भयावह हुआ!!
इंडियन एक्सप्रेस की ये रिपोर्ट बताती है कि यूपी में नोएडा के मजदूरों के साथ क्या हुआ!!
जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल युवाओं पर से केस खत्म कर दिए गए।
मगर नोएडा में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने गरीब गुरबा मजदूरों पर जबरदस्त क्रैकडाउन किया।
एक से बढ़कर एक गंभीर धाराओं में उन्हें बंद कर दिया गया।
जब ये मामले कोर्ट में पहुंचे तो योगी सरकार की कलई खुल गई।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि इन गरीब मजदूरों की 222 बेल एप्लीकेशन की सुनवाई के दौरान पुलिस की थ्योरी भर भराकर गिर पड़ी।
कोर्ट ने पाया कि पुलिस द्वारा दर्ज मामलों में तीन बड़ी खामियां हैं।
एक- सिर्फ घटनास्थल पर मौजूदगी अपराध में शामिल होने का आधार नहीं।
मतलब ये कि आपने राजा को खुश करने की खातिर जो भी मौके पर मिला, उसे गंभीर धाराओं में अंदर ठूंस दिया जो कोर्ट में टिक न सका।
दो- पुलिस के पास मजदूरों के खिलाफ स्पेसिफिक एविडेंस नहीं थे।
न वीडियो था, न फोरेंसिक प्रूफ था। महज भीड़ को आरोपित कर उन्हें पकड़ लिया गया और जेलों में ठूंस दिया गया।
तीन- आम मजदूरों और आयोजकों में कोई अंतर नहीं किया गया। उठा उठाकर जेलों में ठूंस दिया गया।
पुलिस की ये सारी थ्योरी कोर्ट में भरभराकर गिर गई,
मगर सोचिए, इस बीच उन गरीब गुरबा मजदूरों के साथ क्या हुआ?
लीगल फीस और जमानत के इंतजाम में किसी का घर बिक गया, किसी की जमीन जाती रही, कोई भारी कर्जे में डूब गया।
उनका अपराध सिर्फ इतना था कि वे 10x10 के कमरे में महज 10-12 हजार रुपया महीना में घुटती अपनी जिंदगी से निजात पाना चाहते थे।
2-4 हजार बढ़कर कमाना चाहते थे!!
मगर उन्हें ये मोहलत भी न मिली।
राजा को ये बर्दाश्त न हुआ कि उनके राज में कोई सत्ता का विरोध कर दे।
फिर क्या था, राजा को प्रसन्न करने के लिए पुलिस इन गरीब गुरबा मजदूरों पर टूट पड़ी!
मैं बार बार लिख रहा हूं, नियति इन सभी पापों का हिसाब करेगी।
सत्ता के तराजू में ज़मीर बेचने वालों को भला कब माफ करेगी!!
@narendramodi@myogiadityanath
सड़कों पर गड्ढे, सीवरेज और ड्रेनेज पर वीडियो बनाकर सरकार की पोल खोलोगे तो "आतंकवादी" घोषित करके गिरफ्तार कर लिया जाएगा!
संतोष पंडित की कहानी से सबक लेने का वक्त आ गया है दोस्तों!
Indian authorities have demolished a mosque in Saharanpur, Uttar Pradesh, following a court ruling. The case was filed by a member of a Hindu nationalist group.
Mosque authorities say the building dates back to 1911. Rights groups are questioning the legality of the decision.
