लोक संपर्क, लोक संग्रह और लोक शिक्षण के माध्यम से समाज में दायित्व बोध जागृत करने के कार्य में विगत 79 वर्षों से अनवरत संलग्न श्री क्षत्रिय युवक संघ के 80वें स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं..
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महान विचारक, दार्शनिक और समाजसेवी पूज्य तनसिंह जी की पुण्यतिथि पर उनकी प्रेरणादायी स्मृतियों को बारंबार नमन!
उन्होंने राजनीति को समाज के आत्मिक विकास से जोड़ा। एक महर्षि की भांति जीवन यात्रा करते हुए आपने श्री क्षत्रिय युवक संघ जैसी अद्वितीय संस्था की स्थापना कर जीवन मूल्यों और उद्देश्यों को नई दिशा दी।
आप अमर हैं! कोटिश: प्रणाम्।
@JioCare 29 सितंबर को रिलोकेशन की रिक्वेस्ट की थी , सूरत सिटी में भी सर्विस जीरो हैं
कस्टमर केयर में कॉल नहीं लगता ,
कोई भी जिओफाइबर मत लगवाना
एडवांस पेमेंट तो भूलकर भी मत करना!
“मुझे बदनाम करने से
तुम्हारा काम बनता है
तो चलो एक अहसान और सही”…अशोक गहलोत जी अपने पुत्र का राजनीतिक करियर बनाने के लिए संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी प्रकरण में मेरा नाम घसीटकर मुझे कलंकित करने के प्रयास में बुरी तरह असफल रहे हैं। माननीय उच्च न्यायालय ने भी मुझे दोषमुक्त माना है। गहलोत जी स्वयं भली-भांति जानते थे कि मैं निर्दोष हूँ। मेरा एकमात्र ‘दोष’ यह है कि मेरे परिश्रम और जोधपुरवासियों के मुझसे अपार स्नेह से न केवल उनके पुत्र, बल्कि स्वयं उनकी राजनीति पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
मैं @ashokgehlot51 जी से आग्रह करता हूँ कि वे संजीवनी प्रकरण के पीड़ितों की वेदना का उपयोग अपने राजनीतिक स्वार्थ और पुत्र की देवतुल्य जनता द्वारा रचित पराजय की खीझ निकालने के लिए न करें। इसके बजाय यदि वे सरकार का मुखिया रहते हुए मुझे फँसाने के बजाए ईमानदारी से पीड़ितों को राहत पहुँचाने का प्रयास करते, तो पीड़ितों का कुछ भला अवश्य हो सकता था।
भाजपा की प्रचंड विजय के चलते अपने ही दल में अप्रासंगिक हो जाने के कारण यदि मेरे नाम की माला जलाने से आपका अपनी पार्टी में कुछ भला हो जाए, तो इसे भी मैं अपना उन पर एक और अहसान ही मानूँगा।l
पूज्य भगवान सिंह जी रोलसाहबसर स्वयं एक प्रेरणा गीत थे…
मैंने भी श्रद्धांजलि सभा के सहगीत में अपनी आवाज मिलाकर उनके प्रेरक व्यक्तित्व का पुण्य स्मरण किया।
आज के इस दौर में किसी समाज को संवारना आसान नहीं है। इसके लिए अनुशासन, संयम और सबसे बढ़कर एक ऐसा मार्गदर्शक चाहिए, जिसके शब्द कड़वे हों, मगर सच्चे, जो दिल को छू जाएँ और जिंदगी को नई दिशा दें। भगवानसिंह रोलसाहबसर ऐसी ही एक शख्सियत थे, एक ऐसा सूरज, जो अपने प्रकाश से न सिर्फ अपने समाज को, बल्कि हर उस इंसान को रौशन करता था, जो उनके संपर्क में आता था।
एक पत्रकार के नाते, मुझे बाड़मेर और जयपुर में उनसे कई बार मिलने का मौका मिला। हर मुलाकात, चाहे वो लंबी बातचीत हो या उनकी व्यस्तता और स्वास्थ्य के चलते बस एक छोटी-सी औपचारिक भेंट, मेरे लिए एक तीर्थयात्रा जैसी थी। हर बार उनके पास से निकलते वक्त मेरे भीतर एक नई ऊर्जा, एक नया जोश जाग उठता था। उनकी आँखों में समाज के लिए वो चिंता, वो दर्द और वो सपना साफ दिखता था, जो आज के दौर में दुर्लभ है।
मुझे आज भी 2019 का वो पहला इंटरव्यू याद है। करीब 40 मिनट की बातचीत में मैं उनके सामने बस एक मंत्रमुग्ध श्रोता बन गया था। उनके शब्दों में ऐसी ताकत थी कि मैं अपने सवाल भूल जाता था। उनकी आवाज़ में आज के युवाओं की चिंता, नशे के दलदल में डूबते समाज का दर्द, और सबसे बढ़कर, हर इंसान को साथ लेकर चलने की वो भावना थी, जो मेरे रोंगटे खड़े कर देती थी। उनकी बातें सिर्फ कान तक नहीं, सीधे दिल तक उतरती थीं। वो कहते थे, "समाज को बदलना है, तो पहले खुद को बदलो।" और ये शब्द मेरे जहन में हमेशा के लिए गूँज गए।
आज का दौर ऐसा है, जहाँ हर कोई अपनी ही दौड़ में लगा है। हम सब अपने लिए, अपने परिवार के लिए भाग रहे हैं, बिना ये सोचे कि हमारे आसपास का समाज, हमारे लोग कहाँ जा रहे हैं। लेकिन भगवानसिंह जी? वो इस स्वार्थी दुनिया में एक अनोखे फरिश्ते थे। उन्होंने कभी अपने लिए नहीं सोचा। न अपने परिवार के लिए, न अपने बच्चों के लिए। उनकी चिंता थी तो बस समाज के लिए—हर उस पीड़ित, शोषित और गरीब के लिए, जो इस दुनिया की ठोकरों में खो गया है। वो बिगड़ते सामाजिक सौहार्द को देखकर व्यथित थे, और उनके दिल में हर किसी के लिए जगह थी।
उनके जाने के बाद एक खालीपन-सा महसूस होता है। मन कहता है, काश! वो थोड़ा और वक्त हमारे बीच रहते। काश! उनकी बातें और लोगों तक पहुँचतीं। अगर सचमुच कोई भगवान है, तो मैं नम आँखों से उनसे यही दुआ माँगता हूँ—इस कलयुगी धरती पर भगवानसिंह जी जैसे लाखों सितारे भेजें, जो हमारी और हमारी आने वाली पीढ़ियों को सही रास्ता दिखाएँ।
उनके विचार, उनकी प्रेरणा और उनका बलिदान हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगा। नम आँखों से, शत-शत नमन, भगवानसिंह जी। आप हमारे बीच नहीं, मगर आपके सपने, आपकी बातें हमें हमेशा रास्ता दिखाती रहेंगी।
- अशोक शेरा
श्री क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक पूज्य भगवान सिंह जी रोलसाहबसर आज 5 जून 2025 को अपना शरीर त्याग कर परम तत्व में स्थित हो गए। संरक्षक श्री की पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए कल 6 जून को संघशक्ति भवन जयपुर में रहेगी।
श्री क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक पूज्य भगवान सिंह जी रोलसाहबसर आज 5 जून 2025 को अपना शरीर त्याग कर परम तत्व में स्थित हो गए। संरक्षक श्री की पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए कल 6 जून को संघशक्ति भवन जयपुर में रहेगी।