परम पिता परमेश्वर, बाबा हरखनाथ जी एवं मां वांकल की असीम कृपा तथा माता पिता, गुरुजनों एवं बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में अंतिम रूप से चयन हुआ
#चतुर्थ_श्रेणी
बोर्ड ने आज मीटिंग में निम्नलिखित एजेंडा का अनुमोदन किया;
1. टीचर भर्ती लेवल 1 का प्री डीवी रिजल्ट
2. Lab Asst exams के प्राथमिक Keys
L1 के सभी सफल हुए कैंडिडेट्स को बहुत बहुत बधाई!
बुमराह ने विकेट लिया और भीड़ जश्न मनाने के लिए आगे आई।
यह सिनेमा का सबसे शानदार और रोंगटे खड़े कर देने वाला पल था। 🥶
#INDvsPAK#T20WorldCup https://t.co/vsDz90IWBL
रोस्टर और OMR घोटाले के नाम पर प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ जिस बेरहमी से खिलवाड़ किया जा रहा है, उसके खिलाफ बाड़मेर में आयोजित धरने में शामिल होकर बेरोज़गार युवाओं की आवाज़ को पूरी मजबूती से बुलंद किया।
यह सिर्फ एक भर्ती प्रक्रिया की खामी नहीं, बल्कि ईमानदार मेहनत, वर्षों की तैयारी और सपनों पर किया गया सीधा प्रहार है। रोस्टर व्यवस्था में जानबूझकर की गई गड़बड़ियाँ, OMR शीट से जुड़े घोटाले और चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव यह साबित करता है कि व्यवस्था युवाओं के साथ न्याय करने में पूरी तरह विफल रही है।
योग्य युवाओं को हाशिये पर धकेलने वाली किसी भी साज़िश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक दोषियों की जवाबदेही तय नहीं होती, निष्पक्ष जांच नहीं होती और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाया जाता, तब तक यह आंदोलन थमेगा नहीं।
प्रदेश का युवा आज सड़क पर है क्योंकि उसके साथ अन्याय हुआ है। यह लड़ाई किसी एक परीक्षा या भर्ती की नहीं, बल्कि युवाओं के सम्मान, अधिकार और भविष्य की है और इस लड़ाई को आख़िरी मंज़िल तक पहुँचाया जाएगा।
#OMR_घोटाला
@alokrajRSSB चाहे z formula लगाओ, चाहे equviparsentile नॉर्मलाइजेशन में उतने ही नंबरों का नुकसान हो रहा है तो नया फार्मूला लगाने का क्या फायदा ...
कुछ नहीं है बस लोगों को गुमराह किया जा रहा है ।।
ये भर्ती विज्ञप्ति नहीं, OBC के युवाओं के हक़ पर भाजपा सरकार का सुनियोजित प्रहार है।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की भर्ती परीक्षाओं में OBC के हक पर डाका जा रहा है। LDC भर्ती परीक्षा में ओबीसी को 21% आरक्षण नहीं देना कोई तकनीकी भूल नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों पर खुला हमला और पिछड़े वर्ग के साथ घोर अन्याय है।
चतुर्थ श्रेणी, वनपाल भर्ती समेत कई भर्ती परीक्षाओं में भी OBC को 15% आरक्षण में समेट देना बताता है कि रोस्टर के नाम पर छल किया जा रहा है, ओबीसी के युवाओं को हाशिये पर धकेला जा रहा है।
ये संविधान की भावना, समान अवसर और ओबीसी के लाखों बेरोज़गारों के भविष्य का सवाल है। आखिर भाजपा सरकार OBC का हक़ मारकर किसे फायदा पहुंचा रही है?
ये भर्ती विज्ञप्ति नहीं, OBC के युवाओं के हक़ पर भाजपा सरकार का सुनियोजित प्रहार है।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की भर्ती परीक्षाओं में OBC के हक पर डाका जा रहा है। LDC भर्ती परीक्षा में ओबीसी को 21% आरक्षण नहीं देना कोई तकनीकी भूल नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों पर खुला हमला और पिछड़े वर्ग के साथ घोर अन्याय है।
चतुर्थ श्रेणी, वनपाल भर्ती समेत कई भर्ती परीक्षाओं में भी OBC को 15% आरक्षण में समेट देना बताता है कि रोस्टर के नाम पर छल किया जा रहा है, ओबीसी के युवाओं को हाशिये पर धकेला जा रहा है।
ये संविधान की भावना, समान अवसर और ओबीसी के लाखों बेरोज़गारों के भविष्य का सवाल है। आखिर भाजपा सरकार OBC का हक़ मारकर किसे फायदा पहुंचा रही है?
