विजयादशम्याः पर्वणः भवतां भवतीनां च सर्वेषां कृते हार्दिक्यः शुभकामनाः।
विजयादशमी विजयताम्।।
यतो धर्मस्ततो जयः!
अन्याय पर न्याय, दुराचार पर सदाचार एवं असुरत्व पर देवत्व, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य के विजयपर्व विजयदशमी की अनंत शुभकामनाएँ ।
सियावर राम चंद्र की जय 🙏🏻
Service Update
Due to security reasons, the entry and exit at the following metro stations will remain closed from 09:00 PM on 9th October, 2026 and continuing on 10th October, 2026 till further notice. However, interchange facility will remain available at all the concerned metro stations except New Delhi metro station.
THIS IS TOP NOTCH CREATIVITY 🔥
SP started the AI video war, BJP is just retaliating, and now Tonti and his party will cry victim.
Perfect way to deliver the message 💀😂😂
An MIT Media Lab study used EEG to track what happens in the brain when people write with ChatGPT rather than on their own. Fifty four students completed essay tasks while wearing electrode caps. One group used ChatGPT, one used a search engine, and one used no tools. Across sessions, the ChatGPT group showed the weakest neural connectivity in networks linked to memory, attention, and analytical work. They also had more trouble recalling what they had just written and produced more generic prose. The authors describe this as a kind of cognitive debt: the tool does the synthesizing, and the brain stays quieter [1].
The same experiment points to a better order of use. Students who first wrote unaided and only later switched to ChatGPT showed stronger recall and more widespread brain activity than students who started with the model and then had to work alone. In other words, the model helped more when it scaffolded thinking that was already underway than when it replaced that thinking from the start. The practical lesson is not that large language models should be banned. It is that they work best as a second pass, after the writer has already done the hard part of forming and remembering an argument [1].
[Kosmyna, N., Hauptmann, E., Yuan, Y. T., Situ, J., Liao, X. H., Beresnitzky, A. V., Braunstein, I., & Maes, P. (2025). Your Brain on ChatGPT: Accumulation of Cognitive Debt when Using an AI Assistant for Essay Writing Task. arXiv. DOI: 10.48550/arXiv.2506.08872]
देवों के देव महादेव को समर्पित पवित्र श्रावण मास के आरम्भ पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
यह पावन मास हम सभी के जीवन में भक्ति, सेवा, संयम और सदाचार का संचार करे तथा भगवान भोलेनाथ की कृपा से सुख, समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य बना रहे, ऐसी कामना करती हूँ।
हर हर महादेव! 🙏
ॐ नमः शिवाय! 🙏
भगवान शिव की आराधना, श्रद्धा, तप और भक्ति के पावन मास श्रावण के शुभारंभ पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
देवाधिदेव महादेव से प्रार्थना है कि वे सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करें तथा विश्व का कल्याण करें।
हर हर महादेव! 🚩
All these NEET aspirants are above 30 years of age.
Neither they are candidates nor they are parents.
What are they doing at protest site ?
Well planned and executed chaos.
पंच केदार: पांडवों के प्रायश्चित, महादेव की करुणा और मोक्ष का दिव्य पथ
"जहाँ अहंकार समाप्त होता है, वहीं से शिव की कृपा आरंभ होती है।"
महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। धर्म की विजय हुई, लेकिन इस विजय की कीमत असंख्य वीरों के प्राणों से चुकाई गई। अपने ही बंधु-बांधवों, गुरुजनों और संबंधियों के वध का दुःख पांडवों के हृदय को भीतर ही भीतर जलाने लगा। विजय का उत्सव उनके लिए अर्थहीन था, क्योंकि आत्मा पर गोत्र-हत्या और ब्रह्म-हत्या का बोझ था।
जब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से इस पाप से मुक्ति का मार्ग पूछा, तब श्रीकृष्ण ने कहा—
"यदि इस संसार में कोई तुम्हें इस पाप से मुक्त कर सकता है, तो वे केवल देवों के देव महादेव हैं। उनकी शरण में जाओ।"
महादेव क्यों हुए अदृश्य?
