@jitanrmanjhi श्री जीतन राम मांझी जी आप दोनों बाप बेटा, और बहु एवं माननीय विधायक ज्योति मांझी जी आज ही सरकार पर दवाब डालिये कि आरक्षण में वर्गीकरण करो यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो आप सब अपने पद से इस्तीफा दे दीजिए। और अनारक्षित सीट पर चुनाव जीतकर बता दीजिएगा कि हम चारों को आरक्षण नहीं चाहिए
माननीय बहन कुमारी @Mayawati जी.
अपनी बेटी का इलाज कराने की अब मुझमें क्षमता नहीं रही. इसलिए अब तो बस आपका ही सहारा है. कृपया मुझ गरीब की मदद करें. मैं आपका बहु�� पुराना कार्यकर्ता हूँ.
@Mayawati
@jitanrmanjhi सर आप कब बौद्ध धर्म को अपना रहे है मैं भी अपना चाहते है लेकिन मै आपको गुरु मानते है इसलिए आप जिसदिन बौद्ध धर्म ग्रहण करिया उसी दिन हम भी बौद्ध धर्म को अपनाएंगे साथ बहुत से दलित समाज लोग अपनाएंगे
करोड़ों बहुजनों की आइकन, नारीवाद का प्रतिरूप, समता मूलक समाज की रचना के लिए सतत संघर्ष करने वाली और मनुवाद के खिलाफ डटे रहने वाली बहन मायावती जी को जन्मदिन की ढेरों बधाई।
आप स्वस्थ रहें बहन @Mayawati जी
माननीय उप मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी आप से निवेदन है आप स्वास्थ विभाग के डाटा एंट्री ऑपरेटर जो एक मजदूर के तरह काम कर रहे है @samrat4bjp उस ध्यान दीजिए वेतन सरकार 28000देता है ,लेकिन umila एसेंसी कंपनी 13000 ही वेतन दे रहे है @mangalpandeybjp
डाटा इंट्री ऑ��रेटर का वेतन होता 660 *26 =17160 लेकिन नहीं मिलता है 139911 ही मिल रहा है @Kanchanyadav000 @NitishKumar सर 🙏 इस पर ध्यान दीजिएसर हम मजदूर लोग पर है मारा जा रहा है @samrat4bjp उर्मिला जैसे एजेंसी को हटाइए सर विभाग वेतन दीजिए
@NitishKumar बढ़ा हुआ अतिकुशल मजदूर का बेटन क्यो�� नहीं दिया जा रहा माननीय मुख्यमंत्री जी जब आप अपने लिखित रूप बेटन बड़ा दिए लेकिन urimila इंटरनेशन जैसे एजेंसी औरत सोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटर का बढ़ा हुआ वेतन नहीं दे रहे है आप कुछ सर इस पर ध्यान दीजिए
जो भी आज मेरे साथ हो रहा है, चाहे गालियाँ हों, धमकियाँ हों, जातिवाद हो या लैंगिक भेदभाव; इन सब से उबरने में मज़बूत भूमिका रही ओमप्रकाश वाल्मीकि जी की लेखनी की, उनकी किताब “दलित साहित्य का सौंदर्यशास्त्र” की।
चुनाव से पहले, चुनाव के दौरान और उसके अंत होने के बाद तक मैं इस किताब को अपने साथ रखे रही। बार-बार उसे पलटा, और उस किताब की पंक्ति, जिसने मुझ पर गहरा प्रभाव छोड़ा था, वह इस प्रक��र आज मेरी ताक़त बनेगी, यह सोचा भी नहीं था।
वाल्मीकि जी ने लिखा~
“कुछ आलोचक दलित साहित्य में गंदी और अश्लील भाषा की ओर इशारा करते हैं। उन्हें लगता है कि साहित्य और भाषा ‘पवित्र’ होनी चाहिए, भले ही उसमें बनावटी भाषा, जो अभिजात्य संस्कारों से रची-बसी हो, का प्रयोग करना पड़े ,लेकिन यह उचित नहीं। यातनाओं से उपजी आक्रोशित भाषा एक तेज़ औज़ार की तरह भीतर तक झकझोर देती है।”
जब हम गंदी गलियों से निकलते हैं, जहाँ आसपास बच्चे नग्न घूमते हैं, शरीर पर कपड़े नहीं, खाने को अन्न नहीं, “एक रात खाया, अगले सुबह सोचा” वाली स्थिति से उभरते हैं और आप हमसे यह उम्मीद करते हैं कि हम मीठा, मधुर मिश्रित बोलें, तो वह संभव नहीं। दर्द और पीड़ा में मिठास नहीं होता, आक्रोश होता है।
और जिस वक़्त हमारी पीड़ाओं को नकारा जाता है, हमारे लिए ‘चोरी-चमारी’ जैसे शब्द इस्तेमाल होते हैं, कहा जाता है “निकलो यहाँ से”, “इसके साथ बैठ नहीं सकते”, “इसको हटाओ स्क्रीन से”, “चारा खाती है”- या कहा जाता है “कितना जाति की बात करिएगा?” तो फिर भूल जाइए कि हम मीठा बोलेंगे।
प्रतिकार होगा और मेरे शब्द सिसकेंगे नहीं, चोट करेंगे, मारक शक्ति के साथ। चोट हर उस व्यवस्था पर, जो हमें शोषित बनाए रख���ा चाहती है।
नमन मेरे प्रिय कवि! आपकी कलम से निकले शब्द मेरी ऊर्जा का स्रोत हैं।
परसों से हम तीन वंचित महिलाओं की ट्रॉलिंग हो रही है, इसमें कई “पत्रकार” भी शामिल है।
गंदी गालियों के साथ बलात्कार तक की धमकी दी गई।
“मनीष झा” और “अंकितनारायण दुबे” जैसे लोग हमें मजबूत कर रहे है, पितृसत्ता और मनुवाद के खात्मे तक ये लड़��ई जारी रहेगी।