@Roshni_6001 हर बार फोन बजे तो दिल कहता है—वो होगा,
कहते हैं अब उससे कोई रिश्ता नहीं,
मगर बात-बात में ज़िक्र उसी का होता है।
दूर रहने की वजहें तो बहुत हैं हमारे पास,
मगर पास आने की चाहत अब भी सबसे बड़ी है।
कुछ रिश्ते खत्म नहीं होते,
बस “बात नहीं होती” के पीछे छुपा दिए जाते हैं। ❤️
@ApkaBanker मैं तुम्हारी ज़िंदगी का
वो शख़्स बनना चाहती हूँ
जिसकी मौजूदगी हर वक़्त मायने रखे
मुझे आधी-अधूरी जगह नहीं चाहिए,
न ही सिर्फ़ ज़रूरत के वक़्त का साथ
या फिर इतनी दूरी बना लो
कि तुम्हें मेरी कमी महसूस न हो।
मैं किसी की मजबूरी नहीं
किसी की पसंद, प्राथमिकता बनकर रहना चाहती हूँ।
@ApkaBanker शायद यही वो महीन-सी रेखा है,
जहाँ आदत धीरे-धीरे मोहब्बत का रूप लेने लगती है…
और इंसान खुद से ही पूछता रह जाता है—
“ये उसकी आदत है… या फिर इश्क़ की शुरुआत?”
@ApkaBanker उससे बात किए बिना दिन अधूरा-सा लगता है,
और जिस वक़्त उससे बात होती थी, उसी वक़्त दिल अनायास उसे याद करने लगता है।
फिर एक दिन समझ आता है कि ये सिर्फ़ आदत नहीं रही…
क्योंकि आदत छूटने पर खालीपन होता है,
लेकिन किसी खास इंसान की कमी दिल में महसूस होती है।
@ApkaBanker शायद किसी इंसान की आदत यूँ ही नहीं लगती…
पहले उसकी बातें अच्छी लगती हैं, फिर उसका इंतज़ार होने लगता है।
फिर उसके संदेश की एक छोटी-सी दस्तक भी चेहरे पर मुस्कान ले आती है।
धीरे-धीरे उसकी मौजूदगी रोज़मर्रा का हिस्सा बन जाती है—
यह जिंदगी है साहब
यहां थकान के लिए स्थान नहीं है
आप अपने लिए मेहमान नहीं हैं
मुस्कान के साथ हो तो सम्मान होगा
बिना मुस्कान के सम्मान नहीं है
यहां सभी मेहमान बनना चाहते हैं
आपके लिए कोई मेजबान नहीं है
मैं कह संकूं कि
अब मुझे थकान नहीं है!