@atsshow7 पहले लक्ष्य था कि हिन्दू राष्ट्र बनाना है। अब यूजीसी के बाद लक्ष्य है कि हमने देश के लिए जिसपे अपनी जान दाव पर लगाई फिरभी जिसने हमारी पीठ में छुरा घोंपा उस गद्दार को हर हाल में कुर्सी से उतारना है।
अब तक राष्ट्रवाद की पट्टी ने उसके सारे नीले कांड ढक रखे थे। अब जाके आंख खुली है।
@GuptaMohit1978 सवर्ण तो 2014 से पहले भी अच्छे से जी रहे थे। और आगे भी कुछ न कुछ करके जी लेंगे। लेकिन अगर कांग्रेस 2029 में सत्ता में आई तो इन भाजपील्लो का क्या हस्र करेगी मुझे तो ये देखना है।
@GuptaMohit1978 अभी सवर्णों के पास केसरिया ही ऑप्शन बचा है।पता है कि किसीभी स्थिति में विजय तो मिलनी नहीं है।लेकिन अपने अंतिम श्वास तक जिसने हमसे गद्दारी करी उससे लड़ते रहना है।कांग्रेस आए या भाजपा अधिक से अधिक सवर्ण बच्चोंको विदेश भेजे।फिर 50 साल बाद मुल्लों के राज में मूलनिवासीओ का हाल देखना।
@MukeshPathakji अभी सवर्णों के पास केसरिया ही ऑप्शन बचा है।पता है कि किसीभी स्थिति में विजय तो मिलनी नहीं है।लेकिन अपने अंतिम श्वास तक जिसने हमसे गद्दारी करी उससे लड़ते रहना है।कांग्रेस आए या भाजपा अधिक से अधिक सवर्ण बच्चोंको विदेश भेजे।जब 50 साल बाद मुल्लों के राज में मूलनिवासीओ का हाल देखेंगे।
@Ad_Mishra_01 आप सवर्णों का मोदी एक्ट और रस के प्रति रोष कम नहीं समझ सकते । में मोदी के खिलाफ एक शब्द नहीं सुनता था लेकिन जबसे यूजीसी आया में और मेरे जैसे कई लोग आज मोदी के कट्टर विरोधी है उसकी सकल भी देखना नहीं चाहते। सबने कसम खाई है कि नेता को ही वोट देंगे।
UGC, आरक्षण में सुधार और SC/ST एक्ट में सुधार को लेकर देश में जो असंतोष दिखाई दे रहा है, सरकार उसे दबाने के हथकंडे अपना रही है जबकि यह अब जल्दी से खत्म नहीं हो सकता।
महिपाल सिंह मकराना जिस दिन दिल्ली में बड़े आंदोलन का आह्वान करेंगे, उस दिन देशभर से इतनी बड़ी संख्या में लोग जुटेंगे, यह सरकार और सभी राजनीतिक दलों की सोच से परे है
पिछली बार दिल्ली में लोग एक बुलावे पर इतने आ गए थे अबकी बार पूरी तैयारी से आयेंगे
@mahipalmakrana_
@Bnyboy2979@eternalroute Bas yahi baat har general catagory walo ko samaj leni chahiye ki unhone kabhi 2014 se modi ko vote diya nahi hai. Modi ko sirf bahujano ne chuna hai. Aur general jaise pahele vote nahi deta tha vaise ab bhi nahi dena chahiye.
@aby_shri@eternalroute Koi baat nahi ham bhi yahi chahte hai. Ki ab desh koi musalim league hi chalaye.
Ab deshka aur dharm ka theka sirf savarno ko nahi lena. Hum hamari taiyari kar lenge. Desh ka tum bahujan dekh lena.
@Mrsinha आइटी सेल खुद कह रही है कि इस एक्ट का गलत इस्तेमाल होता था। फिर हमारे साहब ने हिसाब चूकता करने के लिए इससे और कड़ा कर दिया अब इससे पहले से भी ज्यादा गलत हो रहा है।
मजे की बात। आइटी सेल के अनुसार सरकार को कुछ कदम उठाने चाहिए। तुम्हारी सरकार तो इसमें मुआवजा बढ़ने में लगी है। 😏
@Mrsinha Hypocrisy of "अंधभक्त आइटी सेल"
You yourself claimed that law was brought by rajiv gandhi and it was widely misused.
Even if your Neelmanav strengthened that dreconian act instead of make that act justificable
I always regret that i contribute my vote for this vision less party
साहिल वकोड़े IIT बॉम्बे के छात्र थे। परीक्षा चल रही थी। पूरा प्रश्नपत्र AI एप्प को अपलोड कर के उत्तर कॉपी में लिख रहे थे। प्रोफेसर ने पकड़ लिया। बाहर ले गए, डाँटा और कहा कि संस्थान के नियम स्पष्ट हैं आप चोरी करते पकड़े गए तो सस्पेंड किए जा सकते हो।
साहिल ने बाद में आत्महत्या कर ली। माँ-बाप ने पोस्टमार्टम के बाद भी शव नहीं लिया क्योंकि उन्हें न्याय चाहिए। न्याय पाने के लिए उन्होंने मोदी एक्ट की धाराएँ लगवा दीं प्रोफेसर पर।
एक लड़का आरक्षण से IIT पहुँचा। कम नंबर न आए, इसलिए चोरी कर रहा था। वह टॉपर बनना चाह रहा था। पर एक मनुवादी शिक्षक ने उसे कॉलेज के कानून बताए, सस्पेंड किया भी नहीं। उसने आत्महत्या कर ली।
क्या एक दलित को फोन ले जाने अनुमति नहीं होनी चाहिए? क्या ऐतिहासिक प्रताड़ना के कारण उसको ओपन मोबाइल परीक्षा देने की अनुमति नहीं होनी चाहिए?
आज एक ब्राइट स्टूडेंट, जो जेट इंजन बना सकता था AI से पूछ कर, हमारे बीच इसलिए नहीं रहा क्योंकि उससे पहले ही चरण में रोक लिया गया। मोदी एक्ट इसीलिए बना ही है।
प्रोफेसर को फाँसी होनी चाहिए।
@DrLaxman_Yadav फेसबुक पर दूसरे समाज की बेटियों के बारे में अभद्रता से लिखने से पहले उसे अपनी बेटी याद नहीं आई होगी ?
वैसे जो हुआ बुरा हुआ। भगवान उनके सारे कृत्य क्षमा करके उनकी आत्मा को सही स्थान दे। ॐ शांति ।
@Mrsinha तुम और तुम्हारी मोदी सरकार विपक्ष में हो ?
तो तेरा मोदी कुछ कर क्यों नहीं रहा ?
क्या उसी सिर्फ बांग्लादेश में चावल भेजने के लिए बैठाया है?
इंदिरा के समय का एग्रीमेंट है कि आपातकालीन स्थिति में भारत अपनी सेना बांग्लादेश में भेज सकता है।
तो भेजता क्यों नहीं है?