वनस्पति मारे मति!
अपने मन के रंग का चश्मा लगाकर नहीं आए होते तो शायद अपने चिराग़ तले का काला अंधेरा देख पाते। लोग पूछ रहे हैं इतनी बार जाते क्यों थे क्या इनको भी लगता है कि ये स्पष्टीकरण ‘उल्लेखनीय’ नहीं है। बात न भटकाएं, मुद्दे पर रहें। हिसाब तो देना ही पड़ेगा, यहाँ का भी और अपने वहाँ का भी। बात निकली है तो दूर तलक जाएगी… अभी तो इसमें दीये, तेल, बाती के हिसाब-किताब की बात भी आएगी।
शिक्षा अच्छी होगी,
परीक्षा सच्ची होगी,
तो तरक़्की पक्की होगी।
शिक्षा की वजह से हिंदुस्तानियत व इंसानियत ख़तरे में है।
हम सकारात्मक शिक्षा लाएंगे और ‘बंधु राष्ट्र’ बनाएंगे।
‘शिक्षा-परीक्षा व्यवस्था’ का कायाकल्प युवाओं का भविष्य बचाएगा, देश का भविष्य बनाएगा।
#VISION_INDIA_PDA_SUMMIT_PRAYAGRAJ
महापापी भाजपा से पल्ला छुड़ाने के लिए भाजपाई जन प्रतिनिधि तरह-तरह के तरीक़े अपना रहे हैं। वो समझ गये हैं कि भाजपा की डूबती नाव से जितनी जल्दी उतर लो उतना ही अच्छा है।
समाचार: आगरा में भाजपा पार्षद ने नाले की दुर्गति के विरोध में अपनी सरकार के ही ख़िलाफ़ मोर्चा खोला और विरोध स्वरूप अपने जन्मदिन का केक नाले में काटा।
हमने तो पहले ही कहा था कि CCTV का नाम ‘चढ़ावा-चोरी TV’ साबित होगा। जिन लोगों ने ‘सत्रह’ बार लूटा वो सैंकड़ों साल से इतिहास में बदनाम हैं, जिन्होंने केवल 40 दिन में ‘सत्तर’ बार लूटा वो तो इतिहास में इस महापाप के लिए ‘सात’ जन्मों के लिए काले अक्षरों में दर्ज़ हो जाएंगे। ये सोचा जाए जिन्होंने सात हफ़्ते में इतनी चोरी कर ली है, उन्होंने पिछले इतने सालों में कितना चुराया होगा, कितना आपस में बाँटा होगा, कितना चुपके से छुपाया-दबाया होगा और कितना अपने मुखिया तक पहुँचाया होगा।
अखंड निंदनीय!
भाजपा का लंकाकांड, अयोध्या में ही होगा।
आख़िर ‘दानभक्तों’ का मुखौटा उतर ही गया क्योंकि प्रभु की अलौकिक शक्ति ने अपना चमत्कार दिखा ही दिया। अब भाजपाइयों के अहंकार की चमचमाती लंका के साम्राज्य का भी अंत होगा और ‘लंकाधिपति’ का भी।
भाजपा के लिए तो अमृतकाल काल बनकर आया है।
ये सरकार तो कहती थी कि इसके राज में इस्तीफ़े नहीं होते हैं। ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’ से आहत जनता कटाक्ष करते हुए कह रही है कि भाजपाई कह रहे हैं कि हमने कहा था कि ‘इस्तीफ़ा’ नहीं होता, हमने इस्तीफ़ा नहीं ‘त्यागपत्र’ दिया है।
दरअसल अभी तो ‘भाजपाई और उनके संगी-साथियों’ के काले कारनामों, करतूतों और कारगुज़ारियों का ये प्रथम अध्याय खुला है। बँटवारे की इस लड़ाई में अब इनकी ‘पार्टी, संघ, सभा, परिषद, वाहिनी और ट्रस्ट की टोली’ एक-दूसरे की पोल खोलेगी, इससे पहले कि ये लोग चोरी के माल से भरा अपना ‘झोला-बोरा’ लेकर इधर-उधर भागें, बार्डर बंद कर दिये जाएं। अभी तो शुरुआत है, अब तो केयर फ़ंड के साथ-साथ अनरजिस्टर्ड लोगों को अपने कुकृत्यों का हिसाब भी देना होगा।
भगवान के ऑडिट से ‘भाजपाई-गिरोह’ बच नहीं पाएगा।
NEET के छात्र कह रहे हैं कि जब इस्तीफ़े शुरू हो गए हैं तो ‘लीकाधिपति’ का भी करवा दीजिए।
#भाजपा_अयोध्या_महापाप
#NEET
#NEET_Reexam
#NEET_लीकाधिपति
उप्र भाजपा सरकार द्वारा एक तरफ़ झूठी तारीफ़ के प्रायोजित कार्यक्रम लगातार करवाये जा रहे हैं तो दूसरी तरफ़ माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार ने ये कहकर रंग मे भंग कर दिया कि ‘कार्यकाल ख़त्म होने के बावजूद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का यूपी सरकार का फ़ैसला असंवैधानिक है’। जनता पूछ रही है कि ‘असंवैधानिक’ काम करने की सज़ा क्या होती है?’
