बुलन्दशहर: एयरफोर्स जवान और उसके अध्यापक पिता के साथ मारपीट
कार का हॉर्न बजाने को लेकर हुई जमकर मारपीट
बीच बाजार मारपीट का लाइव वीडियो हुआ वायरल। @BULANDSHAHR
मेरठ के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय!
PM @narendramodi
जी मेरठ को देश की पहली 'नमो भारत' RRTS, भारत की सबसे तेज़ 'मेरठ मेट्रो' की सौगात समर्पित कर रहे हैं,अब दिल्ली से मेरठ का सफर मिनटों में तय होगा। यह सिर्फ ट्रेन नहीं,प्रगति की नई रफ़्तार
@BULANDSHAHR का नंबर अगला ?
Sitamarhi: सीतामढ़ी के डीएम रिची पांडेय और एसपी मनोज कुमार तिवारी ने जिला स्थापना दिवस पर दोनों ने फिल्म 'बॉर्डर' का देशभक्ति गीत गाकर लोगों को भावुक कर दिया
@yrf BORDER @SitamarhiDM @SSPSITAMARHI
बाप-भाइयों को मारकर सत्ता हथियाने का चलन सदियों से है। जैसे 17वीं सदी में औरंगज़ेब ने अपने बाप शाहजहां की क़ब्र खोदी। फिर एक-एक कर अपने विरोधी भाइयों को दीवारों में चुनवा दिया।
1947 में देश आज़ाद हुआ। लोकतंत्र स्थापित हुआ। बावजूद इसके सत्ता हथियाने का खेल चलता रहा। कभी पार्टी के बाहर से, कभी पार्टी के अंदर।
1955 के बाद इंदिरा गांधी नये तेवर के साथ मैदान में उतरीं। पति फ़िरोज़ के साथ उनके मतभेद बढ़ते चले गए। पारिवारिक अलगाव सघन हो गया। वो पिता जवाहरलाल नेहरू के ज़्यादा क़रीब हो गईं।
1955 में इंदिरा कांग्रेस वर्किंग कमेटी और केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य बनीं। 1958 में कांग्रेस संसदीय बोर्ड की सदस्य नियुक्त हुईं। फिर 1959 में पूरा संगठन उनके हाथ में आ गया।
पार्टी में इंदिरा का एकतरफ़ा दबदबा था। सरकार में भी उनकी ज़बरदस्त दख़ल थी। नेहरू तक पहुंचने वाली कोई भी फाइल इंदिरा से होकर ही गुज़रती थी। इंदिरा की वजह से ही नेहरू को चीन से दुश्मनी मोल लेनी पड़ी।
वामपंथी नेहरू चीन के दीवाने थे। चीन के साथ दोस्ती के कसीदे पढ़ा करते थे। नेहरू ने ही चीन को UNOमें ‘वीटो पावर’ दिलाने में अहम भूमिका निभाई। जब अमेरिका ने भारत को वीटो पावर दिलाने की बात की, तो ‘गुट-निरपेक्षता’ का हवाला देकर अपने पैर पीछे खींच लिए और चीन का नाम आगे कर दिया। संबंधों में गर्माहट के लिए नेहरू ने ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का नारा दिया। ‘पंचशील’ का नाकाम समझौता किया।
लेकिन इंदिरा के एक दांव से नेहरू के किए-कराए पर पानी फिर गया। चीन जिगरी दोस्त से जानी दुश्मन बन गया। इसकी बड़ी वजह बना दलाई लामा का भारत आना।
1959 में इंदिरा कांग्रेस अध्यक्ष बनीं और 1959 में ही दलाई लामा जान बचाकर चीन से भारत आ गए। इस फ़ैसले के चलते भारत को चीन की दुश्मनी मोल लेनी पड़ी। इसके बाद 1962 में शर्मनाक हार झेलने पड़ी। युद्ध के बाद भारत को तिब्बत के बराबर ज़मीन गंवानी पड़ गई।
नेहरू दलाई लामा और बौद्ध भिक्षुओं को शरण देने से हिचकिचा रहे थे। नेहरू पर चीन का वैचारिक दबाव था। लेकिन बेटी के दबाव के आगे पिता को झुकना पड़ा। यही नहीं इंदिरा ने तिब्बती शरणार्थियों की मदद के लिए ‘सेंट्रल रिलीफ़ कमेटी’ भी बनाई। ताकि बौद्ध भिक्षुओं को कोई दिक्कत न हो। यही बौद्ध भिक्षु चीन विरोधी बयानों से आग में घी का काम करते रहे।
चीन से मिली शर्मनाक हार के बाद नेहरू टूट गए। वो बीमार रहने लगे। 27 मई 1964 को उनका निधन हो गया। इंदिरा ने जो नेहरू के साथ किया, आगे चलकर संजय गांधी ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया। इमरजेंसी की आड़ में पूरे देश को अंधकार में झोंक दिया।
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देश के उपराष्ट्रपति साहब को सुनिए... समझ नहीं आ रहा है कि धनखड़ साहब पीएम मोदी को जबरदस्त आईना दिखा रहे हैं या कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सीख दे रहे हैं..
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दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद के बालयोगी ऑडिटोरियम में फिल्म 'द साबरमती रिपोर्ट' देखी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य सांसदों ने भी प्रधानमंत्री के साथ फिल्म देखी। स्क्रीनिंग में फिल्म के कलाकार भी उनके साथ शामिल हुए।
महाराष्ट्र में इस बार मुक़ाबला ज़ोरदार है। कोई भी दल अपने पत्ते नहीं खोल रहा है। कौन 'किंग' बनेगा और कौन 'किंगमेकर', इस पर सस्पेंस बरकरार है। इस बीच अजित पवार और उनका खेमा वोटिंग से पहले हलचल बढ़ा रहा है।
अजित पवार ने कल योगी के 'बंटेंगे तो कटेंगे' वाले बयान पर आपत्ति जताई। आज उनके क़रीबी नवाब मलिक ने कहा कि 'राजनीति में कोई भी दोस्त या दुश्मन नहीं होता'।
नवाब ने वही कहा, जैसा उनको बोलने को कहा गया। दरअसल अजित पवार की अपेक्षाएं इस बार ज़्यादा हैं।
राजनीति में लंबे समय तक वो चाचा शरद पवार की छाया में रहे। शरद ने जब महाराष्ट्र की राजनीति की तो अजित के लिए बारामती लोकसभा सीट छोड़ी। शरद ने जब केंद्र की राजनीति की तो अजित को ये सीट छोड़नी पड़ी। यानी अजित दशकों तक शरद के पदचिन्हों पर चलते रहे।
NDA से जुड़ने के बाद भी उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं हो पाई। यानी वहां भी डिप्टी सीएम और यहां भी डिप्टी सीएम। अजित पांच बार डिप्टी सीएम रह चुके हैं। लेकिन इस बार उनकी नज़रें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हैं। इसीलिए अजित वेट एंड वॉच की कंडीशन में हैं। जिसका पलड़ा भारी होगा, वो अजित का यारी होगा।
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SHIVANI_RAJA_GEETA_SHAPATH
ब्रिटिश सांसद शिवानी राजा ने हाथ में भगवद् गीता लेकर संसद में शपथ ली। वह भारतीय मूल की हैं और ब्रिटेन के लीसेस्टर ईस्ट की रहने वाली हैं।
@SHIVANI_RAJA_GEETA