अभाविप उत्तराखंड प्रान्त का चार दिवसीय प्रान्त अभ्यास वर्ग विवेकानंद इंटर कॉलेज रानीधारा अल्मोड़ा मे संपन्न हुआ l जिसमे अभाविप के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री एस. बालकृष्ण, प्राज्ञिक विद्यार्थी परिषद् नेपाल राष्ट्रीय संगठन सचिव श्री रमेश कंडेल,
भुवनेश्वर में 29 से 31 मई 2026 तक सम्पन्न हुई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक के संदर्भ में दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद द्वारा पारित विभिन्न प्रस्तावों एवं आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भी मीडिया के समक्ष रखी गई।
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भुवनेश्वर में अभाविप की “केंद्रीय कार्यसमिति बैठक व आयाम, कार्य एवं गतिविधि बैठक” सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
बैठक में संगठनात्मक विषयों, आगामी कार्ययोजना एवं विभिन्न आयामों की गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
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Behind the scenes in Bhubaneswar!
From day-and-night preparations to welcoming karyakartas, the dedication on the ground is unmatched. Ready for a historic meet!
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At the press meet ahead of ABVP NEC 2026, National General Secretary Dr. Virendra Singh Solanki addressed the media and shared important insights on the upcoming National Executive Council in Bhubaneswar, Odisha.
Video Credit : ANI
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भगवान जगन्नाथ की पावन धरा ओडिशा के भुवनेश्वर में 29–31 मई को आयोजित होने जा रही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद–2026 से पूर्व आयोजित केंद्रीय कार्यसमिति बैठक की एक झलक।
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अल्मोड़ा के पवित्र कसार देवी मंदिर के दर्शन किए। इस आध्यात्मिक स्थान ने मन को शांति और ऊर्जा से भर दिया। 🚩
कसार देवी मंदिर, जिसे अपनी रहस्यमयी ऊर्जा और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है।
सिविल सेवा परीक्षा–2025 में सफलता प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
यह उपलब्धि आपकी अथक मेहनत, अनुशासन, धैर्य और अटूट संकल्प का परिणाम है। यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति आपकी नई जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है।
हमें विश्वास है कि आप सभी राष्ट्र सेवा के इस गौरवपूर्ण पथ पर अग्रसर होते हुए ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ देश और समाज की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे तथा जनसेवा के माध्यम से भारत के उज्ज्वल, सशक्त और समृद्ध भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की ओर से सभी सफल अभ्यर्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।
Nanda devi Mandir: अल्मोड़ा में है मां नंदा देवी का प्राचीन मंदिर, भक्तों को सपने में देती हैं दर्शन!
उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में मां नंदा देवी का एक प्राचीन मंदिर है. यहां मां नंदा देवी को शैलपुत्री का रूप माना जाता है ।
अल्मोड़ा का ऐतिहासिक नंदा देवी मंदिर, कुमाऊं क्षेत्र की आराध्य देवी (नंदा और सुनंदा) को समर्पित 1000 वर्ष से अधिक पुराना प्रसिद्ध मंदिर है, जो शहर के केंद्र में स्थित है। चंद राजाओं द्वारा निर्मित यह मंदिर अपनी भव्य पत्थर की नक्काशी के लिए जाना जाता है ।
स्थापत्य कला: मंदिर में कुशल कलाकारों द्वारा की गई बेहतरीन पत्थर की नक्काशी और अद्भुत काम देखने को मिलता है।
मंदिर दर्शन का समय: सुबह और शाम की आरती यहाँ का प्रमुख आकर्षण है। यह स्थान सुबह जल्दी से लेकर देर शाम तक भक्तों के लिए खुला रहता है।
नंदा देवी मंदिर, अल्मोड़ा की विशेषताएं:
पौराणिक महत्व: यह मंदिर भगवान शिव के प्रवेश द्वार के समीप स्थित है, जहाँ मां नंदा देवी को आदि शक्ति माँ भगवती के रूप में पूजा जाता है।
इतिहास: माना जाता है कि 1670 के आसपास चंद वंश के राजा बाज बहादुर चंद ने इस पवित्र स्थान को स्थापित किया
प्रेस विज्ञप्ति :
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सभी विद्यालयों में नि:शुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने संबंधी माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश स्वागतयोग्य: अभाविप
अभाविप का 'ऋतुमति अभियान' मासिक धर्म संबंधी जागरूकता के लिए दे रहा महत्वपूर्ण योगदान
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा देश के समस्त विद्यालयों में नि:शुल्क सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता, कार्यात्मक शौचालयों एवं मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता सुनिश्चित करने संबंधी दिए गए निर्देशों का स्वागत करती है। न्यायालय द्वारा मासिक धर्म स्वच्छता को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार तथा अनुच्छेद 21(ए) के अंतर्गत शिक्षा के अधिकार से जोड़कर देखना नारी स्वास्थ्य, गरिमा एवं शैक्षिक निरंतरता की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरगामी निर्णय है।