अब यही ग्राम प्रधान भाजपाइयों को इसलिए गाँवों में घुसने नहीं देंगे क्योंकि भाजपा सरकार द्वारा उन्हें प्रशासक बनाने के आदेश ने, उनमें कुछ नये काम करने की उम्मीद जगाई थी, जिसका वादा वो जनता से कर चुके थे, अब जनता तो तकनीकी पक्ष समझती नहीं है कि क्या हुआ, वो तो यही मानेगी कि प्रधान जी ने अपना वादा पूरा नहीं किया और सारा फ़ंड-बजट-पैसा डबल इंजन के साथ मिल-बाँटकर खा गये। प्रधानों में इस बात का भी डर है कि कहीं ‘इन बीच के दिनों’ के ख़र्चे का ख़ामियाज़ा उनको अपनी जेब से न भरना पड़े। हो सकता है कल को ‘पैसा वापसी’ का आदेश भी आ जाए। जब कार्यकाल गलत साबित हो गया है, तो उस समय में खर्च हुआ पैसा भी तो क़ानूनी रूप से गलत माना जाएगा। भाजपा ने प्रधानों को बहुत बुरा फँसा दिया है। वहीं प्रधानों ने जिन ठेकेदारों को काम दिया था, वो भी ‘इन बीच के दिनों’ के बिलों का भुगतान करवाने के लिए प्रधानों का दरवाज़ा खटखटाएँगे। इसीलिए प्रधान अब भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की गाँव-गाँव में नाकाबंदी कर देंगे।
भाजपा बनने चली थी सयानी
निपट गई उसकी ही कहानी।
भाजपा किसी घाट की नहीं रही।
विशेष: पंचायती राज मंत्री तो घर से ही नहीं निकल पाएंगे, गाँव पहुँचना तो दूर की बात है।
भाजपा राज में नाइंसाफ़ी की दिखेगी ये झांकी
फुनगी को फाँसी, शाखाओं को मिलेगी माफ़ी!
जनता कह रही है कि पहले SIT के बहाने सारे सबूत साफ़ कर दिये गये होंगे और ये निश्चित कर लिया गया होगा कि किन बड़ी मछलियों को बचाना है और किसको फँसाना है, उसके बाद FIR हो रही है।
लगता है SIT को पहले रिपोर्ट बनाकर दे दी गई होगी और उसके हिसाब से जाँच की गई होगी मतलब निष्कर्ष पहले निकाल लिया गया होगा।
राम मंदिर में करोड़ों हिंदुओं की आस्था है। उसी राम मंदिर से करोड़ों रुपये के चंदे की चोरी हो गई, लेकिन एक भी FIR दर्ज नहीं हुई।
सरकार किसे बचा रही है? इस पाप में शामिल लोग कितने भी बड़े क्यों न हों, उन्हें सीधे जेल में डालो। करोड़ों लोगों की आस्था की रक्षा ज़रूरी है।
भाजपा राज में क्लॉक टावर की सुई इसलिए गायब कर दी गई, जिससे कि बंद पड़ी, ठहरी हुई मिल की ओर लोगों का ध्यान न जाए। लाल इमली कभी कानपुर की ही नहीं देश की शान हुआ करती थी, अब वहाँ से मशीनों की नहीं बल्कि वहाँ के मज़दूरों के कराहने की वीरानी आवाज़ आती है।
भाजपा जाए तो बदलाव आए!
आज के भाषण में बयान कम, धमकी अधिक क्यों थी?
आज का कार्यक्रम अचानक बना था या जिस दिन SIT बनी थी, उस दिन?
सूत्र ये क्यों कह रहे हैं कि स्थानीय भाजपाई विधायकों और पदाधिकारियों के कहने पर ये कार्यक्रम अचानक तय किया गया, जिससे कि भाजपा की राजनीति ज़मीन बचाई जा सके नहीं तो अयोध्या मंडल ही नहीं, पूरे उप्र में भाजपा का सूपड़ा साफ़ होना तय है।
भौतिक रूप से भ्रमण कर, उस SIT के काम को प्रभावित करने की कोशिश न की जाए, जो पहले से ही विवादास्पद सदस्यों और कलंकित छवि के कारण शंकाओं के घेरे में है।
आज वहाँ चेहरा उतरा हुआ क्यों था?
आवाज़ को तो जानबूझकर ऊँची करने का प्रयास पूरा था लेकिन आत्मविश्वास शून्य क्यों था?
इस बार अपने ख़ास लोगों से मिले क्यों नहीं?
जनता कह रही है ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ नहीं ‘सोने का सोना, चाँदी की चाँदी’ करें। चढ़ाए गये पैसों, अनमोल शिलाओं के अलावा बहुमूल्य धातुओं और जेवरों का भी हिसाब देना ही पड़ेगा।
भास्कर ने तो सूरज ही डूबो दिया।
भाजपा तो अपनी सहयोगी पार्टियों का ही काला चिट्ठा खुलवा रही है क्योंकि भाजपा को इन दलों के नेताओं से नहीं, उनसे जुड़े जो भी दो-चार हज़ार वोट हैं, बस उनसे मतलब है। जब ये तीनों बदनाम हो जाएंगे तो भाजपा, इनसे जुड़े समाजों से कहेगी कि देखो तुम्हारे नेता कितने भ्रष्ट हैं, ये तुम्हारा ख़्याल नहीं रखेंगे, इसलिए तुम इन्हें नहीं, सीधे हमें वोट दो। सच तो ये है कि भाजपा भी ग़लतफ़हमी में है क्योंकि अब ‘पीडीए समाज’ एकमुश्त रूप से पीडीए की जीत के लिए हमें ही वोट देगा।
भाजपा ने आज फिर साबित कर दिया है कि वो किसी की सगी नहीं है।
जो करते हैं अपने कबीले से दगा
उनका भला और कौन होगा सगा
तीनों की राजनीति ख़त्म, भविष्य भस्म!
’सुनिए भाजपाई महापाप लोकगाथा’
भाजपाई भ्रष्टाचार के कारण आज देश का ये दुर्भाग्य है कि जहाँ भगवान का ‘स्तुति-गान’ गाँव-गाँव में गूँजता था; आज वहीं भगवान को धोखा देनेवालों की ‘निंदा गाथा’ गाई जा रही है।