@INCIndia हजारों हजार लोगों के पास राम मंदिर के निर्माण हेतु प्रदत्त राशि की रसीद हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि वह पैसा ट्रस्ट के खाते में दर्ज नहीं है । ऐसे दानदाताओं की संख्या लाखों में हो सकती है।
ऐसा है तो भगवान श्री राम की राशि में हजारों हजार करोड़ की डकैती हुई है ।
I talked to Ms. Meenakshi Natarajan and several other senior Congress leaders yesterday when I learned of this most remarkable and astonishing rejection of her nomination papers by the Returning Officer.
This is, on the face of it, patently and blatantly illegal because no criminal case, in the eyes of the law, exists against Ms. Natarajan.
This is because, in a private complaint, which anyone can file against anyone, no criminal case comes into existence unless and until the magistrate or the concerned judge takes cognizance.
At the highest, in the present case of Ms. Natarajan, there is a notice by a court to her on a private complaint well before that court has taken cognizance, and indeed, the issue of cognizance is yet to be decided after hearing her by that court. So where is the question of a criminal case which she had to disclose?
This is well established by Indian jurisprudence, including a High Court judgment directly on point. It is not possible that the Returning Officer took an independent, objective, fair, and impartial stance; otherwise, there is no way in law her nomination could have been rejected..
I hope and trust that the Election Commission in Delhi, the central body, will exercise its inherent, administrative, and superior powers to reverse this decision or order. Otherwise, it would be a very serious violation of the level playing field principle.
It would create a highly skewed system in a democratic election, thereby affecting democracy and the basic structure itself.
There is still time, since today is the last day for withdrawal. No one can, and should, in a true democracy, be denied even the right to nominate oneself for the Rajya Sabha in this manner.
: @DrAMSinghvi ji Chairperson, AICC Law, RTI & HR Dept.
Spot the change!
Two identical objections
Two different verdicts
Madhya Pradesh
In case of Congress candidate Meenakshi Natrajan, Returning Order (RO) recorded that Natarajan “submitted an incomplete affidavit in Form 26 and concealed material facts”.
“This amounts to withholding complete information about the candidate from voters, and it stands established that incomplete information was presented in lieu of full disclosure,”
So her nomination form is rejected.
Jharkhand
In case of BJP backed candidate Parimal Nathwani, RO recorded:
Determination of the correctness, truthfulness or adequacy of disclosures in Form 26 is beyond the limited scope of scrutiny under section 35, except where the non-filing of the prescribed affidavit itself is established.
The prescribed affidavit has been filed. Questions regarding correctness or sufficient of disclosures are matters which may be examined in appropriate proceedings and do not furnish a ground for rejection of nomination at this stage.
Nomination form is accepted.
Legal validity of the Meenaxi Natrajan’s Nomination Paper rejection case by one of the most respected Lawyer in today’s legal profession in India Abhishek Manu Sanghvi. The decision of the Returning Officer is bad in law and absolutely partisan.1/n
कितनी सत्ता चाहिए BJP को?
कितनी सीटों से इनका पेट भरेगा?
कितना और नीचे गिरेंगे?
कितना और कलंकित होंगे?
कितनी और संस्थाओं का दम घोटें���े?
मध्यप्रदेश से काँग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन रद्द कर���ा BJP का एक और कुत्सित पैंतरा है
उनके नामांकन में किसी गलती या गैर-खुलासे का आरोप कोरी बकवास है और कांग्रेस से एक सीट छीनने की घटिया कोशिश है
जब हमारे MLA नहीं तोड़ पाये तो नामांकन खारिज कराने की नीचता पर उतर आए
संविधान को ताक पर रख कर यह लोकतंत्र की दिनदहाड़े हत्या है
अगर आपकी लोकतंत्र में ज़रा सी भी आस्था है तो इसका विरोध कीजिए - क्योंकि BJP के लालच का कोई अंत नहीं है - और इसका ख़ामियाज़ा मेरा द��श उठा रहा है
• वोट चोरी करते हैं।
• वोट चोरी से काम नहीं चलता तो विधायक चोरी करते हैं।
• विधायक चोरी से भी काम नहीं चलता तो सांसद चोरी करते हैं।
और सांसद चोरी से भी काम नहीं चलता तो पार्टियां तोड़ने का षड्यंत्र रचते हैं।
भारती�� लोकतंत्र की हत्या करने में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ रही है।
Today, appeared before the ECi alongwith Sh. @kcvenugopalmp , Sh. @DrAMSinghvi , Sh. @Jairam_Ramesh , Sh. @VTankha , Smt @DeepaDasmunsi and Ms. Meenakshi Natarajan to petition against the brazenly illegal rejection of Nomination Papers of Ms. Natarajan by R.O in Madhya Pradesh.
