Parody . This account is not affiliated with Lalu Prasad Yadav . लालुवाद के जनक , गरीब गुरबों के मसीहा के गईया भैंसिया चरते जाए मुनवां मुनियां पढ़ते जाए !
15 साल की बच्ची से माफी मंगवा कर जो फूले फूले फिर रहे हैं उन्हें पता होना चाहिये कि डरी वह बच्ची नहीं है, उसके मां बाप हैं, जिन्हें शाखा श्रृगालों ने धमकाया है ।
भारत के हिन्दु और मुसलमान बिलकुल एक जैसे हैं
इनके घर एक जैसे हैं एक जैसे कमरे एक जैसे आंगन
इनका खाना एक जैसा है वही रोटी वही सब्ज़ी वही बिरयानी वही सिवैयां
इनकी शादियों के तरीके एक जैसे हैं
वही मेहंदी, वही बरात, वही बिदाई, वही ढोलक वही नाच
इनकी बोली एक जैसी है
इनके काम धंधे एक जैसे हैं
इनके सरनेम एक जैसे हैं
हिन्दू और मुसलमान दोनों अपने नाम के साथ त्यागी चौहान मलिक पटेल पाटिल सरनेम लगाते हैं
फर्क क्या है
इन दोनों को जन्म से ही माँ बाप की तरफ से ऊपर वाले के बारे में कल्पना अलग अलग पकड़ाई गई है
बस इतने से फ़र्क से क्या इनके बीच में इतनी दुश्मनी हो सकती है कि हम एक दुसरे की बर्बादी को अपनी राजनीति का आधार बना लें
हिन्दुओं और मुसलमानों का इतिहास भूगोल एक है
इनकी समस्याएं इनकी तकलीफें एक हैं
इन समस्याओं के समाधान भी एक हैं
असल में जो इन दोनों की समस्याओं की वजह से मजे लूट रहे हैं
वो लोग क्यों चाहेंगे कि ये दोनों मिलकर समस्याओं के आधार पर अपनी राजनीति करें
इसलिए हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच की सैंकड़ों समानताओं को छिपा कर सिर्फ एकमात्र फ़र्क ऊपर वाले की कल्पना को बीच में लाकर उसे झगड़े की नकली वजह बना कर उसे पूरे मुल्क की राजनीति को चलाने का आधार बनाया गया है
और हम बेवकूफ लोग इन शातिर लोगों की झूठी बातों में फंस जाते हैं और अपनी जिन्दगी की समस्याओं के समाधान से वंचित रहते हैं
और अपने बच्चों को भी इन समस्याओं को विरासत में दे जाते हैं
अगर हम ज़रा सी भी समझ इस्तेमाल करें तो इन नफरत की राजनीति करने वालों से छुटकारा पा सकते हैं
अपने इतिहास को देखो अपने वर्तमान को देखो अपने भविष्य का सोचो फिर फैसला करो
नफरत छोड़ो और ज़िन्दगी के हालात बदलो
बिल्कुल। सड़कें चलने के लिए होती हैं। सड़कें गड्ढों, जलभराव में गिरकर, डूबकर मरने के लिए नहीं हैं योगी जी।
लेकिन, 4 अगस्त से आपकी सड़कें सिर्फ कांवड़ियों के चलने के लिए होंगी। यही एकतरफा नियम कानून बनाया है आपकी सांप्रदायिक सत्ता ने।
पहले सावन, फिर जन्माष्टमी, फिर नवरात्रि–यानी अक्टूबर तक सड़कों को रोककर बहुसंख्यक भीड़ राज करेगी।
ये कौन कांवड़िए हैं? ये वे युवा हैं, जिनके दिमाग में नफ़रत और बहुसंख्यकवाद का ज़हर भरा गया है।
यही मस्जिदों के आगे नाचते हैं। बजरंग दल और गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी कर अपना ही नहीं, अपने परिवार का भी पेट भरते हैं। बीजेपी इनकी बाप है।
