बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस ने राहुल गांधी को मनुस्मृति और पितृसत्ता पर कहा कि 'सोनिया गांधी क्यों अपने पति राजीव गांधी का सरनेम लगा रही हैं? असली नाम लिखें एंटोनियो माइनो और राहुल गांधी भी पितृसत्ता खत्म करें और अपना नाम राहुल माइनो कहें'. #ShudhanshuTrivedi #RahulGandhi #manusmriti #Congress #PrajatantraTV
याद रखिए इन चेहरों को।
दलित और पिछड़े समाज से आने वाले ये नेता आरक्षण सुधार और पुनर्वर्गीकरण की बात खुलकर कर रहे हैं वह भी तब, जब बड़े-बड़े नेता इस मुद्दे पर बोलने से बचते हैं।
ओम प्रकाश राजभर, संजय निषाद और जीतन राम मांझी इनके पास कम से कम वह राजनीतिक हिम्मत है, जो बाकी नेताओं में दिखाई नहीं देती।
आरक्षण का लाभ सबसे जरूरतमंद तक पहुँचे इस आवाज़ को याद रखिए।
पड़े लिखे लोगों को 100 साल से ज्यादा लग गए राम मन्दिर बनाने में (अनपढ़ लोगों ने 5 साल में ही बना दिया)
पढ़े लिखे लोगों को 70 साल से ज्यादा लग गए जम्मू- कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाने में (अनपढ़ लोगों ने 5 साल में ही हटा दिया)
पढ़े लिखे लोगों को 70 साल से ज्यादा लग गए भारत में नक्सलवाद खत्म करने में (अनपढ़ लोगों ने 5 साल में ही नक्सलवाद खत्म कर दिया)
पढ़े लिखे लोगों को 70 साल से ज्यादा लग गए थे पाकिस्तान के आतंकवादियों को सज़ा देने में (अनपढ़ लोगों ने 5 साल में ही पाकिस्तानी आतंकवादियों को ठोक दिया)
@ajeetbharti थैंक्यू स्वामी रामदेव जी
कोई तो बोला
Sc st कोई दूध के धुले नहीं होते हैं
जैसे सभी जातियों में चोर डकैत
बलात्कारी है वैसे एससी एसटी में भी है
इसलिए SC ST का अपमान संविधान के खिलाफ है
तो स्वर्णों का अपमान भी संविधान के खिलाफ है
जो वकील अपने चैंबर में जज बनाने के लिए कुख्यात है, वो भोंसड़ीवाला भी मर्यादा पर ज्ञान चोद रहा है। लाल जंघिए में आर्गुमेंट करने वाले लोग, जिनके इनकम टैक्स के पेपर दीमक चर जाते हैं, वो साले मोरेलिटी का हमें ज्ञान देंगे?
साले सही पैसे दूँ तो रिरियाता हुआ ‘जी सर’ बोल कर तू मुझे डिफेंड करने आ जाएगा।
पुनः कहूँगा, जिन हराम के पिल्लों को लगता है कि मेरी (या किसी भी व्यक्ति की) माँ-बहन किसी अनपढ़-गँवार-जातिवादी कीड़े के डिजिटल भोग की विषयवस्तु है, मैं उनकी पिछवाड़े में बाँस डाल कर खड़ा कर दूँगा।
मेरे लिए मेरे परिजनों का सम्मान सर्वोपरि है, और उस पर कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं। चाहे वो भारत का प्रधानमंत्री हो या अमेरिका का राष्ट्रपति, मुझे झाँट भर फर्क नहीं पड़ता तुम्हारी पहचान क्या है।
मैं अपने प्रत्युत्तर में तीक्ष्ण, तीव्र और डिस्प्रपॉर्शनेट ही रहूँगा।
सबसे पहले दर्द सुनेंगे।
SC/ST Act के कथित फर्जी मुकदमों से पीड़ित परिवारों को दिल्ली बुलाएँगे।
जिसने जो झेला है, वही सामने आकर बताएगा।
मैं इस पर काम कर रहा हूँ।
#StopMisuseOfSCSTAct
अयोध्या के श्री निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय में विद्यार्थियों को आधुनिक कंप्यूटर लैब के माध्यम से तकनीक से जुड़ते देखना सुखद है। उनकी एक छोटी-सी इच्छा पूरी करने में हम सहभागी बन सके, यह हमारे लिए प्रसन्नता की बात है।
हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा को डिजिटल युग से जोड़ने का यह विनम्र प्रयास नई पीढ़ी को अपनी जड़ों के और करीब लाए और उनके लिए सीखने के नए अवसर खोले, यही कामना है।
गुरुकुल के सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।
जो चमचे यह देखकर खुश हो रहे हैं कि -
सवर्ण समाज नाराज है, यूपी भाजपा हार जाएगी।
उन चमचों को मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि पृथ्वीराज चौहान से हमारी लाख की नाराजगी हो सकती है लेकिन हम राजगद्दी पर मोहम्मद गोरी को थोड़ी न बैठा लेंगे...
आएगा तो योगी ही..... ✋
जय श्री राम.. 🚩
धन्यवाद न्यायाधीश महोदय आपने 40 करोड़ सवर्णों की बात सुनी
UGC पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- देश के किसी भी कॉलेज में नहीं लागू होगा UGC कानून, स्टे जारी रहेगा।
, सवर्ण एकता जिंदाबाद
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
पूरा विपक्ष हमारे खिलाफ़ है, पूरा पक्ष ख़िलाफ़ है।
न कोई नेता, न मंत्री, न कोई कवि न कोई साहित्यकार, न मीडिया और न कोई बड़ा सेलिब्रिटी! किसी का कोई सपोर्ट नहीं!
याद रखना इन सबको!