कांग्रेस के पास मध्यप्रदेश में राज्य सभा सांसद चुनने के लिए बहुमत से अधिक वोट हैं । जिस जोर जबरदस्ती से सुश्री मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किया गया है, वह हर देश प्रेमी व संविधान प्रेमी की लिए एक भयावह संदेश है।
यह प्रजातंत्र और संसदीय प्रणाली को फासीवाद के बुलडोज़र के नीचे रौंद देने का सबूत है। अगर संविधानिक परिपाटियों की बीच चौराहे ऐसे हत्या की जाएगी तो वो दिन दूर नहीं जब भारतीय लोकतंत्र भी पूरी त���ह चरमरा जाएगा ।
उम्मीद है कि @ECISVEEP सभी पहलुओं पर विचार कर न्याय के पक्ष में निर्णय देंगे ।
मीनाक्षी नटराजन का मामला इतना जटिल है कि आयोग का फैसला आज नहीं आ सका? आज दस जून है। फैसला कुछ भी होता, दस जून की सरकारी पार्टी पर असर पड़ ही जाता। एक सीट पर फैसला पलट देने से आयोग की विश्वसनीयता वापस नहीं ��ोने वाली बल्कि सवाल और उठेंगे कि यहाँ ऐसा हुआ तो बाकी जगहों पर और क्या हुआ होगा।आपको क्या लगता है? 11 जून को भारत को एक और अनिल मसीह मिलेगा ? या मामला लंबे समय के लिए सुप्रीम कोर्ट चला जाएगा?
कितनी कायर है मोदी सरकार… बदला लेना तो दूर रहा... भारतीय जहाज पर हुए अमरीकी हमले का... विरोध तक नहीं कर पा रही है...
ये मोदी सरकार ही है... जो वीरों से भरे इस देश को... कायरों का देश साबित कर रही है...
भाजपा द्वारा लोकतंत्र के चीरहरण के खिलाफ मध्य प्रदेश कांग्रेस अगले एक महीने में:
• सभी जिलों में भाजपा कार्यालयों का घेराव करेगी।
• भोपाल में मुख्यमंत्री ��िवास का घेराव करेगी।
• दिल्ली में सभी विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन के समक्ष मार्च निकालेगी।
यह लड़ाई रुकेगी नहीं। 📕
मोहन यादव जी को पता था कि यदि मीनाक्षी नटराजन जी राज्यसभा पहुंचती हैं, तो भाजपा का महिला सशक्तिकरण का दिखावटी चेहरा बेनकाब हो जाएगा।
हमारी जीत सुनिश्चित थी, यही कारण है कि लोकतांत्रिक मुकाबले में हार की आशंका से घबराई भाजपा ने वोट चोरी के बाद सीट चोरी का रास्ता चुना।
📍भोपाल
लोक तंत्र की सरेआम हत्या हो रही है ।
मीनाक्षी नटराजन जी @MNatarajanINC के मामले में रिटर्निंग ऑफिसर (RO) का फैसला विकृत है, कानूनी रूप से गलत है, जिसका समर्थन कानूनन नहीं किया जा सकता ।
• रिटर्निंग ऑफिसर ने जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन रद्द कर दिया, वो आधार कानून में Exist ही नहीं करता। ऐसा कोई क्रिमिनल केस था ही नहीं, जिसका मीनाक्षी जी खुलासा कर सकती थीं
• कोर्ट से एक नोटिस आया, जिसमें म��नाक्षी जी से कहा गया कि आप आकर हमें बताइए कि हम केस का संज्ञान लें या नहीं
• मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना एक प्राथमिक चरण होता है और उसमें ये फैसला किया जाता है कि ये केस आगे चलना चाहिए या नहीं। बिना संज्ञान के कोई भी क्रिमिनल केस जन्म ही नहीं लेता है
• मजे की बात ये है कि चुनाव आयोग के कानून में स्पष्ट लिखा है कि आपको सिर्फ वो खुलासा करना है, जिसमें अपराध अगर सिद्ध हो तो सजा दो साल से ज्यादा हो और जिसमें charges फ्रेम हो चुके हैं। इसे देखने का उत्तरदायित्व RO का होता है
