रीट्वीट नहीं रोकनीं चाहिए दोस्तों क्योंकि लोगो को सचेत करने का काम है अपना
इन दोनों So Called Social Media Influencer ने समाज में गंदगी फैलाने का ठेका ले लिया इसमें एक है समय रैना अगर आप इसका शो अकेले में भी देखेंगे तो भी शायद आपको लज्जा आयेगी अकेले में भी देखने लायक नहीं है इसका शो
इसके शो टोटली Vulgarity पर टिके हुए हैं ये बंदा Fake Modernity के सहारे समाज में दरिंदगी हैवानियत और गंदगी फैला रहा है
आज कल छोटे से छोटा बच्चा भी मोबाइल यूज़ कर रहा हैं अगर उसकी इंस्टाग्राम की फ़ीड मे इनके Vulgar शो की क्लिप आयेगी और उसे वो देखेगा तो उसके दिमाग़ मे कितनी गंदगी फैलेगी
इनके फ़ॉलोवर्स देख के लगता हैं की इतने लोग तो इन्होंने तैयार कर दिए उनके दिमाग़ में गंदगी और अश्लीलता भर कर
जितनी जल्दी हो सके इनके शो बंद होने चाहिये वरना भारत एक हैवानियत वाला देश बनकर रह जाएगा
#RanveerAllahbadia #samayraina
लगता है कार कंपनियाँ के मालिकों का भी गला सूख गया है कहीं न कहीं उन्हें भी डर लगता है सरकार के खिलाफ जाने में जबकि कार मालिकों के लिए कस्टमर सर्वोपरि होते है फिर भी पता नहीं क्यों ऐसा कर रहें है
इथेनॉल बहस में कार कंपनियों की कोई आवाज़ नहीं है। उन्हें सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। उनके सर्विस स्टेशन में कारें आती होंगी। बाइक आती होगी। कुछ तो फीडबैक होगा। उन्हें पता होगा कि मंत्री सही बोल रहे हैं या नहीं। क्या उन्हें भी डर लग रहा है? इतनी बड़ी बड़ी कार कंपनियाँ हैं और चूँ तक नहीं ? डर इस देश का बुनियादी चरित्र हो गया है।
अंधभक्तों तुम्हारे लिए एक ब्रेकिंग ख़बर है, पिछले तीस साल से राम मंदिर का हिसाब किताब यासिन अंसारी देखते थे, है ना ब्रेकिंग न्यूज़।
तुम्हारी बुद्धि तलवो मै है। 😎
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अयोध्या के रहने वाले यासिन अंसारी राम मंदिर आंदोलन और बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े एक बेहद खास और दिलचस्प व्यक्ति रहे हैं।
उनके बारे में कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
राम चबूतरे की देखरेख और हिसाब-किताब: यासिन अंसारी के पूर्वज और वे स्वयं लंबे समय तक उस परिसर के 'राम चबूतरे' के सेवादारों (पुजारियों) के लिए आने वाले राशन, चढ़ावे और अन्य खर्चों का पूरा हिसाब-किताब रखते थे।
पीढ़ियों का रिश्ता: उनका परिवार पीढ़ियों से राम चबूतरे के निर्मोही अखाड़े के साधु-संतों से जुड़ा रहा। उनके पिता और दादा भी मंदिर के साधुओं के लिए सामान लाने और वित्तीय लेखा-जोखा संभालने का काम करते थे।
सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल: एक मुस्लिम होते हुए भी हिंदू धर्मस्थल और वहां के संतों के साथ उनका यह जुड़ाव अयोध्या की साझी संस्कृति और आपसी भाईचारे (गंगा-जमुनी तहजीब) का एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है।
अब चुल्लु भर पानी मै डूब मरो चंदाचोरो।
@avidandiya जी सर सफाया तय है अगर आपने बोल दिया तो कन्फर्म है कही सालों से सुनते आ रहा हूँ आपको आपकी बात में दम तो होता है जितना मैंने आपको सुना है @avidandiya