इनके पास रोज़गार नहीं, लेकिन ये वोट लूटने से लेकर जंतर–मंतर पर सत्ता के खिलाफ हर आवाज़ को दबाने की सुपारी लेते हैं।
आप जंतर–मंतर पर अपराधी गिनते हैं? इन कांवड़ियों को हर साल की तरह पीटते, गाड़ियां जलाते, पत्थर फेंकते देखिए।
चंदे के नाम पर इनकी लूट और रंगदारी का अंदाज़ देखिए।
ट्रेनों में बिना टिकट सीट कब्जाते देखिए। भारत के किसी धर्म में सड़क इबादत की जगह नहीं है। हर मज़हब के अपने अलग इबादतगाह हैं।
भारत में सड़क के हर कोने पर एक मंदिर है।
आज अयोध्या में चंदा चोरी लोगों को समझा रही है इसका मतलब।
भारत दुनिया का इकलौता देश होगा, जहां सत्ता बलात्कार समर्थकों की है।
लेकिन, भाजपिल्लों को नेता हत्यारा, बलात्कारी चलेगा, पर विरोध करने वाले जेन ज़ी जरूर संस्कारी चाहिए।
यही हमारी शिक्षा है, क्योंकि हम अन सिविलाइज्ड देश हैं।
तुम कितने जोशी ढूंढोगे ?
हर कदम पे जोशी बैठा है।
नए सिक्सा मंत्री जी ने कार्यभार संभाला और तुरंत कार्य को आगे बढ़ाया ...
गुजरात BAMS पेपर लीक का समाचार है जिसमें 15 में से 11 प्रश्न उपलब्ध है लेकिन
टीवी रोड की हवेलियों से खबर है कि
गुजरात BAMS पेपर लीक की आशंका
पहवा जी
उत्तराखंड में 16 करोड़ रुपए का पुल 16 दिन भी नहीं चला !!
देहरादून में 12 जुलाई से इस नए पुल पर ट्रैफिक शुरू हुआ था और कल रात बारिश में सड़क धंस गई।
यह रास्ता हिमाचल में पांवटा साहिब को जाता है।
यही है बीजेपी की डबल इंजन दलाली वाली धामी सत्ता।
बीजेपी ने देवभूमि को भ्रष्टाचार भूमि बना दिया।
जनता की जान दाँव पर लगा दिया है मोदी…
हर तरफ भ्रष्टाचार और मौत दिखाई दे रही है…
भाजपा ठंडा करके खाएगी।
इनको तो बाद में देखेंगे
एक बार मामला ठंडा होने दो।
भाजपा किसी के आगे नहीं झुकती।
इस तरह की बाकलोली मत करो भाई... ये बच्चे अपने बाप की नहीं सुनते..
तुम्हे क्यों लगता है कि इन्होंने ओपोजिशन की सुनी होगी..
भाई इनसे मत उलझो..
ये देश का भविष्य हैं।
और भूत कभी भविष्य से जीता नहीं है।
मोदी, आडवाणी, अटल, प्रमोद महाजन, जार्ज फर्नांडिस, ललूर, मुलायम जिस जेपी आंदोलन से निकले थे। वो भी युवाओं का था.. इसमें कुछ नया नहीं है।
कालचक्र के हर काल खंड में युवाओं ने देश की राजनीति की दिशा बदली है।
कल इंडिया इज इंदिरा एंड इंदिरा इज इंडिया के खिलाफ खड़े थे..
ये इमरजेंसी में जेल जाने से नहीं डरे
आपको क्यों लगता है आज का युवा डर जाएगा
वक्त की नजाकत को समझो ब्रो..
नोट: कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा है कि अगर प्रोटेस्ट करने वाले किसी भी बंदे/बंदी पर लीगल कार्यवाही हुई तो दोबारा अनशन करेंगे ।
हल्के में मत लेना.. पुराने हथकंडे नई पीढ़ी पर नहीं चलेंगे। जितना जल्दी समझे जाओ। उतना अच्छा है ब्रो..
