A beautiful memory!
Mohsin Bhai ( famous poet Mohsin Zaidi) gifted his book Rishta e Kalam to my mother some decades ago.
I just brought home some books from my parents collection which were kept in Aligarh
@atiyaz@AbidZaidi1@DrTahirZaidi
जितना तहज़ीब-ए-बदन से मैं सँवरता जाऊँ
उतना ही टूट के अंदर से बिखरता जाऊँ
ज़िंदगी जैसे कैलेंडर पे बदलती तारीख़
मै�� शब-ओ-रोज़ के मानिंद गुज़रता जाऊँ
सेहन-ए-गुलशन से वो इक आख़िरी रिश्ता भी गया
��़ुश्क पत्तों की तरह अब तो बिखरता जाऊँ 🦋
#मोहसिन_ज़ैदी
@AbidZaidi1
जैसे दो मुल्कों को इक सरहद अलग करती हुई
वक़्त ने ख़त ऐसा खींचा मेरे उस के दरमियाँ
*
ठहरे हुए न बहते हुए पानियों में हूँ
ये मैं कहाँ हूँ कैसी परेशानियों में हूँ
*
बिछड़ने वालों में हम जिस से आश्ना कम थे
न जाने दिल न��� उसे याद क्यूँ ज़ियादा किया
#मोहसिन_जैदी✍️
#BirthAnniv #Shair