जंतर-मंतर पर देश का सारा युवा लाखों की संख्या में जमा हो गया है। सरकार उनकी बात सुनने की बजाय उनपे लाठी चार्ज करवा रही है। ये ठीक नहीं है।
मैं सरकार से appeal करता हूँ कि ये हमारे ही देश के बच्चे हैं जो न्याय मांगने सड़कों पर उतरे हैं। अहंकार छोड़िये और इनकी बात सुनिए।
बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफ़न लेकर आए हैं।
जब शांतिपूर्ण आवाज़ों को दबाया जाता है, तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं।
सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज़ दबाना, देश की आत्मा को दबाना है।
लोकतंत्र की बुनियाद संवाद पर टिकी होती है, दमन पर नहीं। जब सोनम वांगचुक जैसे संवेदनशील और राष्ट्रभक्त पर्यावरणविद् को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से जबरन हटाया जाता है, तो यह केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि हमारे संवैधानिक अधिकारों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।
लद्दाख की पर्यावरण सुरक्षा, युवाओं का भविष्य और छठी अनुसूची की मांग को लेकर जो आवाज़ गांधीवादी तरीके से उठाई जा रही थी, उसे सुनने के बजाय पुलिसिया बल का प्रयोग करना बेहद निराशाजनक है। लोकतंत्र में असहमति का जवाब हमेशा संवेदनशीलता और बातचीत से दिया जाना चाहिए, न कि चुप्पी और डर का माहौल बनाकर।
यह लड़ाई सिर्फ लद्दाख की नहीं, बल्कि देश के संविधान, लोकतंत्र और हर उस नागरिक की है जो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का हक रखता है। सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़कर तुरंत संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
सिविल ड्रेस में दिल्ली पुलिस , सोनम वांगचुक को डिटेन कर के सफदरजंग हॉस्पिटल ले गई है। यानी सरकार इस हद तक गिर चुकी है कि जबरदस्ती हॉस्पिटल भेज रही है कोर्ट की फटकार के बाद लेकिन न अपनी गलती मान रही है न जनता की मांगे।
आज सवाल सिर्फ़ सोनम वांगचुक का नहीं, देश की शिक्षा और करोड़ों युवाओं के भविष्य का है।
#SonamWangchuk #SaveLadakh #StandWithSonamWangchuk #Democracy #FreedomOfSpeech #RightToProtest #ConstitutionOfIndia #LadakhProtest #JantarMantar #SaveEnvironment #YouthFuture
Who Do You Support And Why...??
• Vote :- A ( Sonam Wangchuk )
• Vote :- B ( Narendra Modi )
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Message from Sonam :
20th JULY
आज़ादी का दूसरा आन्दोलन
भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत
Freedom from injustice (Like paper leaks)
Freedom from Fear (my illegal detention)
India’s 2nd FREEDOM MOVEMENT
March to the Parliament
Please make it a big success
Sent through Gitanjali
from my illegal detention at Safdarjung
"શરીર ભલે ઓગણીસ દિવસથી ગળતું હોય,
આત્મબળ આખી સિસ્ટમ સામે અડગ છે!
સલામ છે લદાખના એ સિંહને,
જે દેશના યુવાઓ માટે મોતના મુખમાં લડતો હોય!"
🙏🏻 🫡 🙏🏻
જ્યાં બરફ ઓગળીને નદી બને છે,
ત્યાંથી એક સંતની ધીરજ વહે છે.
દિલ્હીના રસ્તા પર ધગધગતી આંચ છે,
પણ એના ચહેરા પર હિમાલયની શાંતિ છે!
મેલ્ટ થતા ગ્લેશિયરને જેણે રોક્યા હતા,
એ જ હાથ આજે અન્યાય સામે પોકાર્યા છે.
શરીર ભલે નબળું પડે, લોહી ભલે સુકાય,
પણ યુવાઓના સપના માટે એ માણસ લડતો જાય!
"કોક તો જાગે... કોક તો જાગે..."
એ કવિનો સાદ આજે જંતર-મંતર પર ગાજે છે,
દેશ આખો ઊંઘે પણ લદાખનો વાંગડુ જાગે છે!
પરીક્ષાના નામે જ્યાં સપનાઓ લૂંટાય છે,
ત્યાં સત્ય માટે આખો એક માણસ ઓગળતો જાય છે!
ચલો સંસદના નારામાં દેશનો અવાજ છે,
આ કોઈ આંદોલન નથી, આ તો ભવિષ્યની લાજ છે.
૧૯ દિવસના ઉપવાસનો એ એક-એક શ્વાસ,
કરોડો યુવાનોમાં જગાડી રહ્યો છે નવો વિશ્વાસ!
ઓ ઓગળતા શરીરવાળા અડગ સત્યાગ્રહી,
તમાંરી આ અહિંસા ક્યારેય એળે નહીં જાય.
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