• इस मामले में मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया है। मीनाक्षी जी को सुनने के बाद मजिस्ट्रेट संज्ञान लेंगे, उसके बाद जांच होगी और फिर चार्जशीट तैयार होगी और अगर चार्जशीट बनेगी, तब जाकर charges फ्रेम होंगे
• यानी इस मामले में आगे के तीन चरण बचे हैं। मजिस्ट्रेट ने संज्ञान तक नहीं लिया है, मगर RO ने मान लिया कि ये एक क्रिमिनल क���स लंबित ��ै
इसके अलावा, हमने कई और मुद्दे रखे और कहा कि ऐसी बेहूदी गलती के कारण राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता है।
ये गणतंत्र के सिद्धांतों के विरुद्ध है और not a level playing field बनता है। ये संविधान के मूल ढांचे को भी विकृत करता है।
हमारी माँग है कि चुनाव आयोग के पास पूरा अधिकार क्षेत्र है कि वे RO के फैसले को रिवर्स कर दें या आदेश निरस्त कर दें। चुनाव आयोग पहले भी हरियाणा और गुजरात के मामलो�� में हस्तक्षेप कर चुका है।
फ़र्ज़ी आरोपों और राजनैतिक विद्वेष में एक शानदार समाचार संस्थान को नष्ट कर दिया गया। प्रवीर पुरकायस्थ जैसे वरिष्ठ पत्रकार को लंबी प्रताड़ना झेलनी पड़ी और कितने ही पत्रकारों को संस्थान छोड़ना पड़ा।
हाईकोर्ट ने Newsclick के ख़िलाफ़ इस पूरी प्रक्रिया को क़ानून का दुरुपयोग बताया है।
मीनाक्षी नटराजन का नॉमिनेशन रद्द करने की ज़िद पर अगर चुनाव आयोग अड़ा र���ता है तो पूरे विपक्ष को इसके ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़ देना चाहिए।
सिर्फ़ कांग्रेस का नहीं, यह हर सत्ता विरोधी पार्टी और नागरिक का संघर्ष है।
“मैं #ElectionCommission और उनके officers को साफ कह रहा हूँ…
आप जो कर रहे हो गलत कर रहे हो !
ये Treason है..देश के खिलाफ़ है !
समय आएगा हम आपको पकड़ेंगे..बचने वाले नहीं हो !”
@RahulGandhi 🔥🔥🔥
दोनों फैसलों में अंतर बताइये।
दोनों मामलों में आपत्ति एक ही थी कि फॉर्म 26 में पूरा एफिडेविट नहीं भरा गया है।
मध्य प्रदेश
कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म रद्द करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने क��ा है:
प्रत्याशी ने फॉर्म 26 में अधूरा एफिडेविट भरा है। RO का कहना है कि ये यह मतदाताओं से उम्मीदवार के बारे में पूरी जानकारी छिपाने के समान है, और यह स्थापित हो चुका है कि पूर्ण जानकारी का खुलासा करने के बजाय अधूरी जानकारी प्रस्तुत की गई थी।
(नामांकन रद्द कर दिया गया)
झारखंड
बीजेपी समर्थित प्रत्याशी परिमल नाथवानी का नामांकन फॉर्म स्वीकार करते हुए RO ने कहा है:
फॉर्म 26 में दी गई जानकारी सही, या सिद्ध या पर्याप्त है, इसे धारा 35 के तहत तय नहीं किया जा सकता है। ये स्क्रूटिनी की सीमित जांच के दायरे से बाहर है। इस जांच में सिर्फ यह तय होना है कि एफिडेविट जमा किया गया है या नहीं।
परिमल नथवानी द्वारा एफिडेविट दाखिल किया जा चुका है। जानकारी सही है या पर्याप्त, इसकी जांच बाद में उपयुक्त कानूनी कार्यवाही में ही की जा सकती है। ये मुद्दे इस चरण में नामांकन पत्र को खारिज करने का आधार प्रदान नहीं करते। (नामांकन स्वीकार किया गया)
My take on legal validity of the Meenaxi Natrajan Ji’s nomination paper rejection case. The decision of the Returning Officer is indeed poor and absolutely partisan.