पांडव पहले काशी पहुँचे, परंतु भगवान शिव उनसे अप्रसन्न थे। महाभारत के भीषण रक्तपात से वे विरक्त हो चुके थे। इसलिए उन्होंने पांडवों को दर्शन नहीं दिए और हिमालय की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं की ओर चले गए।
लेकिन सच्चा भक्त अपने आराध्य की खोज कभी नहीं छोड़ता। पांडव भी हिमालय की कठिन घाटियों, बर्फीले मार्गों और दुर्गम शिखरों को पार करते हुए महादेव की खोज में निकल पड़े।
वृषभ रूप में महादेव और भीम की परीक्षा
भगवान शिव ने पांडवों की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए एक विशाल वृषभ (बैल) का रूप धारण किया और पशुओं के झुंड में मिल गए।
भीम ने अपनी विशाल काया से दो पर्वतों के बीच खड़े होकर मार्ग रोक दिया ताकि कोई पशु निकल न सके। सभी पशु निकल गए, लेकिन एक वृषभ वहीं ठहर गया। भीम समझ गए कि यही स्वयं महादेव हैं।
जैसे ही उन्होंने उस वृषभ को पकड़ने का प्रयास किया, भगवान शिव भूमि में समाने लगे। भीम ने पूरी शक्ति से बैल की कूबड़ पकड़ ली, लेकिन तब तक महादेव का शरीर भूमि में विलीन हो चुका था।
पांडवों की अटूट श्रद्धा, तप, समर्पण और पश्चाताप देखकर महादेव प्रसन्न हुए। वे अपने दिव्य स्वरूप में प्रकट हुए, पांडवों को दर्शन दिए और उनके समस्त पापों का नाश कर उन्हें मोक्ष का आशीर्वाद प्रदान किया।
पंच केदार की स्थापना
जब भगवान शिव वृषभ रूप में भूमि में समाए, तब उनके शरीर के विभिन्न अंग पाँच स्थानों पर प्रकट हुए। इन्हीं स्थानों पर पंच केदार स्थापित हुए—
🔱 केदारनाथ — भगवान की कूबड़ (पृष्ठभाग) की पूजा होती है।
🔱 तुंगनाथ — भगवान की भुजाओं की पूजा होती है। यह विश्व का सबसे ऊँचाई पर स्थित शिव मंदिर माना जाता है।
🔱 रुद्रनाथ — यहाँ भगवान के मुख के दर्शन होते हैं।
🔱 मध्यमहेश्वर — यहाँ भगवान की नाभि एवं मध्य भाग की पूजा की जाती है।
🔱 कल्पेश्वर — यहाँ भगवान की जटाओं की पूजा होती है।
पशुपतिनाथ से संबंध
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब भगवान शिव भूमि में अंतर्ध्यान हुए, तब उनका मस्तक नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ में प्रकट हुआ। इसलिए केदारनाथ और पशुपतिनाथ को एक ही दिव्य स्वरूप के दो पवित्र केंद्र माना जाता है।
पंच केदार यात्रा का आध्यात्मिक महत्व
हिंदू परंपरा में पंच केदार यात्रा केवल तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि की यात्रा मानी जाती है।
मान्यता है कि जो श्रद्धालु केदारनाथ के दर्शन के बाद तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर की यात्रा पूर्ण करता है, उसे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उसके पितरों को तृप्ति मिलती है और साधक मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होता है।
इस कथा का संदेश
पंच केदार की कथा हमें सिखाती है कि—
- पाप कितना भी बड़ा क्यों न हो, सच्चा पश्चाताप उसे क्षमा दिला सकता है।
- भगवान शिव दंड देने वाले नहीं, बल्कि करुणा और क्षमा के सागर हैं।
- अहंकार से नहीं, विनम्रता और समर्पण से ईश्वर की प्राप्ति होती है।
- कठिन तप, श्रद्धा और धैर्य के बाद ही दिव्य कृपा प्राप्त होती है।
आज भी हिमालय की गोद में स्थित पंच केदार केवल मंदिर नहीं हैं, बल्कि वे श्रद्धा, तप, त्याग, क्षमा और मोक्ष के जीवंत प्रतीक हैं। जो भी भक्त वहाँ पहुँचता है, वह केवल दर्शन नहीं करता, बल्कि स्वयं को महादेव के चरणों में समर्पित कर देता है।
हर-हर महादेव!
ॐ नमः शिवाय!
जय बाबा केदारनाथ 🙏🏻🔱