सबसे मुश्किल काम है अपने बारे में लिखना, इस जहां में मेरा अस्तित्व एक स्ट्रगलर के रूप में।
शायरी पढ़ना❤️ #वन्डरलस्ट नहीं, कभी कभी सैर सपाटा❤️
अनन्त की खोज मे।
#ahc_ro_aro_exam_scam
मित्रो आज मैं आपको कुछ ऐसे व्यक्तियों से परिचय कराता हूँ, जिन्होंने लगभग 3 महीनों के अंदर सरकारी एग्जाम में नीचे से टॉप करने के बजाय ऊपर से टॉप करने का फॉर्मूला ढूंढ लिया। इनकी मार्कशीट मैं इस ट्वीट में संलग्न कर रहा, इन महोदयो ने UPSSSC द्वारा आयो��ित PET
प्राइवेट स्कूलों और शिक्षा माफियाओं की जकड़ में अभिवावक, आइए उठाएं आवाज, शिक्षा में सुधार क्यों नहीं है चुनावी मुद्दा?💪
प्राइवेट स्कूलों द्वार पूरे भारत में अप्रैल मई का महीना बच्चो के माता पिता को लूटने का समय है बच्चे का नई कक्षा में एडमिशन अभिवावकों के लिए दर्द लेकर आता है उसका कारण है स्कूलों द्वारा हर साल 20% फीस में वृद्धि, एडमिशन फीस हर साल लेना, इससे काम नही चलता तो कमीशन के लिए हर साल नई किताबें , कापियां, ड्रेस और स्टेशनरी भी लेने के लिए परिजनों को बाध्य करना जिसके दाम हर साल 40% बढ़ते है,
इन किताबें में बड़ा खेल Workbooks का है अगर आपका 6 class का बच्चा अपने बड़े भाई की किताबो से पढ़ना चाहता है जो इसी साल 7th में गया है तो नहीं पढ़ सकता क्योंकि WorkBooks आपको खरीदनी पड़ें��ी जो पूरे सेट के साथ ही मिलंगी, स्कूलों का कमीशन सेट है किताबो की दुकान पर इसलिए शायद आपको रसीद भी न मिले,
इस बारे में #BarabankiNews ने आम जनमानस सहित जिम्मेदारों को जागरूक करने का निश्चय किया है, आखिर प्राइवेट स्कूलों की मनमानी चुनावी मुद्दा क्यों नहीं है? #privatisation #EducationMatters #educationReforms #Barabanki #UttarPradesh #IndianEducation #education #PrivateSchools
किसी दिन ज़िंदगानी में करिश्मा क्यूँ नहीं होता
मैं हर दिन जाग तो जाता हूँ ज़िंदा क्यूँ नहीं होता
मेरी इक ज़िन्दगी के कितने हिस्सेदार हैं लेकिन
किसी की ज़िन्दगी में मेरा हिस्सा क्यूँ नहीं होता
- राजेश रेड्डी
यही हम ज़िंदगी भर ढूँढते हैं
कभी दुनिया कभी घर ढूँढते हैं
उजाला करके पूरे आसमाँ में
सितारे किसको शब भर ढूँढते हैं
कभी जो ढूँढना पड़ जाये ख़ुद को
तो हम चेहरा बदल कर ढूँढते हैं
छुपा रहता है हममें कौन दानिश
किसे हम ज़िंदगी भर ढूँढते हैं
Madan Mohan Danish
ग़ज़ल
यूँ देखता रहता हूँ हथेली की लकीरें
जैसे मिरी तक़दीर अभी बोल पड़ेगी
इन आँखों की ख़ामोशी में इतना भी न झाँक��ं
भीगी हुई तह़रीर अभी बोल पड़ेगी
रहने भी दें, आज़ादी के नग़मे न सुनाएँ
वरना मिरी ज़ंजीर अभी बोल पड़ेगी
- राजेश रेड्डी