अभाविप की लंबे समय से यह स्पष्ट मांग रही है कि मासिक धर्म स्वच्छता को किसी सामाजिक संकोच या कलंक के रूप में नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सम्मान एवं आवश्यक व्यवस्थाओं की उपलब्धता के दायित्व के रूप में देखा जाना चाहिए। आज भी देश के अनेक क्षेत्रों में सैनिटरी सुविधाओं के अभाव में छात्राएँ विद्यालय छोड़ने को विवश होती हैं अथवा गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैं। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय ऐसे सभी अवरोधों को दूर करने की दिशा में एक सशक्त संवैधानिक हस्तक्षेप है, जो सामाजिक न्याय एवं लैंगिक समानता को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
उल्लेखनीय है कि अभाविप द्वारा बीते कई वर्षों से शैक्षणिक संस्थानों तथा समाज में महिला स्वास्थ्य तथा मासिक धर्म संबंधी जागरूकता के लिए संचालित ‘ऋतुमति अभियान’ ने इस संबंध में व्यापक जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है।इस अभियान के माध्यम से अभाविप देशभर में मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लाखों वंचित महिलाओं एवं बालिकाओं तक नि:शुल्क सैनिटरी नैपकिन पहुँचाने का कार्य कर रही है। इस अभियान के अंतर्गत समय-समय पर अखिल भारतीय स्तर पर सर्वेक्षण किए गए हैं, जिनके माध्यम से जमीनी वास्तविकताओं के आधार पर प्रभावी कार्ययोजनाएँ तैयार की जाती रही हैं। इन पहलों के माध्यम से शैक्षणिक परिसरों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनों की स्थापना, स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालयों की उपलब्धता तथा छात्राओं के स्वास्थ्य एवं गरिमा से जुड़े विषयों को अभाविप ने सदैव राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में रखा है।
इसी क्रम में अभाविप द्वारा फरवरी-मार्च 2025 में देशभर में छात्रा सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 38,072 छात्राओं ने सहभागिता की। यह सर्वेक्षण शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं स्वावलंबन, इन चार प्रमुख विषयों पर आधारित था, जिसका उद्देश्य छात्राओं के जीवन से जुड़े इन पहलुओं का वास्तविक आकलन करना था। इसके अतिरिक्त, अभाविप ने दिनांक 10 मार्च 2025 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय छात्रा संसद के माध्यम से महिला स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा एवं स्वावलंबन से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा कर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को मांग-पत्र सौंपा था। इस मांग-पत्र में शैक्षणिक संस्थानों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन की अनिवार्यता तथा विद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छ एवं पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की प्रमुख माँग सम्मिलित थी।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय मंत्री सुश्री क्षमा शर्मा ने कहा,“मासिक धर्म स्वच्छता केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि छात्राओं की गरिमा, आत्मसम्मान और शिक्षा से निरंतर जुड़ाव का प्रश्न है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्देश देश की करोड़ों बालिकाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला है और अभाविप द्वारा वर्षों से किए जा रहे प्रयासों को संवैधानिक समर्थन प्रदान करता है।”
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय मंत्री सुश्री पायल किनाके ने कहा,“माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्देश विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं के दैनिक जीवन से जुड़ी एक व्यावहारिक आवश्यकता को पहचानता है। इससे शिक्षा के मार्ग में आने वाली अनावश्यक बाधाओं को दूर करने में सहायता मिलेगी।अभाविप जमीनी स्तर पर कार्यरत एक छात्र संगठन के रूप में यह अनुभव करती रही है कि मासिक धर्म स्वच्छता की अनुपलब्धता छात्राओं को असमान परिस्थितियों में खड़ा कर देती है। इसी अनुभव के आधार पर अभाविप द्वारा वर्षों से जागरूकता एवं सहयोगात्मक पहलें संचालित की जाती रही हैं। अभाविप इस निर्णय के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक जनजागरूकता, संस्थागत सहयोग एवं सामाजिक संवेदनशीलता को मजबूत करने में अपनी रचनात्मक भूमिका निभाएगी।”
UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक !
अभी 2012 वाले पुराने नियम ही लागू रहेंगे।
जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा :
★ हम जाति विहीन समाज की तरफ बढ़ रहे हैं या पीछे जा रहे हैं?