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा जारी लिपिक ग्रेड–II / कनिष्ठ सहायक संयुक्त सीधी भर्ती परीक्षा (LDC) 2026 की विज्ञप्ति में वर्गवार पदों का बँटवारा न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह संविधान की भावना, सामाजिक न्याय और आरक्षण की मूल अवधारणा पर सीधा प्रहार है।
राजस्थान के सबसे बड़े OBC वर्ग को जहाँ संवैधानिक रूप से 21% आरक्षण का अधिकार प्राप्त है, वहीं LDC भर्ती 2026 में उसे मात्र 15% आरक्षण देकर प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ किया गया है। जो आरक्षण की मूल भावना और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के पूर्णतः विरुद्ध है।
यह कोई पहली बार नहीं है। इससे पूर्व में भी जारी चतुर्थ श्रेणी भर्ती, वनपाल भर्ती तथा RPSC 2nd ग्रेड शिक्षक भर्ती 2024 (गणित विषय) इन सभी भर्तियों में OBC वर्ग को लगातार पूर्ण 21% आरक्षण से वंचित रखा गया है।
विशेष रूप से, RPSC 2nd ग्रेड शिक्षक भर्ती 2024 की संशोधित विज्ञप्ति में गणित विषय के 538 पदों में OBC को मात्र 9% आरक्षण दिया जाना, आरक्षण व्यवस्था के नाम पर घोर भेदभाव और मनमानी को उजागर करता है।
ये केवल भर्ती विज्ञप्तियाँ नहीं हैं, बल्कि OBC युवाओं के संवैधानिक अधिकारों पर सुनियोजित प्रहार हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की भर्तियों में रोस्टर के नाम पर आरक्षित वर्गों के अधिकारों पर लगातार डाका डाला जा रहा है।
— आखिर यह अन्याय कब तक चलेगा, युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ आखिर कब तक किया जाएगा?
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी से आग्रह है कि इस गंभीर विषय का तत्काल संज्ञान लेते हुए LDC सहित सभी संबंधित भर्तियों की सम्पूर्ण जाँच करवाई जाए, OBC वर्ग को संवैधानिक 21% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए तथा युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे इस अन्याय का स्थायी समाधान निकाला जाए। सामाजिक न्याय केवल काग़ज़ों में नहीं, बल्कि भर्तियों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
@RajCMO
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा जारी लिपिक ग्रेड–II / कनिष्ठ सहायक संयुक्त सीधी भर्ती परीक्षा (LDC) 2026 की विज्ञप्ति में वर्गवार पदों का बँटवारा न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह संविधान की भावना, सामाजिक न्याय और आरक्षण की मूल अवधारणा पर सीधा प्रहार है।
राजस्थान के सबसे बड़े OBC वर्ग को जहाँ संवैधानिक रूप से 21% आरक्षण का अधिकार प्राप्त है, वहीं LDC भर्ती 2026 में उसे मात्र 15% आरक्षण देकर प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ किया गया है। जो आरक्षण की मूल भावना और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के पूर्णतः विरुद्ध है।
यह कोई पहली बार नहीं है। इससे पूर्व में भी जारी चतुर्थ श्रेणी भर्ती, वनपाल भर्ती तथा RPSC 2nd ग्रेड शिक्षक भर्ती 2024 (गणित विषय) इन सभी भर्तियों में OBC वर्ग को लगातार पूर्ण 21% आरक्षण से वंचित रखा गया है।
विशेष रूप से, RPSC 2nd ग्रेड शिक्षक भर्ती 2024 की संशोधित विज्ञप्ति में गणित विषय के 538 पदों में OBC को मात्र 9% आरक्षण दिया जाना, आरक्षण व्यवस्था के नाम पर घोर भेदभाव और मनमानी को उजागर करता है।
ये केवल भर्ती विज्ञप्तियाँ नहीं हैं, बल्कि OBC युवाओं के संवैधानिक अधिकारों पर सुनियोजित प्रहार हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की भर्तियों में रोस्टर के नाम पर आरक्षित वर्गों के अधिकारों पर लगातार डाका डाला जा रहा है।
— आखिर यह अन्याय कब तक चलेगा, युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ आखिर कब तक किया जाएगा?
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी से आग्रह है कि इस गंभीर विषय का तत्काल संज्ञान लेते हुए LDC सहित सभी संबंधित भर्तियों की सम्पूर्ण जाँच करवाई जाए, OBC वर्ग को संवैधानिक 21% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए तथा युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे इस अन्याय का स्थायी समाधान निकाला जाए। सामाजिक न्याय केवल काग़ज़ों में नहीं, बल्कि भर्तियों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
@RajCMO
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा जारी लिपिक ग्रेड-|| / कनिष्ठ सहायक संयुक्त सीधी में भर्ती परीक्षा (LDC) की हाल ही जारी विज्ञप्ति में वर्गवार पदों का बँटवारा न्यायसंगत नहीं है।
इस भर्ती परीक्षा में OBC वर्ग को 21% की बजाय मात्र 15% आरक्षण दिया गया है जो संवैधानिक नहीं है, यह बेरोजगार युवाओं के साथ कुठाराघात है।
पूर्व में जारी चतुर्थ श्रेणी भर्ती और वन पाल भर्ती में भी OBC वर्ग को 21% आरक्षण नहीं दिया गया था।
इसी तरह RPSC 2nd ग्रेड शिक्षक भर्ती 2024 की जारी संशोधित विज्ञप्ति में गणित विषय में 538 पदों के बंटवारे में मात्र 9% आरक्षण मिला है।
रोस्टर के नाम पर आरक्षित वर्गों के साथ यह अन्याय कब तक चलेगा? युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कब तक किया जाएगा?
माननीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी से अनुरोध है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द उचित हल निकलवाएँ तथा इस मामले की संपूर्ण जाँच करवाई जाए।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा जारी लिपिक ग्रेड-|| / कनिष्ठ सहायक संयुक्त सीधी में भर्ती परीक्षा (LDC) की हाल ही जारी विज्ञप्ति में वर्गवार पदों का बँटवारा न्यायसंगत नहीं है।
इस भर्ती परीक्षा में OBC वर्ग को 21% की बजाय मात्र 15% आरक्षण दिया गया है जो संवैधानिक नहीं है, यह बेरोजगार युवाओं के साथ कुठाराघात है।
पूर्व में जारी चतुर्थ श्रेणी भर्ती और वन पाल भर्ती में भी OBC वर्ग को 21% आरक्षण नहीं दिया गया था।
इसी तरह RPSC 2nd ग्रेड शिक्षक भर्ती 2024 की जारी संशोधित विज्ञप्ति में गणित विषय में 538 पदों के बंटवारे में मात्र 9% आरक्षण मिला है।
रोस्टर के नाम पर आरक्षित वर्गों के साथ यह अन्याय कब तक चलेगा? युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कब तक किया जाएगा?
माननीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी से अनुरोध है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द उचित हल निकलवाएँ तथा इस मामले की संपूर्ण जाँच करवाई जाए।
फॉर्म बदलो,दिव्यांग बनो,भविष्य चमकाओ
राजस्थान में नेताओ के परिवारो के लिये प्रतियोगी परीक्षाओं का नया गेम चल रियो है — “फॉर्म बदलो, भविष्य चमकाओ”।
अब मेहनत, पढ़ाई, या ज्ञान की ज्यादा ज़रूरत नहीं… बस कैटेगरी और स्टेटस बदलो, और RAS बन जाओ!
ब्यावर विधायक की पुत्री कंचन चौहान तो इस खेल की महान खिलाड़ी निकली।
8 मई 2018 को पहला फॉर्म भरा — खुद ने लिखा डाइवोर्सी और दिव्यांग।
अगले ही दिन, 9 मई 2018 को दूसरा फॉर्म — और हाय राम! मैडम अचानक विवाहित हो गई ।
मतलब 24 घंटे में रिश्ता भी बदल गया,
स्थिति भी बदल गई,
और कैटेगरी भी… बस जादू ही जादू!
दिव्यांग होने का खेल तो सरकारी मेडिकल में पकड़ में आ ही चुका है.
और शादी-विवाह वाला फास्ट ट्रैक तो
किस नियम-किताब में दर्ज है भाया?
अभी तक भी पकड़ में आयो कोनी.
कागज़ों के इसी कमाल से मैडम RAS बन बैठी।
आम अभ्यर्थी होता तो
सीधा — फॉर्म रद्द, नौकरी गई, घर बैठो!
पर यहाँ सरकार ने बर्खास्तगी की जगह
मैडम को कर दिया APO और वो भी गृह जिले में.
मतलब — गलती भी आपकी, नौकरी भी आपकी!
सबसे मजेदार हिस्सा — SOG कहाँ है?
जो आम अभ्यर्थी की छोटी गलती पर
घर से उठा लेती है,
वो इणां मामले में महीनों सूं
“जांच चल रही है” मोड में है।
रिपोर्ट आज तक
राजस्व मंडल प्रशासन तक नहीं पहुँची।
लगता है फाइलें भी VIP ट्रीटमेंट ले रही हैं।
डर भी किस बात का?
जब बापू खुद सत्ताधारी दल के विधायक होवे,
तो सिस्टम भी कहे —
“थोड़ा टाइम तो लागसी ही।”
राजस्थान रो नौजवान पूछ रिया है —
कानून सिर्फ गरीबां खातर है के?
और रसूख वाले हर गलती सूं
टेक्निकल पॉइंट बना लेवे?
अगर ईज्यों ही चालसी,
तो साफ बोल दो —
RPSC फॉर्म के साथ
राजनीतिक पहचान पत्र भी लगावणो जरूरी है।
नितो हर परीक्षा के बाद सवाल उठते रहसी —
क्या राजस्थान में अफसर बननो अब पढ़ाई से ज़्यादा राजनीति और पहचान रो खेल हो गयो है?
पहले भ्रष्टाचारी शिक्षा मंत्री @GovindDotasra के बेटे व रिश्तेदार और अब सत्ताधारी दल के विधायक की बेटी.
@BhajanlalBjp@madandilawar@HansrajGurjarR@SoniFanish
@cop_manjumeena @Kavimeena123@khurpenchh@VivekGa54515036@8PMnoCM