उसको ख़बर तक नहीं
मेरी आंखों में उसका तसव्वुर
इज़्तिराब सा है
धड़कनें बेतरतीब और
रूह में इंतिशार सा है
ये हलचल, बेकरारी
दिल को इंतज़ार सा है
काश कोई पीर
उस रांझे को कह दे
इस हीर को उस से इश्क़
बेशुमार सा है..
- किरण के.
अनबूझी अधूरी पहेली
रहनेदो
मौन के संवादों में
बातें सारी कहनेदो
व्यूह की इस रचना में
मैं भी तो
सहभागी हूँ
वियोग वेदना
विरह विकट
मुझको
भी सहने दो
#फ़लक#छोटा_दरवाज़ा