★ हमने देखा है कि हॉस्टल में छात्र एक साथ रहते हैं. नए नियमों से अलग हॉस्टल बन जाएंगे, ऐसा नहीं होना चाहिए।
★ संविधान ने सबको संरक्षण दिया है, सभी नागरिकों की रक्षा होनी चाहिए, लेकिन नया नियम भ्रमित करता है और समाज में भेदभाव पैदा करता है, इसमें सिर्फ OBC, SC और ST की बात की गई है।
प्रेस विज्ञप्ति -
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उच्चतम न्यायालय का यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 पर स्थगन का आदेश स्वागत योग्य, सभी वर्गों से सौहार्द बनाए रखने की अपील: अभाविप
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानो में समता संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 पर स्थगन आदेश का स्वागत करती है। यह आदेश वर्तमान में देशभर में यूजीसी समता नियमों में अस्पष्टता को लेकर चल रही भ्रांति को रोकते हुए संवैधानिक समता और समानता के अंतर्निहित मूल्यों के पक्ष में महत्वपूर्ण है और यह आदेश अभाविप द्वारा उक्त विषय पर जारी वक्तव्य में यूजीसी नियमों पर स्पष्टीकरण की मांगों के भी अनुरूप है। इस विषय संबंधी वर्ष 2012 के विनियम पूर्ववत जारी रहेंगे।
अभाविप का मानना है कि यूजीसी और सभी शैक्षणिक संस्थानों को लोकतंत्र की उस अंतर्निहित भावना को अक्षुण्ण रखना चाहिए, जहाँ प्रत्येक नागरिक के पास समान अधिकार हों और भारत भेदभाव मुक्त तथा समता युक्त बने। यह बात अभाविप ने अपने पूर्व वक्तव्य में भी स्पष्ट करते हुए जारी किये गए विनियम पर स्पष्टता और संतुलन बनाए रखने की मांग की थी। माननीय उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ द्वारा इस निर्णय की काफी आवश्यकता थी क्योंकि वर्तमान परिदृश्य में इस विनियम को लेकर काफी भ्रांति भी फैली थी, जिससे विभिन्न सामाजिक वर्गों के मध्य वैमनस्य पैदा होने की आशंका थी। अभाविप का यह स्पष्ट मत है कि शैक्षिक परिसर में सदैव ही सकारात्मक, भेदभावमुक्त एवं समतायुक्त परिवेश रहे और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा मिले।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, "माननीय उच्चतम न्यायालय का यूजीसी रेगुलेशन पर स्थगन का आदेश स्वागतयोग्य है। अभाविप सदैव से शैक्षणिक परिसरों में समता, सौहार्द एवं समान अवसरों की पक्षधर रही है। यूजीसी द्वारा जारी किए गए विनियमों में स्पष्टता एवं संतुलन का अभाव छात्रों के बीच भ्रम और असंतोष को जन्म दे सकता है। न्यायालय का यह हस्तक्षेप समयोचित है और इससे संवाद व विमर्श के लिए एक सकारात्मक वातावरण बनेगा। अभाविप सभी वर्गों, छात्रों एवं शिक्षण संस्थानों से अपील करती है कि वे शांति, संयम और सौहार्द बनाए रखें तथा राष्ट्रहित में रचनात्मक संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।"
प्रेस विज्ञप्ति
*यूजीसी के 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम, 2026' का उद्देश्य महत्वपूर्ण, परंतु विनियमों में स्पष्टता और संतुलन आवश्यक : अभाविप।*
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी अधिसूचना "विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026" का उद्देश्य महत्वपूर्ण है, परंतु इन विनियमों में स्पष्टता और संतुलन अत्यंत आवश्यक है।अभाविप मानती है कि यूजीसी तथा सभी शैक्षणिक संस्थानों को लोकतंत्र में अंतर्निहित भावना को अक्षुण्ण रखना चाहिए, जहाँ प्रत्येक नागरिक के पास समान अधिकार हों और भारत भेदभाव मुक्त तथा समता युक्त बने।
अभाविप सदैव ही शैक्षिक परिसरों में सकारात्मक और समतायुक्त परिवेश बनाने की दिशा में कार्य करती रही है और लोकतांत्रिक मूल्यों के संवर्धन की पक्षधर रही है। आगामी वर्षों में 'विकसित भारत' की संकल्पना को सिद्ध करने के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। यूजीसी के इस समता संबंधी विनियम के कुछ प्रावधानों और शब्दावली को लेकर समाज, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच जो अस्पष्टता और भ्रांतियाँ उत्पन्न हो रही हैं, इनपर यूजीसी को त्वरित संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की विभाजनकारी स्थिति उत्पन्न न हो सके। ध्यातव्य हो, यह विषय वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है अतः अभाविप मानती है कि यूजीसी को इस संदर्भ में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए न्यायालय में शीघ्र हलफनामा दाखिल करना चाहिए।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, "शैक्षणिक परिसरों में सौहार्द एवं समानता सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है, जिसके लिए अभाविप ने सदैव प्रयास किए हैं। शैक्षणिक परिसरों में सभी वर्गों के लिए सामाजिक समानता होनी चाहिए तथा परिसरों में किसी भी प्रकार के भेदभावों के लिए कोई स्थान नहीं हैं। इस विनियम को लेकर विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं हितधारकों के मध्य भ्रांतियाँ व्याप्त हैं, जिन पर यूजीसी को सभी हितधारकों से संवाद करते हुए संबंधित भ्रांतियों को दूर करने हेतु तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने तथा सभी विद्यार्थियों के लिए भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने हेतु समाज के सभी वर्गों के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।"
#UGC
#UGCRules #abvp
*जो युवा राष्ट्र के लिए धड़कता है, वही इतिहास रचता है।*
स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के उपलक्ष पर उन्हें विनम्र अभिवादन,
राष्ट्रीय युवा दिवस की पूरे देश को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उत्तराखंड परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं,
राष्ट्र शक्ति-छात्र शक्ति
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