@shubhankrmishra भाई हमारी राय भी यही है कि झूठ बोलकर FIR करवाया गया जिसके परिणाम स्वरूप अंततः इनको अपने भाई को खोना पड़ा, शायद खान को हमारे सिस्टम से वो साझा न मिले जो मिलनी चाहिए। लेकिन उपर भी एक अदालत है और उसकी लाठी में आवाज़ नहीं होती। वो ब्याज़ समेत न्याय करता है। देखेंगे आप..
यह पोस्ट मैं लिख तो रहा हूँ, लेकिन इसे लिखते समय मेरी आँखें भर आईं। 😢
शुभांकर मिश्रा से बातचीत करते समय रौशन आनंद सर भावुक होकर रो पड़े।
उन्होंने जिस बात का ज़िक्र किया, उसे सुनकर आपकी आँखें भी नम हो जाएँगी।
रौशन आनंद सर ने कहा है कि,
"सच पूछिए तो हम मुँह तक दिखाने के लायक नहीं हैं जो मेरे साथ हुआ है,
हम नहीं चाहते हैं कि किसी और के साथ हो, किस मुँह से अपने मां बाप को फेस करें? "
यह सारी बातें रौशन सर ने रोते हुए कही हैं, किसी के एक झूठ ने रौशन सर के पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया।
@khan_sahil80786 किसकी व्यूअरशिप घट रही थी ये जा कर यूट्यूब से देख सकते हो, 20 M व्यू जिसके आते थे उसके 5 लाख bh नहीं आ रहे थे। मार्केटिंग और एडवरटाइजमेंट से ज़्यादा दिन काम नहीं चलता।
कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन के सामने उनके अपने थे।जिन भीष्म पितामह की गोद में खेलकर वे बड़े हुए थे, वे सामने खड़े थे।जिन द्रोणाचार्य से उन्होंने धनुर्विद्या सीखी थी, वे सामने खड़े थे।भाई, बंधु, मित्र, रिश्तेदार- सब उसी रणभूमि में थे।
अर्जुन युद्ध छोड़ना चाहते थे- उन्हें हार का डर नहीं था। वह इसलिए टूट गए थे क्योंकि उन्हें लग रहा था कि जिन लोगों का उन्होंने जीवनभर सम्मान किया, आज उन्हीं के विरुद्ध खड़ा होना पड़ रहा है।
उनकी आँखें भर आईं, हाथ काँपने लगे,धनुष हाथ से छूटने लगा। उन्होंने श्रीकृष्ण से कहा कि ऐसे राज्य, ऐसे वैभव, ऐसी विजय का क्या करूँगा जिसके लिए मुझे अपने ही लोगों के विरुद्ध खड़ा होना पड़े?
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कहा- ये तुम्हारे अपने हैं- क्या संबंधों के मोह में सत्य और कर्तव्य त्याग दोगे?
व्यक्ति से प्रेम और उसके हर कर्म का समर्थन करना, दोनों अलग बातें हैं।
यदि केवल अपनेपन के कारण हम सही और गलत का निर्णय करना छोड़ दें, तो फिर न्याय का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
महाभारत हमें सिखाती है कि कभी-कभी जीवन में ऐसी घड़ी आती है जब आपके सामने कोई दुश्मन नहीं, बल्कि वही लोग खड़े होते हैं जिनके साथ आपने समय बिताया होता है, जिनका सम्मान किया होता है, जिनसे आपका परिचय होता है। उस समय सबसे आसान रास्ता होता है मौन रह जाना, आँखें बंद कर लेना और कहना कि - ये मेरे अपने हैं, मैं कुछ नहीं बोलूँगा।
व्यक्ति के प्रति सम्मान अपनी जगह है, लेकिन धर्म और सत्य उससे ऊपर हैं।मित्रता का अर्थ यह नहीं कि हम किसी की हर बात पर मौन हो जाएँ। सच्ची मित्रता और सच्चा सम्मान वही है जिसमें व्यक्ति के प्रति आदर बना रहे, लेकिन सत्य के प्रति निष्ठा भी बनी रहे।
मैंने जीवन में कभी यह नहीं कहा कि किसी व्यक्ति की सारी बातें गलत हैं। न मैंने यह कहा कि किसी व्यक्ति की सारी बातें सही हैं।
यदि किसी ने कभी मुझसे सलाह ली, यदि मैं किसी समारोह में गया, यदि मंच साझा किया, तो क्या उससे यह सिद्ध हो जाता है कि मैं जीवनभर उसकी हर बात पर मौन रहूँ?
@ssdD364965@abhinaymaths भाई विवेक बिंद्रा वाली बात क्यों नहीं बतानी चाहिये? कोई झूठ बोलके किसी का परिवार बर्बाद कर दे और उसे कुछ न ही सोशल मीडिया मैनेज कर ले। क्या आदमी हो गए हो भाई? न्याय का सिद्धांत क्या कहता हैं?
@tsh52022@abhinaymaths जब तक कोई भी अच्छा काम करेगा लोग तारीफ ही करेंगे। लेकिन झूठ बोलकर किसी टीचर को फ़साना महानता है? उस झूठ का जो परिणाम है भगवान करे वो परिणाम उसको डिफेंट करने वाले भी भोग
@archanapatel_@abhinaymaths कर्ण अधर्मी था इसलिए भगवान ने उसका हिसाब करवा दिया। योद्धा होना एक बात है अधर्मी योद्धा होना दूसरी। उसको सिर्फ खुद को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करना था इसलिए उसने सिर्फ़ अर्जुन को मारने की प्रतिज्ञा ली थी।
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@mpsehu_@pathshalagurug Jhuth bolrha h ye PW sbse best example h affordability me quality ka lekin o log bhi mafia run krte h ye khud garibi garibi krte krte ameer bngya kbhi ye apni quality k lie nhi famous hua h bs bakchodi or bakaiti k lie
@priyanshu__63 कितना झूठ बोलता है!एक भी मुकदमा नहीं है इसके ऊपर। ये बात तो रौशन सर के केस में सामने आ चुकी हैं कि कोई पहले का केस नहीं है इस पर।कोरोना के बाद ऑनलाइन एजुकेशन आने से सस्ता हुआ ही है अब इसका श्रेय ये ले, वही बात हो गई कि बैल गाड़ी के नीचे चलने वाले कुत्ते को लगता है कि वही चला रहा
Proud to be blocked by the #Chillar@kaankit@abhinaymaths , बस इनकी पिछले वीडियो देख कर यूपीएससी में फेल होने का कारण बता दिया भाई ने ब्लॉक कर दिया। Thank you once again #Chillar
@_james_x10@shubhankrmishra बहुत अच्छा किया खान ने झूठ बोलकर निर्दोष को जेल भिजवा दिया। सीक्वेंस ऑफ इवेंट्स नाम की कोई चीज होती हर एक घटना दूसरे घटना पर निर्भर होती है। जैसे किसी के माता पिता न चाहते तो वो पैदा नहीं होता, जैसे कोई बीमार है इलाज नहीं होगा तो मर जाएगा।