"निचली सिविल कोर्ट का आदेश आया था। उसके बाद पूरी मस्जिद को सील कर दिया गया और आसपास बैरिकेडिंग लगा दी गई। इस बीच लोग अधिकारियों से बात करके इस मामले में कुछ समय की गुजारिश करना चाहते थे। लोग हाईकोर्ट जाना चाहते थे, लेकिन समय नहीं दिया गया और सहारनपुर जिले के सभी प्रमुख लोगों को हाउस अरेस्ट कर दिया गया। सुबह-सुबह मस्जिद को ढहा दिया गया। यह शर्मनाक है। यह इतना बड़ा गुनाह है कि उन्हें इसका अंजाम जरूर भुगतना होगा।"
-इकरा हसन, कैराना सांसद (समाजवादी पार्टी)
#SaharanpurMosque #IqraHasan #SamajwadiParty #HouseArrest #BulldozerAction #UPPolitics #TCNLive
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में 1911 में बनी मस्जिद को तोड़े जाने की खबर बेहद दुखद और शर्मनाक है।
नफरत और विभाजन की राजनीति से समाज मजबूत नहीं होता, बल्कि सामाजिक सौहार्द और भाईचारा कमजोर होता है।
कांग्रेस पार्टी स्पष्ट रूप से मानती है कि उत्तर प्रदेश में हर धर्म, हर समुदाय और हर नागरिक के साथ न्याय होना चाहिए।
भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि बुलडोज़र से धार्मिक इमारतें तोड़ी जा सकती हैं, लेकिन लोकतंत्र की आवाज़ और जनता के अधिकारों को नहीं दबाया जा सकता।
उत्तर प्रदेश भाईचारे, न्याय और सामाजिक सौहार्द की धरती है। इसे नफरत और विभाजन की राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जा सकता।
#Saharanpur #AjayRai #UttarPradesh #BulldozerPolitics #RuleOfLaw
3 days ago, ministry of external affairs, govt of India condemned the demolition of a century old temple in Pakistan.
And today, India has demolished a 116 year old mosque in Uttar Pradesh.
Mosque donated the land for Govt offices and same govt office declared mosque illegal.
1. ज़िला सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आएदिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर उनको ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है वह ठीक नहीं है तथा सरकार को ऐसे निगेटिव हालात से बचने के लिये इस पर तुरन्त रोक लगाकर इसके समाधान के अन्य उपाय ज़रूर करने चाहिये।
2. वैसे भी एक संवैधानिक सेक्युलर सरकार द्वारा सभी धर्मों के मानने वालों एवं उनके धार्मिक स्थलों आदि का एक समान आदर-सम्मान व उनकी सुरक्षा करने का उत्तरदायित्व बनता है। इस्लाम मज़हब में मस्जिदें हर दिन इबादत बल्कि दिन में कई बार जमात के साथ नमाज़ पढ़ने का मुख्य व अभिन्न अंग हैं, जिसको ध्यान में रखकर व भारतीय परम्परा के अनुसार सम्मान देना देश व व्यापक जनहित में ज़रूरी है।
3. इसके साथ ही, बिना नियम-क़ानून का समुचित अनुपालन किये हुये किसी भी अभियुक्त का मकान ध्वस्त करके उसके पूरे परिवार को सामूहिक तौर पर सज़ा देकर बेघर बार कर देने की कार्रवाईयों से भी लोग काफी विचलित हैं। ऐसे में बी.एस.पी सरकार की तरह का ’क़ानून द्वारा क़ानून का राज’ का व्यवहार ज़रूरी है।
4. अतः केवल सरकार ही नहीं बल्कि माननीय न्यायालय भी इस ओर समुचित ध्यान दें तो यह उचित होगा। लेकिन ऐसे हालात में सभी लोग सौहार्दपूर्ण वातावरण भी ज़रूर बना कर रखें, पार्टी की यह भी अपील है।
नमाज़ पढ़ना इतना बड़ा गुनाह हो गया ? अगर सर्किट हाउस परिसर में एक सड़क पर 3-4 मिनट नमाज़ पढ़ लिया तो FIR ?
अभी अभी सावन बीता है . हुड़दंग से लेकर मारपीट और हंगामा सब हमने देखा है . पुलिस वालों को औक़ात दिखाते कांवड़ियों को भी देखा है .
- Yaqoob khan and Walid khan construct a mosque in 1911.
- Later they donated a part of their land for construction of collectorate and Govt offices.
- Today, the same collectorate has demolished their 116 years old mosque by saying it's illegal despite stay orders from court.