मामला बिगड़ते देर नहीं लगेगी।
Lakshmi Pratap Singh
जब पूरा देश केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े का जश्न मना रहा है, उसी समय पश्चिम बंगाल में एक बिल्कुल अलग कहानी सामने आ रही है।
आरोप है कि आंदोलन में शामिल लोगों में से मुसलमानों को चुन-चुनकर आपराधिक मामलों में फँसाया जा रहा है।
यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने अपने संवैधानिक पद से बोलते हुए पूरे आंदोलन को "शुक्रवार वाले लोगों" का काम बताया।
आज यह भी खबर है कि गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों को धर्मतला लाया गया और उनसे नंगे पाँव चलवाया गया।
धर्मेंद्र प्रधान कभी खुद प्रश्नपत्र लीक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए पुलिस के डंडे की मार से घायल हुए थे।
आज एक और प्रश्नपत्र लीक को लेकर उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया।
धर्मेंद्र प्रधान 1997 में स्वर्गीय जेबी पटनायक की सरकार में ओडिशा में हुए एक प्रश्नपत्र लीक के ख़िलाफ़ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ओर से राज्य सचिवालय के सामने किए गए एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस की लाठी की मार से घायल हुए थे।
प्रधान इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। तस्वीर 1996 में राउरकेला के एक छात्र मंच की है।
इस घटना के 29 साल बाद 20 जुलाई, 2026 को प्रधान के इस्तीफ़े की मांग पर संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस लाठीचार्ज में कई प्रदर्शनकारी घायल होकर अस्पताल में भर्ती हुए।
प्रधान ने अपने अतीत से कोई सबक नहीं लिया।
आज वे बदनाम होकर हाशिए पर धकेल दिए गए।
Soumitra roy
Breaking News | केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ दिया है. बता दें कि सरकार की ओर से जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह सोनम वांगचुक से बात करने मेदांता हॉस्पिटल पहुँचे थे.
क्या डील हुई है, वांगचुक साहब ?
यह वक़्त किसी नेता पर नहीं, Gen Z पर फ़िदा होने का है.
उन्होंने अपना सारा creative fertile माइंड इस आंदोलन में लगा दिया है.
सरकार डाल डाल तो ये पात पात
बिहार में वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया तो युवा झूम झूम के नहाने लगे, बैरिकेड्स लगाए तो वे उठाकर ही भाग गए.
पुलिस के डंडों से भागते भागते थक गए तो नया तरीका सोचा, पुलिस आए तो तिरंगा लेकर जन गण मन गाना शुरू कर दो, पुलिस सावधान की मुद्रा में.
आपने क्लासरूम और जॉब्स ख़त्म करके सोचा ये भेड़ बन जाएँगे, उल्टे मानसिक ग़ुलामी की बंदिशें टूटीं तो ये और भी ज़्यादा innovative हो गए, नवाचारी हो गए. यह इंटरनेट पर बड़ी हुई पीढी है , इनके meems बड़े बड़े दिमागों को भी चकरा देते हैं, तकनीकी रूप से स्मार्ट हैं , वह तो घुट्टी में मिली है, और अपना अधिकार जानते हैं .
अपनी पिछली पीढ़ियों की रूढ़ियों को भी पूरी तरह उतार फेंके तो और भी अच्छा.
दिल्ली, पटना, बंगाल, चंडीगढ़, नागपुर आंदोलन जंगल की आग की तरह फैल रहा है, फ़र्क़ नही पड़ता चिंगारी किसने और क्यों लगाई और घी किसने और कब डाला. यह पूरी तरह Gen Z का अंदोलन है.
उम्मीद यही कर सकते हैं कि इस आंदोलन की लीडरशिप भी यहीं से निकल कर आएगी जो आगे की दिशा दे सके.
बच्चों के ऊपर लाठी चार्ज होने के कारण राखी सावंत रो रो कर निंदा करते वीडियो पोस्ट कर रही हैं, उर्फ़ी जावेद वीडियो पोस्ट करके निंदा कर रही है , जानी लीवर तक आलोचना कर रहे हैं...
नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, रितेश देशमुख, जेनेलिया डिसूजा, हुमा कुरैशी, सोनाक्षी सिन्हा, रेवती, टोविनो थॉमस, ईशान खट्टर, सान्या मल्होत्रा, फातिमा सना शेख, अली फ़ज़ल और राजकुमार राव जैसे अभिनेताओं और अभिनेत्रियों तक ने निंदा की... यहां तक कि , विशाल ददलानी, आरजे नावेद तक ने निंदा की…..
कोई नहीं बोला तो एक खिलाड़ी, एक सिंघम , 4 ख़ान और एक…… सदी का महा-नालायक।
प्रयागराज के साथी ध्यान दें–
ये दसवीं का स्टूडेंट 16 साल का राज अपने घर से भागकर जंतर–मंतर पहुंचा है। इसके माता–पिता/परिवार से संपर्क करने का कष्ट करें।
तृणमूल सांसद मित्र साकेत गोखले ने दिल्ली में निहत्थे, बेकसूर युवाओं पर हुए लाठीचार्ज, पैलेट गन और स्टन गन के इस्तेमाल के विरोध में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग को चिट्ठी लिखी है।
अब आयोग अगर चाहे तो मोदी सत्ता से जवाब मांग सकता है। मोदी सत्ता बेशक जवाब न दे, लेकिन संयुक्त राष्ट्र इसे गुनाह मानेगा।
मोदी और शाह दोनों पर मानवाधिकार कानून के हनन का आरोप है।
इस दाग के साथ मोदी के लिए किसी भी देश में झोला उठाकर भागना मुमकिन नहीं होगा।
उनकी हालत फादरलैंड के पीएम नेतन्याहू जैसी हो चुकी है।
पत्रकार तनुश्री पाण्डेय बता रही हैं कि मोदी सत्ता अब जंतर–मंतर को CRPF के हवाले करने जा रही है।
सीआरपीएफ आतंकवादियों से लड़ती है। इसका मतलब यह है कि मोदी सत्ता ने पेपर लीक का विरोध कर रहे जेन ज़ी बच्चों को आतंकवादी मान लिया है..????
सभी आरएसएस/बीजेपी के चोर गैंग की यही राय है।
यानी, जेन ज़ी पर अब लाठियां नहीं, गोली चल सकती है।
जंतर–मंतर को तियानमेन चौराहा बनाने के पीछे मोदी सत्ता की साजिश यही है कि विरोध के सुर बंद हो जाएं और वह सत्ता में बनी रहे।
भारत के जेन ज़ीको किसी तरह बदनाम किया जा सके।
आरएसएस/बीजेपी सत्ता को जड़ से उखाड़ने की जरूरत है।
बच्चों, डरना नहीं। डटे रहना। पूरा देश, पूरी दुनिया आपके साथ है।
बिना हिंसा के, बिना किसी पर हाथ उठाए। शांति से।
Soumitra
यह मैसेज अभिनव पाण्डेय ने शेयर किया है।
दिल्ली पुलिस के जवान को बच्चों पर लाठी भांजने पर शर्म आ रही है। पता नहीं, और कितनों को आ रही है।
लाठी एक सत्ता है। वर्दी ताकत। जब क्रिमिनल सत्ता पुलिस के हाथ लाठी सौंपती है तो वह उसे सत्ता और ताकत दोनों देती है।
इसकी हनक पुलिस को अपराधियों पर आजमानी चाहिए, न कि कमजोरों पर। हालांकि, वर्दी की इस शपथ को पुलिस भूल चुकी है।
क्योंकि, आज की मोदी सत्ता गुनहगारों को कपड़ों से पहचानती है। फिर पुलिस से कहा जाता है–मारो, घसीटो, पटको, मार भगाओ। ये सत्ता का डर है।
आज दिल्ली पुलिस का यह जवान भले शर्मसार हो, लेकिन सत्ता शीर्ष पर बैठे आदेश देने वाले हुक्मरानों को बार–बार नंगे होने की आदत हो चुकी है।
इसलिए शर्मसार होने की नहीं, संजीदा होने की ज़रूरत है।
आखिर, घर लौटकर अपने बीवी–बच्चों से आंख भी मिलाना है।